इतिहास के प्रमाणिक दस्तावेजों से संवाद की यात्रा

इतिहास के प्रमाणिक दस्तावेजों से संवाद की यात्रा

होशंगाबाद। नर्मदा महाविद्यालय इतिहास के विद्यार्थियों द्वारा इतिहास को करीब से समझने और महसूस करने के लिये के साथ एक छोटी सी यात्रा की। जिसका पहला पड़ाव – भीमबैटका था जहाँ प्रागैतिहासिक कालीन दस्तावेजों के साथ न केवल साक्षात्कार किया बल्कि संवाद भी स्थापित किया। दूसरा पड़ाव – शौर्य स्मारक था जहाँ महसूस किया वो रोमांच जिसे हमारे देश के रक्षक सीमा पर जीते हैं। तीसरा पड़ाव – राज्य संग्रहालय था जहाँ करीने से खामोश पाषाणों में जीवन को स्पंदित कर ,आने वाली पीढ़ी के लिए सांस्कृतिक विरासत के रूप में संरक्षित किया गया। चौथा पड़ाव – राज्य जन जातीय संग्रहालय था जहाँ जीवन की तरंगे आदिवासी अस्मिता के साथ लोक संस्कृति के अनेक रंगो में कुछ इस तरह अभिव्यक्त हो रही है कि जीवन गुनगुनाते हुए मुस्कुराता सा तरंगित होने लगता है। पांचवा और अंतिम पड़ाव बिड़ला मंदिर एवं बिड़ला म्यूजियम भोपाल रहा। संसार के पालनहार विष्णु को सादर नमन के साथ हम सब 21 वीं सदी में लौट आये।
विद्यार्थियों का मार्गदर्शन डॉ बी सी जोशी, डॉ कल्पना विश्वास, डॉ हंसा व्यास ने किया। विद्यार्थियों ने प्राचार्य डॉ ओ एन चौबे के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सकारात्मक सहयोग से हमने पिछले तीन वर्षों में इतिहास को प्राथमिक स्रोतो से पढ़ना समझना सीखा, साथ ही यह भी जाना कि अनुसंधान का रास्ता ऐसी ही शैक्षणिक यात्राओं से होकर जाता है।

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