चहल्लुम पर ईरानियों ने निकाला मातमी जुलूस

इटारसी। इमाम हुसैन की शहादत के अवसर पर मनाए जाने वाले पर्व मुहर्रम के चालीसवे दिन चहल्लुम पर्व पर ईरानी समाज के लोगों ने मातमी जुलूस निकाला। जयस्तंभ चौक पर ईरानियों ने इमाम हुसैन की याद में छाती पीट-पीटकर खुद को लहूलुहान कर लिया। ईरानी डेरा पत्ती बाजार के पास से निकला जुलूस बाजार क्षेत्र में होकर जयस्तंभ चौक पहुंचा और यहां युवा, बच्चे, महिलाओं ने इमाम हुसैन को याद करते हुए खुद को लहूलुहान कर लिया।
गौरतलब है कि मैदाने कर्बला में शहीद हुए इमाम हुसैन व उनके 71 अनुयायियों की शहादत के चालीस दिन बाद चेहल्लुम मनाया जाता है। इमाम हुसैन मोहर्रम की दसवीं पर शहीद हुए थे, चालीसवें पर उनके और उनके साथियों की शहादत को याद करने यह पर्व मनाया जाता है। हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम और मानवता के लिए यजीदियों की यातनाएं सहीं। करबला के मैदान में हुसैन का मुकाबला ऐसे जालिम व जाबिर शख्शियत से था, जिसकी सरहदें मुलतान और आगे तक फैली हुई थी। उसके जुल्म को रोकने के लिए इमाम हुसैन आगे बढ़े। उनके साथ मात्र 72 हकपरस्त थे, तो दूसरी तरफ यजीद की हथियारों से लैस 22000 की फौज थी। हजरत इमाम हुसैन ने शहादत कबूल करके ये पैगाम दिया कि शहादत मौत नहीं जो दुश्मन की तरफ से हम पर लादी जाती है। बल्कि शहीद एक मनचाही मौत है जिसे मुजाहिद पूरी आगाही, मंतिक सउर बेदारी और अपनी बसीरत के साथ चुनता है। हजरत इमाम हुसैन के शहादत की याद में शहादत के 40 वें दिन चेहल्लुम मनाया जाता है।

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