अनूठा मामला : माता पिता में अलगाव, बेटियों ने छोड़ा साथ

इटारसी। पति-पत्नी के बीच विगत 10 वर्षों से चल रहे विवाद के बीच दोनों ने समझौता करने के बजाय तलाक लेने का निर्णय ले लिया। माता-पिता के बीच तलाक की नौबत आते ही दोनों बच्चों ने भी माता-पिता से किनारा कर लिया। बच्चों का कहना था कि यदि हमारे माता-पिता साथ रहने को तैयार हैं तो हम भी उनके साथ रह सकते हैं। अन्यथा हमें उनके साथ रहना मंजूर नहीं है। माता-पिता और बच्चों की बात सुनने के बाद परिवार परामर्श केन्द्र के सदस्यों ने बच्चों के भविष्य की खातिर माता-पिता को काफी समझाइश दी लेकिन वह अपनी बात पर अडिग रहे। माता-पिता के न मानने की स्थिति में बच्चों ने भी उनके साथ रहने से इनकार कर दिया। जिसके बाद परिवार परामर्श केन्द्र के सदस्यों द्वारा दोनों बच्चों को शनिवार को सीडब्लूसी के समक्ष पेश किया जाएगा।

क्या है मामला
पुरानी इटारसी में रहने वाली एक महिला का विवाह भोपाल निवासी एक युवक के साथ वर्ष 1997 में हुआ था। विवाह के लगभग 10 वर्षों तक दोनों पति-पत्नी साथ रहे। इस दौरान महिला ने तीन बेटियों को जन्म दिया। विवाह के लगभग 10 वर्षों तक सामान्य जिंदगी जीने वाले दोनों पति-पत्नी के बीच मामूली बात को लेकर आए दिन विवाद होने लगा और विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने एक दूसरे से अलग होने का निर्णय ले लिया। इसी बीच बड़ी बेटी का विवाह होने के बाद पत्नी अपनी 21 और 17 वर्षीय बेटी को पिता के पास छोड़कर इटारसी मायके में आकर रहने लगी। पत्नी के जाने के बाद पति ने सामाजिक तौर पर मामले को सुलझाने का प्रयास भी किया लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। इसी बीच मामला परिवार परामार्श केन्द्र तक पहुंच गया तब तक दोनों बेटियां पिता के पास थी। परन्तु कुछ माह पूर्व महिला ने अपने पति के खिलाफ इटारसी न्यायालय में तलाक की अर्जी दे दी। शुक्रवार को परिवार परामर्श केन्द्र में दोनों बेटियों के साथ पहुंचे। यहां काउंसलर रमेश खंडेलवाल, शालिनी यादव, मनीष ठाकुर ने दोनों परिवारों से अलग-अलग बात की। दोनों को समझाने का प्रयास किया। आप की लड़ाई में आपके बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। पर दोनों के बीच कोई सामंजस नहीं देखते हुए जब बच्चों से बात की तो दोनों बच्चों ने अपने माता-पिता के पास रहने का मना कर दिया। इस पर परिवार रामर्श केन्द्र के काउंसलर मनीष ठाकुर ने बच्चियों से बात की एवं बच्चियों को बालिका गृह में रुकने का प्रस्ताव दिया। जिसे दोनों बालिकाओं ने तुरंत स्वीकार कर लिया जिसके बाद दोनों को बालिका गृह पहुंचाया गया।

इनका कहना है…!
बालिकाओं की उमर क्रमश: 21 एवं 16 साल की है। 16 साल की बालिका को बाल कल्याण समिति में प्रस्तुत किया जाएगा एवं 21 साल की बेटी चूंकि बालिग है, उसको सुधार गृह या किसी अन्य स्थान पर शासन की विभिन्न योजना के तहत पुनर्वास का प्रयास किया जाएगा।
रितु राजपूत, संचालिका मुस्कान बालिका गृह

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