गुमटी कल्चर की पहल, शहर में होना चाहिए: एसडीएम श्री गेहलोत

विकास, व्यवस्था, रोजगार और हेल्थ पर की चर्चा

विकास, व्यवस्था, रोजगार और हेल्थ पर की चर्चा
इटारसी। छोटी पूंजी और कर्ज लेकर अपने व्यापार को स्थापित करने वाले दुकानदारों का रोज़गार न छिने और शहर भी व्यवस्थित रहे, यह प्रयास होना चाहिए। अक्सर, अतिक्रमण के नाम पर गरीबों के घर के चूल्हे बुझ जाते हैं, इस अमानवीय स्थिति से शहर को बचाने के लिए गुमटी कल्चर को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि शहर भी व्यवस्थित हो और कोई बेरोजगार भी न हो। इसकी पहल शहर में होना चाहिए। कानून व्यवस्था के लिए पुलिस, प्रशासन और राजनीतिक लोग मिलकर कार्य करें, आमजन अपनी जिम्मेदारी समझे, लोग अस्पताल में व्यवस्थाएं पाएं और इससे भी आगे कोशिश की जाए कि शासन की उन योजनाओं को पूरी ईमानदारी से संचालित किया जाए जिसके पीछे भावना यह है कि लोग बीमार ही न हों।
यह सार है, नवागत एसडीएम अभिषेक गेहलोत और शहर की मीडिया के बीच परिचयात्मक मुलाकात का। आज शाम को एसडीएम श्री गेहलोत ने मीडिया से परिचय और शहर के विषय में जानने चाय पर चर्चा की। शहर की व्यवस्थाओं पर राय जानने के लिए आज नवागत एसडीएम ने मीडिया को अपने कार्यालय पर आमंत्रित किया और विकास और व्यवस्था से जुड़े हर मुद्दे पर खुलकर चर्चा की और प्रशासन का पक्ष भी बताया। नियम से क्या हो सकता है, कहां कौन सा नियम किसी कार्य को करने में आड़े आता है, यह भी बातचीत का अंग रहा।
गुमटी कल्चर को बढ़ावा देना होगा
सबसे बड़ा मामला था, छोटे व्यापारियों को रोजगार से जोडऩे का। अक्सर रोड किनारे बैठकर व्यापार करने वालों को अतिक्रमण के नाम पर यहां-वहां हटा दिया जाता है, उनके लिए भी शहर में व्यवस्थाएं होनी चाहिए। बाजार में जो दुकानों का निर्माण होता है, उसकी कीमतें इतनी होती हैं कि ये छोटी पूंजी के व्यापारियों की पहुंच से कोसों दूर होती है। ऐसे लोगों को जब रोड किनारे या बाजार से अतिक्रमण हटाने के नाम पर बेरोजगार कर दिया जाता है तो उनके घर का चूल्हा कैसे जलता है, इस पक्ष की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। ज्यादातर ऐसे व्यापारी कर्ज़ लेकर अपना व्यापार स्थापित करते हैं और ब्याज़ और कर्जदार की रकम पटाने में ही उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा जाता है। मामले में चर्चा के दौरान जानकारी सामने आयी कि सन् 1980 के बाद शहर में गुमटियां नहीं बनीं। केवल बड़ी दुकानें बनायी जा रही हैं जो केवल बड़े और पूंजीपतियों के हाथ लगती हैं। छोटी पूंजी और व्यवसाय वाले रोड किनारे ही बैठे रह जाते हैं जिससे शहर भी अव्यवस्थित दिखता है। इस स्थिति से निजात पाने के लिए गुमटी कल्चर को बढ़ावा देना होगा। इस पर नवागत एसडीएम श्री गेहलोत ने कहा कि इस विषय पर काम करने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक पहल का प्रयास करेंगे।
बाज़ार को व्यवस्थित किया जाए
बाज़ार की व्यवस्थाओं को लेकर भी उन्होंने पुलिस और नगर पालिका प्रशासन के साथ मिलकर कोई समाधान तलाशने की बात कही। अतिक्रमण जो अस्थायी है, लेकिन बड़े व्यापारियों द्वारा करके व्यवस्था बिगाड़ी जाती है, इस पर कुछ सख़्त कदम उठाने की भी उन्होंने बात कही। जो व्यापारी पक्की दुकानों में बैठे हैं लेकिन वे बाहर तक सामान रखकर व्यवस्थाएं बिगाड़ते हैं, इसका समाधान निकाला जाएगा। बाजार में बिगड़े यातायात को सुधारने के लिए काम किया जाएगा। पत्रकारों की ओर से ही यह मामला आया था कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था कई प्रयासों के बावजूद सुधर नहीं पा रही है। एसडीएम ने कहा कि पुलिस प्रशासन से इस विषय पर चर्चा करके इस बार समाधान निकाल लेंगे। शहर में पार्किंग स्थल की कमी पर भी पत्रकारों ने ध्यान आकर्षित किया तो मल्टी स्टोरी पार्किंग की बात भी निकली। हालांकि एसडीएम ने कहा कि इस पर पहले बाजार क्षेत्र और आसपास जगह देखकर आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी ताकि इसका कोई समाधान निकाला जा सके। एसडीएम श्री गेहलोत ने आश्वस्त किया कि इस जटिल समस्या को कोई न कोई समाधान अवश्य निकाला जाएगा। वे जल्द ही शहर के बाज़ार क्षेत्र और आसपास पार्किंग आदि के लिए स्थान देखेंगे।
हेल्थ पर काम का है अनुभव
नेशनल हेल्थ मिशन में काम कर चुके एसडीएम अभिषेक गेहलोत ने बताया कि उन्हें इस क्षेत्र का अच्छा अनुभव है और वे इस विषय पर बेहतर काम करने की कोशिश करेंगे। एसडीएम ने बताया कि हेल्थ उनकी रुचि का विषय है, क्योंकि वे पहले नेशनल हेल्थ मिशन से जुड़े रहे हैं। अस्पताल में व्यवस्थाएं और बेहतर हों, यह प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एनएचएम के अंतर्गत ऐसी अनेक योजनाएं सरकार के माध्यम से संचालित हो रही हैं जिससे यह प्रयास किया जाता है कि लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं तो मिलें, लेकिन जोर इस बात पर दिया जाता है कि लोग बीमार ही न हों। उन्होंने कहा कि शहर के अस्पताल में भी ऐसी अनेक योजनाएं चल रही हैं जिन पर ईमानदारी से काम करने की जरूरत है ताकि आमजन को इसका लाभ प्रदान किया जा सके।
अवैध वेंडर की समस्या
एसडीएम ने कहा कि जल्द ही रेलवे प्रशासन, सिटी पुलिस, आरपीएफ के साथ मिलकर इस विषय पर समाधानकारक हल तलाशेंगे। उन्होंने विगत 25 जनवरी को एक अवैध वेंडर की ट्रेन से गिरकर हुई मौत का उदाहरण दिया तथा कहा कि वेंडर जिस ठेकेदार के यहां काम करता था, उसने कुछ मुआवजा देने को कहा, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। अवैध वेंडरों के कारण शहर में बढ़ते अपराधों पर भी इस दौरान चिंता जतायी गई तो एसडीएम ने कहा कि इसका समाधान भी कराने का प्रयास होगा। चर्चा में किन्नरों का विवाद का विषय भी शामिल हुआ। किन्नरों के कारण शहर का कानून व्यवस्था बिगडऩे की चर्चा भी हुई। उन्होंने इस समस्या पर पत्रकारों से जानकारी लेकर पुलिस अधिकारियों से चर्चा करके कोई समाधान निकालने को आश्वस्त किया।
किरायेदार रखने वालों को मिलेंगे नोटिस
अपराधों की रोकथाम का एक उपाए यह भी है कि शहर में कौन कहा, रहता है इसकी जानकारी प्रशासन और पुलिस को हो। यानी जो भी लोग किरायेदार रखते हैं, उन्हें उसकी पूरी जानकारी प्रशासन और पुलिस को देनी होगी। यदि नहीं देंगे तो कार्रवाई हो सकती है। एसडीएम श्री गेहलोत ने कहा कि वे धारा 144 के तहत एक आदेश निकालेंगे और किरायेदार रखने वालों को नोटिस देकर नाम, पता आदि की जानकारी लेंगे। इसके तहत वे दो माह के लिए स्थायी आदेश निकालकर जानकारी मांगी जा सकती है, यह एक प्रकार से सार्वजनिक सूचना हो जाएगी। इस सूचना के बाद उन लोगों को अपने यहां रखे हुए किरायेदार का पूरा ब्यौरा पुलिस और प्रशासन को देना होगा। इससे शहर में होने वाले अपराधों में काफी कमी आने की संभावना है।

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