चार घंटे के करीब चला हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा

चार घंटे के करीब चला हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा

भाजपा-कांग्रेस आमने सामने
इटारसी। प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच शुक्रवार को दोपहर एक बड़ा पॉलिटिकल ड्रामा हुआ। भाजपा ने जयस्तंभ चौक पर प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित भेदभाव को लेकर एसडीओ राजस्व के खिलाफ धरना दिया तो कांग्रेस के एनएसयूआई विंग ने केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का पुतला जलाने का प्रयास किया। दोनों ही गतिविधियां एक ही स्थान पर होने से भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता आमने सामने आ गये और करीब चार घंटे टकराव चला। शाम को आखिरकार दोनों ही पार्टी की तरफ से एकदूसरे के खिलाफ पुलिस को ज्ञापन देकर मामला शांत हो गया।
करीब चार घंटे चले हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामे की बुनियाद एक गलतफहमी से डली थी। दरअसल, भाजपा का जयस्तंभ चौक पर प्रधानमंत्री आवास योजना में एसडीओ राजस्व हरेन्द्र नारायण पर 621 हितग्राहियों को अपात्र घोषित करने के खिलाफ धरना चल रहा था। दोपहर 2 बजे के बाद कांग्रेस की छात्र विंग एनएसयूआई के सदस्य युवा कांग्रेस अध्यक्ष मयूर जैसवाल के साथ नारेबाजी करते हुए जयस्तंभ चौक के पास केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का पुतला दहन करने आ पहुंचे। इधर भाजपा कार्यकर्ताओं को यह लगा कि कांग्रेसी विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा का पुतला दहन करने आए हैं। इस छोटी सी गलतफहमी के चलते भाजपायी भी नारेबाजी करते हुए धरना स्थल के पीछे आ गये और दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ताओं में आपस में जमकर धक्कामुक्की होने लगी। इस बीच पुलिस ने दोनों को अलग-अलग किया।


धरने पर बैठ गये कांग्रेसी
टीआई राघवेन्द्र सिंह चौहान ने कांग्रेस नेता मयूर जैसवाल को कहा कि वे अपने साथियों के साथ यहां से पीछे जाएं ताकि मामला आगे न बढ़े, बातचीत के दौरान टीआई ने कहा कि आपके पास अनुमति नहीं है, तो मयूर जैसवाल ने कहा कि आप हमें गिरफ्तार करो। इसके बाद सभी युवा कांग्रेसी धरना स्थल के पीछे सड़क पर ही धरना देकर बैठ गये। इस दौरान मयूर जैसवाल ने भोपाल फोन लगाया और प्रभारी मंत्री पीसी शर्मा से बातचीत करने की कोशिश की। हालांकि उनकी बात नहीं हो सकी। इधर दोनों ही पक्ष आमने सामने थे और एकदूसरे के नेताओं के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। पुलिस कर्मी दोनों दलों के बीच अंतर बनाकर खड़े थे ताकि टकराव और न बढ़े। बावजूद इसके ऐसे मौके कई बार आए जब दोनों दल के नेता आमने-सामने आ गये।

एक पुतला दो नेताओं का नाम
इधर कांग्रेसी सड़क पर बैठे थे, इस बीच भाजपा के धरना स्थल से धुआं उठा और मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। पता चला कि भाजपायियों ने मुख्यमंत्री का पुतला जला दिया। यह सुनते ही युवक कांग्रेसी पुलिस पर नाराज होने लगे कि मुख्यमंत्री का पुतला दहन कैसे हो गया? युवक कांग्रेसी मयूर जैसवाल ने कहा कि पुलिस भाजपा नेताओं का सपोर्ट कर रही है, पुलिस ने अपने सामने ही मुख्यमंत्री का पुतला जलने दिया। हर किसी को आश्चर्य हो रहा था कि अचानक मुख्यमंत्री कमलनाथ का पुतला इतनी जल्दी कैसे आ गया? पता चला कि जो पुतला अनुराग ठाकुर का पुलिस ने कांग्रेसियों से छीना था, उसी को भाजपायियों ने उठा लिया था और उसमें से धुआं निकलता देख यह मान लिया कि सीएम का पुतला जला है।

चर्चा है, गलत परंपरा डल गयी
शहर में चर्चा यह होने लगी है कि कौन गलत, कौन सही है, यह अलग बात है। लेकिन, आज शहर में गलत परंपरा की नींव पड़ गयी है। इस बात को न सिर्फ पुलिस अधिकारियों ने माना बल्कि जयस्तंभ के इर्दगिर्द सारा वाकया देखने वालों ने भी कहा। दरअसल, एनएसयूआई की क्या योजना थी, वे भाजपा के धरना स्थल के पास ही क्यों पुतला दहन करना चाहते थे, ये उनकी अपनी प्लानिंग का हिस्सा हो सकता है। लेकिन, लोगों का मानना था कि एक ही वक्त पर दोनों चीजें एक ही स्थान पर नहीं होकर अलग-अलग हो सकती थीं। यदि ऐसा होता तो संभवत: इस टकराव को टाला जा सकता था। क्योंकि आज जो नींव पड़ी है, उस पर आगे दूसरा पक्ष भी ऐसा ही कदम उठाएगा तो शहर की राजनीति के लिए यह अच्छी बात नहीं होगी। दोनों ही दलों में लोग आपस में एकदूसरे के मित्र भी हैं। बात जब अपना राजनीतिक धर्म निभाने की होती है, तो भले ही सभी अपनी पार्टी के लिए खड़े होते हैं, लेकिन दोस्ती भी उतनी ही शिद्दत से निभाते रहे हैं। आज जो परंपरा डाली गयी है, वह ठीक नहीं कही जा सकती।


एसडीओपी कार्यालय के सामने बैठे विधायक
विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा अपने समर्थकों और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस थाने आवेदन देने पहुंचे। उनका कहना था कि भाजपा का शांतिपूर्ण धरना चल रहा था, कांग्रेसियों ने आकर यहां हुड़दंग किया और शहर की फिजां बिगाडऩे की कोशिश की। उनकी मांग थी कि कांग्रेसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। वे केन्द्रीय मंत्री का पुतला दहन करने आए थे। उनके प्रतिनिधि के तौर पर पीयूष शर्मा, डॉ. नीरज जैन, विश्वनाथ सिंघल, दीपक अग्रवाल टीआई आरएस चौहान और एसडीओपी उमेश द्विवेदी से मिलने टीआई के कक्ष में पहुंचे थे। दोनों अधिकारियों ने कहा कि सात दिन में जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान विधायक एसडीओपी कार्यालय के सामने नीचे जमीन पर ही बैठे रहे। दोनों अधिकारियों ने भी आकर विधायक से सात दिन का वक्त मांगा तो उनकी बात मान ली।

इन्होंने ये कहा…!
हम प्रधानमंत्री आवास में एसडीओ राजस्व द्वारा 621 हितग्राहियों को अपात्र घोषित करने के विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। राजेन्द्र तोमर के नेतृत्व में कांगे्रसियों ने आकर यहां शांति भंग करने का प्रयास किया। राजेन्द्र तोमर ने गंदी-गंदी गालियां दीं। हमने पुलिस से अनुरोध किया था कि उनको यहां से वापस कर दें ताकि टकराव न बढ़े, लेकिन, वे वहीं धरने पर बैठ गये। इस मामले में पुलिस प्रशासन नकारा साबित हुआ है। कांग्रेसी हमें चाहिए आजादी के नारे लगा रहे थे, वे टुकड़े-टुकड़े गैंग की भाषा बोल रहे थे। उनको गुंडों से आजादी मांगना चाहिए, भले आदमियों से नहीं।
डॉ. सीतासरन शर्मा, विधायक

हमने दोनों पक्षों को चुना है, दोनों पक्षों ने हमें आवेदन दिये हैं। सारे मामले की वीडियोग्राफी भी करायी गयी है, वीडियो देखने के बाद ही हम अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाएंगे। हमने सात दिन का वक्त संपूर्ण कार्रवाई के लिए मांगा है, इस दौरान हम विवेचना करके आगे कार्रवाई करेंगे। जहां तक अनुमति की बात है, अनुमति दोनों ही पक्षों के पास नहीं थी। अलबत्ता भाजपा ने एसडीएम कार्यालय में आवेदन दिया था। आवेदन देने को अनुमति नहीं माना जा सकता है।

उमेश द्विवेदी, एसडीओपी
हम शांतिपूर्ण तरीके से केन्द्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर का पुतला दहन करने आये थे, क्योंकि एनएसयूआई को केन्द्रीय नेतृत्व से प्रोग्राम मिला था कि अनुराग ठाकुर ने दिल्ली में जो गोली मारने वाला बयान दिया था, उसके बाद वहां गोली चालन की घटना हो गयी। उसके खिलाफ हमें केन्द्रीय मंत्री का पुतला दहन करना था। भाजपा कार्यकर्ता हमें रोकने आ गये और पुलिस ने भी उन्हीं का साथ दिया। पुलिस की मौजूदगी में ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला जला दिया। हमने संपूर्ण घटनाक्रम से अपने उच्च नेताओं को अवगत करा दिया है।
मयूर जैसवाल, अध्यक्ष युवक कांग्रेस

भाजपा द्वारा बिना अनुमति जयस्तंभ पर धरना प्रदर्शन किया जा रहा था, जबकि विधायक हमेशा कानून की बातें कहते रहते हैं। वहां धरने की आड़ में मुख्यमंत्री का पुतला दहन कार्यक्रम चल रहा था। जिन हितग्राहियों के लिए वे धरना देने की बात कर रहे थे, उन हितग्राहियों का ही उनको समर्थन नहीं है। वहां कोई मौजूद नहीं था।
अशोक जैन, संभागीय प्रवक्ता कांग्रेस

हमारी पार्टी के कार्यकर्ता, केन्द्रीय नेतृत्व से मिले कार्यक्रम के तहत अपना राजनीतिक धर्म निभा रहे थे। वे निर्धारित स्थल पर जा रहे थे। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को उनको रोकने की जगह अपना राजनीतिक धर्म निभाना था। यदि दोनों दल के कार्यकर्ता अपना-अपना काम करते तो इस तरह की स्थिति निर्मित नहीं होती। हमारे कार्यकर्ता अपना काम कर रहे थे। भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा उनको रोकना कहीं से भी सही नहीं कहा जा सकता।
पंकज राठौर, अध्यक्ष नगर कांग्रेस कमेटी

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