आंदोलन की राह पर जाएगा बिजली विभाग

इटारसी। मध्य प्रदेश विद्युत विभाग के संयुक्त संगठन मध्य प्रदेश यूनाइटेड फोरम की मुख्यमंत्री कमलनाथ से 25 जून की बैठक में विद्युत संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के संबंध में चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने पूर्ण भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत भर्ती विद्युत संविदा कर्मियों को नियमित करने में कोई समस्या न कहकर एक उचित ड्राफ्ट नियमितीकरण हेतु बनाने के लिए निर्देशित किया था। संविदा कर्मियों के नियमितीकरण का ड्राफ्ट जिसमें भर्ती प्रक्रिया की भर्ती विज्ञप्ति का भी उल्लेख एवं सरलीकरण को स्पष्ट किया है। यह ड्राफ्ट 5 जुलाई को प्रेषित होने के पश्चात भी आज तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
अब यह संगठन आंदोलन की राह पर जाने की योजना बना रहा है। इसके लिए 20 अक्टूबर को होने वाली बैठक में रणनीति तैयार की जाएगी। संगठन का मानना है कि कांग्रेस के वचन पत्र बिंदु क्र. 47.16 संविदा कर्मियों को नियमित करने का वचन पूरा नहीं किया है और उसके अनुसार बिजली विभाग में नियमतीकरण की कार्यवाही प्रारंभ नहीं हुई है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विद्युत विभाग में विद्युत संविदा कर्मियों की कुल संख्या-5853 है, मध्य प्रदेश विद्युत संविदाकर्मी हेतु 2 वर्ष पूर्व से ही नियमित मूल वेतन का 90 फीसद प्रदाय किया जा रहा है जिसके पश्चात अब मध्य प्रदेश विद्युत विभाग के समस्त संविदा कर्मियों को एकसाथ नियमित करने में विभिन्न बिजली कंपनियों को लगभग कुल 99 लाख का ही वित्तीय भार आएगा। संगठन के संयोजक वीकेएस परिहान का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार ने आज तक विद्युत संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के ड्राफ्ट पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नही की। इसलिए आक्रोशित विद्युत कर्मी शीघ्र ही आंदोलन के लिए मजबूर हैं।

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