अतिवृष्टि से खराब और लेट हुई फसल ने बिगाड़ा दीवाली पर व्यापार का गणित

इटारसी। मौसम की मार से खेतों में कुछ फसल चौपट हो गयी तो कुछ देरी से आने के कारण दीपावली पर व्यापार का गणित कमजोर पड़ गया है। इस वर्ष अतिवृष्टि ने फसलों का गणित बिगाड़ा तो किसान को चिंता सताने लगी कि कैसे मनेगी दिवाली। किसान की सोयाबीन की फसल नहीं हुई तो धान और मक्का देर तक बारिश का मौसम रहने से कटाई में देरी होने के कारण दीपावली पर बाजार का गणित बिगड़ गया। धनतेरस से नौकरीपेशा लोग बाजार में आए तो आटो मोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, मोबाइल, फर्नीचर, कपड़ा बाजार चिंता में कुछ कमी आयी है। हालांकि किसान ग्राहक नहीं आने से सराफा में अपेक्षाकृत कम ग्राहकी है। महज कर्मचारियों के भरोसे दीपावली का पर्व कमजोर ही रहने की आशंका है।
क्षेत्र में हुई तेज और अनवरत बरसात से सोयाबीन सहित अन्य फसल चौपट होने से किसानों की दीपावली फीकी रहने वाली है। तीन माह से लगभग लगातार हुई बारिश ने किसानों के खेतों से पानी सूखने ही नहीं दिया। ऐसे में सोयाबीन खेतों में ही सड़ गई। सोयाबीन की बात करें तो किसानों के हिस्से में खेती में किया खर्च भी आता नहीं दिख रहा है। क्षेत्र में सोयाबीन की फसल पर ही किसानों की दीपावली होती है, लेकिन लगता है इस बार दीपावली की चमक भी फीकी ही रहने वाली है। कारण, सोयाबीन की उपज में भारी कमी आई। किसानों की मानें तो लगातार बारिश ने उपज का पारा बिल्कुल नीचे ला दिया है। किसानों को हर साल के मुताबिक एक चौथाई हिस्सा भी नसीब नहीं हुआ।

अक्टूबर में दीवाली का असर
बाजार के सूत्र बताते हैं कि इस वर्ष दीपावली का पर्व अक्टूबर माह में होने से भी काफी फर्क पड़ा है। दरअसल, इस वर्ष बारिश के दिन अधिक होने से खेत सूखने में वक्त लगा और फसल कटाई पिछड़ गई। ऐसे में किसानों की फसल अभी खेत से खलिहान के बीच ही झूल रही है। उसे बाजार में आने में वक्त लगेगा। यदि नवंबर में दीपावली का पर्व होता तो किसान भी अपनी उपज बेच पाता और बाजार में पैसा आता। लेकिन, अक्टूबर में दीपावली होने से किसान अभी किसानी के कार्य से ही फुर्सत नहीं हो पाया है। कुल जमा किसानों की दीपावली महज औपचारिक ही रहेगी, क्योंकि उसे खेत से निकलने का वक्त नहीं मिल पा रहा है। फिर आसमान पर बादल और कभी-कभार हो रही बूंदाबांदी ने भी उसकी चिंता बढ़ा दी है। वह फिलहाल अपनी फसल बचाने की कवायद में जुटा है। दीपावली पर खरीदी की बजाए अभी किसान दीपावली के दिन महज पूजा-पाठ करके या पर्व की परंपराएं निभाकर इतिश्री कर लेगा।


इनका कहना है…!
शुक्रवार को धनतेरस से बाजार में कुछ उठाव दिख रहा है। गुरुवार तक हालत खराब थी। अब व्यापारी को उम्मीद है कि आने वाले दो दिन व्यापार के मुताबिक अच्छे जाने वाले हैं। आज से सर्विस क्लास के लोग निकले हैं। किसानी ग्राहकी फसल लेट होने से इस बार हो पाएगी, इसकी संभावना कम ही है।
यज्ञदत्त गौर, अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन
आज की स्थिति में किसानों का अनाज या तो खेतों से निकल रहा है या जिनका निकल गया, उनका खलिहान में है। अभी अनाज निकालकर अन्य कामों से निबटने के बाद ही किसान उपज को बाजार में ला पायेगा। जब फसल बाजार में आएगी, बिकेगी तभी तो किसान के पास पैसा आएगा। ऐसे में फिलहाल की स्थिति तो यह है कि किसान केवल पर्व की परंपराएं निभाएगा। खरीदारी करने के विषय में अभी सोचने का भी वक्त नहीं है।
विजय चौधरी बाबू, किसान जुझारपुर

आज से पांच दिवसीय महापर्व शुरु
दीपावली पांच दिवसीय महापर्व है। धनतेरस से दूज तक इसे मनाया जाता है। आज से यह महापर्व प्रारंभ हो गया है। दीपावली को लेकर बाजार सज गए हैं। लोग अपने सामथ्र्यनुसार जमकर खरीददारी कर रहे हैं। बाजारों में भीड़ लगी हुई है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि दीपावली 5 दिवसीय महापर्व होने के कारण प्रथम दिन धनतेरस, दूसरे दिन छोटी दिवाली, तीसरे दिन दीपावली, चौथे दिन गोवर्धन व पांचवे दिन भाई दूज के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। धनतेरस से नौकरीपेशा लोग बाजार में आए तो आटो मोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, मोबाइल, फर्नीचर, ज्वेलरी के अलावा पटाखा बाजार, दीये, बताशे, लाई, सजावट की झालरें, आकर्षक चित्रों के पोस्टर, गिफ्ट आयटम, विद्युत बल्वों की झालरे, मिठाई की दुकानों पर रोनक आ गयी है।

सज गए हैं शहर के बाजार, ऑफर्स की बारिश
शहर के मुख्य सराफा बाजार, कपड़ा बाजार, टीवी, फ्रीज, मोटर बाइक, फर्नीचर की दुकानों पर ग्राहक ऑफर्स की तलाश में पहुंचने लगे हैं। हर तरह के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों को दीपावली के लिए लडिय़ों से सजा दिया गया है। दुकानदारों ने हर श्रेणी का सामान बिक्री के लिए रखा हुआ है। उधर गिफ्ट आइटम्स की भी मार्केट में भरमार है। लोग दिवाली पर उपहार देने के लिए खरीददारी कर रहे हैं। हलवाइयों के यहां भी दीपावली को लेकर पैक मिठाइयों की बुकिंग हो चुकी है। खरीदारों की बाजारों में भीड़ लगी हुई है।

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