आवारा कुत्तों का आतंक, नपा ने नहीं की है कोई पहल

इटारसी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश में आवारा कुत्तों के आतंक से आमजन को मुक्ति दिलाने के लिए कलेक्टर, निगम आयुक्त, नगर पालिका सीएमओ को इनकी रोकथाम के आदेश दिए हैं। विभाग से आदेश आए करीब एक सप्ताह हो गया है। लेकिन, इटारसी नगर पालिका की ओर से इस ओर कोई पहल अब तक नहीं की गई है। हालांकि मुख्य नगर पालिका अधिकारी अपने बचाव में कह रहे हैं कि उन्होंने आदेश कर दिये हैं और स्वास्थ्य अमला इस कार्य में जुट गया है। जबकि शहर में ऐसी कोई भी गतिविधि दिखाई ही नहीं दे रही है।
शहर में हर मोहल्ले में एक सैंकड़ा से कम कुत्ते नहीं हैं जिनका रात 9 बजे के बाद से आतंक शुरु हो जाता है। ये दुपहिया वाहन चालकों, पैदल चलने वालों, आटो चालकों के पीछे भागते हैं और कई बार काट भी लेते हैं। शहर की मुख्य मार्ग ही नहीं, अस्पतालों और गलियों में भी आवारा कुत्तों का आतंक है। रोज न जाने कितने लोग इनका शिकार बनते हैं। नगर पालिका के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है, जिससे पता चले कि नगर में कितने कुत्ते हैं। तापमान बढऩे पर कुत्ते ज्यादा हमलावर होते हैं। इन दिनों अस्पताल में कुत्ता काटने के रोज औसत पांच मामले आ रहे हैं। गर्मी में यह संख्या दोगुनी से ज्यादा हो जाती है।

छह दिन पूर्व जारी हुए आदेश
मप्र शासन नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय ने 14 जून को आवारा कुत्तों के नियंत्रण एवं उनकी रोकथाम करने के संबंध में आदेश जारी किये हैं। शहर के लगभग हर मोहल्ले में आवारा कुत्तों का आतंक है जो झुंड में घूमते हैं और राहगीर को घेरकर हमला करते हैं। ये कुत्ते रात के वक्त ज्यादा खूंखार हो जाते हैं और सुनसान सड़क पर यदि अकेला राहगीर या दुपहिया वाहन चालक निकल जाए तो उसको घेर लेते हैं। कई बार ये इतने आक्रामक हो जाते हैं कि एक साथ हमला कर देते हैं। विभाग के आदेश हैं कि आवारा कुत्तों की पहचान व उनकी गणना वैज्ञानिक तरीके से पूर्ण कराके वंधियाकरण एवं टीकाकरण की कार्रवाई नियमित और अधिक संख्या में की जाए जिससे सभी आवारा कुत्तों का बंधियाकरण एवं टीकाकरण एक निश्चित अवधि एक या दो वर्ष में पूर्ण हो सके।

अब तक के लक्ष्य बहुत कम हैं
प्रमुख सचिव संजय दुबे के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि अब तक जो लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं वे बहुत ही कम हैं और उस लक्ष्य से कभी भी सभी कुत्तों का बंधियाकरण एवं टीकाकरण किया जाना संभव नहीं है। पर्याप्त संख्या में कुत्तों को रखने के लिए डॉग पाउंड्स, केनल्स, शेल्टर्स आदि गंभीर रूप से बीमार व रैबिड कुत्तों को रखने के लिए बनाये जाएं, कुत्तों की संख्या के अनुसार शहरों में कुत्ते पकडऩे वाले वाहन और वाहन चालक स्वीकृत करें जो आवारा कुत्तों के काटने की सूचना पर नियमानुसार कार्यवाही कर सकें। एनीमल बर्थ कंट्रोल (डॉग) रूल्स 2001 के प्रावधान के पालन में सुनिश्चित हो कि आवारा कुत्तों को पकडऩे, सर्वे व आवारा कुत्तों के काटने की सूचना मिलने पर तत्काल कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त संख्या में वाहन व दल होना चाहिए।

इनका कहना है…!
पहले कुत्तों को मार दिया जाता था। अब इनको मार नहीं सकते हैं। हमने आदेश जारी कर दिये हैं और हमारा स्वास्थ्य विभाग का अमला अवारा कुत्तों को पकड़कर पशु चिकित्सालय में ले जाकर उनका बधियाकरण करा रहा है।
हरिओम वर्मा, सीएमओ

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