अधिवक्ता रहे कार्य से विरत, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

अधिवक्ता रहे कार्य से विरत, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

इटारसी। लॉ कमीशन की सिफारिशों के विरोध में आज वकीलों ने न्यायालयीन कार्य नहीं किया। अधिवक्ता संघ के बैनर तले अध्यक्ष रघुवंश पांडेय के नेतृत्व में सभी अधिवक्ता अपने कार्य से विरत रहे और ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रपति से मांग की है कि अभिभाषकों की स्वतंत्रता को छीनने के प्रयास को रोकें और लॉ कमीशन की रिपोर्ट तुरंत वापस करने की सलाह संबंधित को दें। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता हिमांशु मिश्र, अरविंद गोईल, मधुसूदन यादव, पारस जैन, मुकेश आर्य, प्रशांत चौरे, शशि शुक्ला, सतीश चौहान, डीके शर्मा, एमडी देवमुरारी, रमेश धूरिया सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद थे।
अध्यक्ष श्री पांडेय ने कहा है कि लॉ कमीशन की सिफारिशों का विरोध किया जा रहा है। सरकार ने अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता समाप्त करने के आशय से लॉ कमीशन से सिफारिश करायी है जिसका हम विरोध कर रहे हैं। हम इसे सरकार द्वारा अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता छीनने का प्रयास मानते हैं। राष्ट्रपति से प्रार्थना करते हैं कि सरकार के इस अधिनयायकवादी कदम पर रोक लगाएं एवं सिफारिश पर स्वीकृति नहीं दें।
सचिव पारस जैन ने कहा कि अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता को छीनने के लिए अधिवक्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु सरकार के स्वतत्रता आयोग बनाने का निर्णय व उनकी प्रक्रिया के विरुद्ध मप्र राज्य अधिवक्ता परिषद ने लॉ कमीशन के पास अपना विरोध दर्ज कराके यह निवेदन किया था कि अधिवक्ताओं के अनुशासन के आदेश अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत पारित किए जाते हैंख् उसकी अपील अंतिम तौर पर उच्चतम न्यायालय निराकृत करती है, इसलिए इसमें काई हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है. न्यायपालिका व विधायिका दोनों को अभिभाषक की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने की विधि एवं नैतिक आवश्यकता नहीं है, लेकिन उक्त सुझा को लॉ कमीशन ने न मानते हुए अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता को छीनने के लिए एक न्यायपालिका व विधायिका से जुड़े व्यक्तियों का आयोग बनाने का सुझाव दिया है. इसके विरोध में प्रदेश के समस्त अधिवक्ता न्यायालयीन कार्य से विरत रहे हैं।

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