खुले आसमान के नीचे पड़ा है हजारों क्विंटल अनाज

इटारसी। रबी फसल के खरीद केन्द्रों पर हजारों क्विंटल अनाज खुले आसमान के नीचे पड़ा है। मौसम को देखते हुए किसानों को अपने अनाज की चिंता सता रही है तो खरीद केन्द्रों पर समितियों को भी चिंता होने लगी है। हालांकि कुछ सेंटरों पर अवकाश के बावजूद परिवहन चल रहा है। लेकिन, हम्मालों की कमी के कारण परिवहन में अपेक्षित गति नहीं है। रैसलपुर, पथरोटा, जमानी, भट्टी, मरोड़ा, रामपुर, तरोंदा सहित अनेक सेंटरों पर अनाज खुले में पड़ा है।
आसमान पर हल्के बादल हंै, और मौसम में बदलाव के कारण बारिश की आशंका के चलते न सिर्फ किसानों को बल्कि खरीद करने वाली समितियों को भी चिंता सताने लगी है। पथरोटा खरीद केन्द्र पर करीब पंद्रह सौ बोरी और रैसलपुर सोसायटी में करीब 19 सौ बोरी सहित अन्य खरीद केन्द्रों पर भी बड़ी संख्या में अनाज खुले आसमान के नीचे पड़ा है जो परिवहन के इंतजार में है। कई केन्द्रों पर अभी करीब आठ दिन और खरीद चलने की उम्मीद है। ऐसे में यदि बारिश होती है तो अनाज भीगने की आशंका बन रही है।
दो दिन रहा अवकाश
इस वर्ष गेहूं उपार्जन का काम सप्ताह में केवल पांच दिन ही हो रहा है। शनिवार और रविवार को अवकाश रहता है। ऐसे में यहां खरीद भले ही न हो, लेकिन खुले में पड़े अनाज की सुरक्षा करने की बड़ी चिंता सोसायटियों को सता रही है। पथरोटा खरीद केन्द्र पर करीब पंद्रह सौ बोरी खुले में पड़ी है। यहां करीब 9 गांव के 726 किसानों का अनाज खरीदा जाना था जिसमें से अभी करीब पचास किसान अपना अनाज लेकर नहीं पहुंचे हैं। इसी तरह से रैसलपुर उपमंडी में शेड के अलावा करीब 19 सौ बोरी खुले में पड़ी है। यहां रैसलपुर, पांजराकलॉ, इटारसी, धौंखेड़ा आदि गांव के 654 किसानों ने अपना पंजीयन कराया था और करीब सौ किसान अभी अनाज लेकर नहीं पहुंचे हैं। अवकाश होने से परिवहन भी नहीं हो पा रहा है। बताया जाता है कि शादियों का सीजन चलने के कारण हम्मालों की भी कमी हो गयी है। ऐसे में परिवहन में परेशानी आ रही है।
पानी की हो रही परेशानी
इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी के मान से खरीद केन्द्रों पर पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। समितियों ने कुछ मटके भरवाकर रखे हैं जो किसानों और यहां के कर्मचारियों के लिए पर्याप्त नहीं रहते हैं। मटकों में पानी खत्म हो जाता है और किसानों को अपनी प्यास बुझाने के लिए यहां वहां भटकना पड़ता है। मंडियों में बने खरीद केन्द्रों के अलावा ज्यादातर खरीद केन्द्र गांवों के खेतों में बने हैं जहां पर्याप्त छांव भी नहीं रहती है और किसानों को पेड़ के नीचे छांव तलाशनी पड़ती है। गर्मी और प्यास से व्याकुल किसानों को मजबूरी में कई घंटे अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। हालांकि खरीद कर रही समितियों के पदाधिकारी इस बात से इनकार करते हैं कि उनके पास व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि केन्द्रों पर पानी और छांव की व्यवस्था है तो खुले में पड़े अनाज को बारिश आदि से बचाने के लिए भी पर्याप्त पन्नियां और तिरपाल आदि हैं।
इनका कहना है…
हमारे यहां करीब आठ दिन और खरीदी चलना है। लगभग सौ किसान ऐसे हैं जो अभी पंजीयन के बाद अपना अनाज नहीं बेच सके हैं। अगले दिनों में खरीद लगभग पूर्ण हो जाएगी। बारिश से अनाज को बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं।
हरीश पटेल, प्रबंधक रैसलपुर सोसायटी
हमारे केन्द्र पर लगभग खरीद कार्य पूर्ण हो गया है। हम्माल शादी में चले गये हैं इसलिए परिवहन कार्य नहीं हो पा रहा है। दो दिन के अवकाश के कारण भी अभी काम बंद है। आगामी दिनों में परिवहन में तेजी आयेगी।
राजेश बरदिया, खरीद केन्द्र प्रभारी पथरोटा
कई सेंटरों पर अनाज खुले में पड़ा है लेकिन इसको बारिश आदि से बचाने के लिए हमारे पास पन्नियां आदि पर्याप्त मात्रा में हैं। जहां तक परिवहन की बात है तो दो दिन अवकाश था। सोमवार से परिवहन कार्य गति पकड़ेगा।
भूपेन्द्र दुबे, प्रबंधक पथरोटा सोसायटी

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