इटारसी। मप्र में अतिवृष्टि से हुई भेड़ और ऊंटों की मौत का मुआवजा मध्यप्रदेश सरकार से मांगने राजस्थान से एक विधायक इन दिनों होशंगाबाद जिले में हैं। राजस्थान के जालौन से विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने यहां डेरा डाल रखा है। उनके साथ राजस्थानी चरवाहे भी मौजूद हैं।
राजस्थान के देवासी समाज के लोग जो भेड़ व ऊंटों को पालकर अपनी आजीविका चलाते हैं, ऐसे करीब दो सौ भेड़ पालक परिवार प्रतिवर्ष अपनी हजारों भेड़ और सैंकड़ों ऊंट लेकर गर्मी के दिनों में मध्यप्रदेश आते हैं। यहां इंदौर, उज्जैन, नीमच और मंदसौर जिले से अपने पशुओं को चराते हुए यह घुमक्कड़ देवासी परिवार अप्रैल-मई में होशंगाबाद जिले के खेतों में अपना डेरा डाल लेते हैं और यहां से जुलाई-अगस्त में वापसी करते हैं। इस वर्ष बारिश लेट होने से यह लोग जुलाई तक अपने जानवरों को यहां डेरा डाले रहे। जब अगस्त के प्रारंभ में अपने प्रदेश वापस जा रहे थे, तब अति बारिश का दौर शुरु हो गया और इनके हजारों भेड़ और ऊंट को सूखा स्थान नहीं मिला। यह बारिश में भीगते हुए बेमौ मारे जाने लगे। तब जिला प्रशासन होशंगाबाद ने इन जानवरों को ठहराने के लिए कृषि मंडी के शेड में व्यवस्थाएं की हैं। लेकिन, इस बीच करीब 8-9 हजार भेड़ की मौत हो चुकी थी। इस भारी नुकसान की भरपायी शासन से करवाने के लिए राजस्थान के जालौन जिले के आहोर विधानसभा क्षेत्र से विधायक छगन सिंह राजपुरोहित इटारसी आए और यहां उन्होंने सारे भेड़-ऊंट पालकों को एकत्र किया है।
विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा के निवास पर चर्चा करते हुए श्री राजपुरोहित ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में हमारे राजस्थानी पशु भेड़ों की अकाल मौत हुई है। इसका मुआवजा मप्र सरकार व जिला प्रशासन होशंगाबाद से भेड़ पालक परिवारों को दिलाने के लिए हम यहां आये हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या भेड़ों को राजस्थान में ही दाना-पानी नहीं मिल सकता, उनको यहां क्यों लाया जाता है? जवाब में विधायक श्री राजपुरोहित ने कहा कि हमारे यहां चारागाह नहीं है। पूरा जमीनी भू-भाग रेतीला है, इसलिए मप्र में भेड़ों को लाया जाता है। भेड़ पालक परिवार के विकास के लिए आपके प्रदेश में क्या योजना है? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने आश्रम और स्कूल कालेज बनवाये हैं, जहां इन भेड़ पालकों के बच्चे ठहरकर अपना भविष्य बना रहे हैं।
भेड़ पालकों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा, सिवनी मालवा विधायक प्रेम शंकर वर्मा एवं सांसद राव उदय प्रताप सिंह भी श्री राजपुरोहित का सहयोग कर रहे हैं। विधायक के साथ आये राजाराम देवासी, गोपाल देवासी, हंसराज वकील एवं सुरजाराम ने बताया कि होशंगाबाद में जितने भेड़ पालक हैं, वह सब हमारे जालौन जिले के हैं। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान लाखाजी देवाजी थूम्बा के डेरे में हुआ है। इनकी करीब ढाई हजार भेड़ों की अकाल मौत हुई है। दूसरे नंबर पर नदाजी देवासी हैं जिनके 19 सौ जानवर अकाल मौत का शिकार हुए हैं। कुल अनुमानित संख्या 8 से 9 हजार है। इन प्रवासी राजस्थानियों ने बताया कि किनको कितना मुआवजा मिल पाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल प्रयास चल रहे हैं।
ऊंट और भेड़ की मौत का मुआवजा मांगने राजस्थान से आए विधायक

Manju Thakur
मंजू ठाकुर वरिष्ठ पत्रकार एवं Narmadanchal.com के संस्थापक-संपादक हैं। वे वर्ष 2004 से नर्मदांचल क्षेत्र और मध्य प्रदेश की स्थानीय, सामाजिक, प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़ी खबरों का संपादन और प्रकाशन कर रहे हैं। उन्होंने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से संस्कृत में स्नातकोत्तर, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक तथा डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। पत्रकारिता के साथ-साथ वे डिजिटल मीडिया, समाचार संपादन एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अनुभव रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुँचाना है।
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