आसमान से बरसीं आफत की बूंदे, बन गयीं सैलाब

इटारसी। रविवार को सुबह आसमान से आफत की बूंदें बरसी हंै। ये बूंदें धरती पर सैलाब बन गयीं। पहाड़ों पर से एक साथ बड़ी मात्रा में बहकर आये पानी ने नदी और नालों के रास्ते लोगों के घरों का रुख कर लिया। पानी ने केवल एक कमरे की नहीं बल्कि किचिन और बेडरूम तक की मेहमानी कर ली और मेजबान को मजबूरी में पलंग और तख़्तों पर अपना डेरा जमाना पड़ा।
रविवार की सुबह-सुबह बारिश ने इस कदर कोहराम मचाया कि सुबह की जिंदगी जो उबासी भरी होती थी, अपने बचाव में गुजरी। सभी निचले इलाके जलमग्न थे और लोग खुद के बचाव में लगे थे। नालों पर पानी उफन रहा था, बस्तियों में मैदान तालाब और सड़कें नदियों में तब्दील हो गयी थीं। पहाड़ों से आ रहे पानी ने मेहरागांव के पास रेलवे पुलिया पर यातायात रोक दिया था। रविवार होने से हालांकि स्कूली वाहनों की रेलमपेल नहीं थी। पानी पुल के ऊपर से इतना था कि इस सीजन में पहली बार ऐसा नजारा बना था।


पुल के ऊपर से बह रहा था पानी
बारह बंगला होकर नयायार्ड जाने वाले मार्ग पर बने रपटे पर दो से ढाई फुट पानी बह रहा था तो नयायार्ड से नाला मोहल्ला वाले मार्ग के ऊंचे पुल पर भी इतना पानी था कि आवाजाही जोखिम भरी थी। हालात यह थे कि चार में से तीन पुल पूरी तरह से डूब चुके थे। बाढ़ को देखने बड़ी संख्या में तमाशायी मौके पर मौजूद थे। कई लोग मनमानी को भी उतारू थे जो तेजी से बहते पानी में से बाइक निकालने का जोखिम उठा रहे थे तो कुछ बाइक लेकर तेज धार में तो गये लेकिन फिर हिम्मत जवाब दे गयी तो रैलिंग पकड़कर खड़े रहे। ऐसे लोगों को कुछ अन्य ने मदद करके बाहर निकाला। दृश्य, भी कुछ पहले से अलग नहीं था। क्योंकि सुरक्षा के लिए यहां पुलिस का कोई जवान मौके पर मौजूद नहीं था। पुलों पर से पानी गुजर रहा था तो नयायार्ड, नाला मोहल्ला के साथ ही आसपास के ग्रामीण अंचलों के लोगों को रेलवे पुल के ऊपर से होकर आवागमन करना पड़ा। मेहरागांव की आबादी वाले हिस्से से गुजरने वाला डोलरिया मार्ग का पुल ही ऐसा था जिस पर पानी नहीं था। यह इसी वर्ष बना है जो काफी ऊंचा होने से बाढ़ की चपेट में नहीं आया। चौथा पुल नाला मोहल्ला और मेहरागांव के बीच में है जो पूरी तरह से डूब गया था। यहां इतना पानी था कि पुल तो दिखाई ही नहीं दे रहा था बल्कि आबादी क्षेत्र में भी पानी घुसने लगा था। यहां भी बाढ़ देखने बड़ी संख्या में लोग जमा हो गये थे। सीजन की अब तक की सबसे बड़ी बारिश से रेलवे स्टेशन से नयायार्ड जाने वाले मार्ग पर ठंडी पुलिया में इतना पानी भर गया था कि यहां से आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया था। यहां की रोड की एक पुलिया और साइड से नाले वाली दोनों पुलिया जिनकी ऊंचाई करीब सात फुट है, पानी में पूरी तरह से डूबी हुई थीं। हालांकि मनमानी करने वाले यहां भी नहीं रुके और जान जोखिम में डालकर निकलने का प्रयास करते रहे।


निचले हिस्से हो गये थे जलमग्न
रविवार को हुई बारिश ने शहर के निचले हिस्सों को भी जलमग्न कर दिया था। नदी नालों के किनारे बनी कालोनियों में सड़कों पर पानी बह रहा था। रेलवे लाइन के दक्षिणी हिस्से में बारह बंगला, राठी कालोनी तरफ पानी ही पानी था। यहां की हर रोड पर मानो नदी बह रही थी। मकानों में पानी घुस गया था। वार्ड 33 के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र पुराने वर्मा सेल के पास से बहने वाले नाले में आयी बाढ़ का पानी यहां के कई घरों में घुस गया था।
यहां के पीडि़त परिवारों की ओर से भाजपा के पूर्व एल्डरमेन दिनेश श्रीवास ने बताया कि हमारे घरों के पीछे से निकले नाले में एफसीआई से लेकर नरेन्द्र नगर वेंकटेस नगर तक का पानी आता है। आज बाढ़ आ जाने से घरों में पानी घुस गया था। आज का तेज पानी बारह बंगला के रेलवे क्वार्टरों में भी प्रवेश कर गया था। यहां के पीडि़तों की ओर से मंजीता अमरोही ने बताया कि यह टीआरडी कालोनी का क्षेत्र है। यहां पहली बार बारिश का पानी घरों में तीन फुट तक घुस गया था। जहां रेलवे कालोनी के अंदर पानी था तो सड़कें भी झील व नदी बनी हुई थी। कुछ बालक तो सड़कों पर मच्छर दानी से मछली पकड़ रहे थे। बारह बंगला, तीन बंगला की प्रत्येक सड़कें तेज बारिश के कारण जलभराव से नदियों की तरह हो गयी थी। पुरानी इटारसी का सूखा सरोवर का वर्षों का सूखा खत्म करके उसे वास्तविक तालाब की शक्ल दे दी थी। हां का पानी पुलिस थाना व कक्कूजी वाचनालय तक पहुंच गया था। मैदान में खड़े रेत के डंपर के चक्के भी पानी में डूबे हुए थे। ग्राम सोनासांवरी मार्ग पर पडऩे वाली पहाड़ी नदी भी उफान पर थी। शहर को तीन तरफ से घेरने वाली तीन नदियां ठंडी पुलिया, मेहरागांव और पुरानी इटारसी से पीपल मोहल्ला और सोनासांवरी होकर गुजरने वाली नदियां भी उफान पर रहीं। सोनासांवरी मार्ग पर बने पुल पर भी दो से ढाई फुट पानी बह रहा था और ग्रामीणों ने शहर आने के लिए जोखिम उठाया। जिन्होंने जोखिम उठाने की हिम्मत नहीं की, वे सोनासांवरी से खेड़ा और ओवरब्रिज होकर शहर में आये।

बंगलिया में भी पुल पर था पानी
बारिश ने पहाड़ी नदियों और नालों के आसपास ही जनजीवन नहीं बिगाड़ा बल्कि कई ऐसे क्षेत्र जहां बारिश में जलभराव की स्थिति कम होती है, वहां भी हालात बिगाड़ दिये। पिछले करीब डेढ़ माह से कुछ ही घंटों के लिए थमी बारिश ने इस कदर हालात नहीं बिगाड़े जितने केवल रविवार की कुछ घंटों की बारिश ने बिगाड़ दिये। सुबह मूसलाधार बारिश ने बादल फटने जैसा अहसास कर दिया था। बारिश से बंगलिया का नाला भी उफान पर था और ओवर ब्रिज से बंगलिया आबादी क्षेत्र में जाने के लिए एकमात्र रास्ता बंद हो गया था। पानी इतना अधिक था कि लोगों के घरों तक पहुंच गया था। रेलवे पुल के नीचे से होकर रोड के पुल पर ऊपर से पानी जाने के कारण यहां के निवासियों को रेलवे पुल के ऊपर से बाइक और पैदल निकलकर अपना काम करना पड़ा।

मानव श्रंखला बनाकर पुल पार कराया
बारिश से गांवों में भी पानी था और गांवों से शहर आने वाले रास्ते बंद हो गये थे। कई स्थानों पर पुलों पर से बह रहे पानी में से ग्रामीणों को पार कराने के लिए युवाओं ने मानव श्रंखला बनायी और सहारा देकर पुल पार कराया था। ऐसा नजारा ग्राम भीलाखेड़ी स्थित बड़ा नदी में देखने को मिला। पहले तो लोगों ने पानी उतरने के लिए करीब डेढ़ घंटे इंतजार किया और जब पानी नहीं उतरा तो मानव श्रंखला बनाकर महिलाओं को पुल पार कराया गया।

अधिकारियों ने किया जलभराव क्षेत्र का दौरा
रुक-रुक कर हो रही बारिश से शहर के अनेक निचले इलाके जलमग्न हो गये थे। पुरानी इटारसी वार्ड नंबर 2 स्थित सतपुड़ा कालोनी और होंडा शो रूम के पीछे घरों में भराया पानी भरने की खबर के बाद राजस्व विभाग का अमला निरीक्षण को पहुंचा।
पुरानी इटारसी की सतपुड़ा कालोनी में घरों में पानी भर जाने की सूचना के बाद तहसीलदार तृप्ति पटेरिया के नेतृत्व में राजस्व अमला मौके पर पहुंचा था। इस दौरान आरआई राजकुमार पटेल, पटवारी राजेश गहरवार ने नगर पालिका से जेसीबी मशीन बुलाकर जल निकासी की व्यवस्था करायी। तहसीलदार, आरआई और पटवारी ने कीचड़ ओर पानी में उतरकर पानी के निकासी की व्यवस्था बनवायी।

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