छठ पर्व : नहर पर लगा उत्तर भारतीय समुदाय का मेला

इटारसी। शहर में बसे उत्तर भारतीय समाज खासकर बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश के लोगों ने लोक आस्था के पर्व छठ पर पथरोटा नहर पर डूबते सूर्य को पहला अघ्र्य दिया। इस वर्ष नहर में पानी नहीं होने के बावजूद बारिश का जितना पानी था, उसी में पंजे डुबोकर उत्तर भारत के लोगों ने छठ पर्व पर सूर्य को अघ्र्य समर्पित किया।
उत्तर भारतीय समाज द्वारा मनाए जाने वाले पर्व छठ पर्व पर पथरोटा नहर में भरे बरसाती पानी में ही खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अघ्र्य दिया गया। उत्तर भारत में यह पर्व नई फसल के आने पर मनाया जाता है और इसकी पूजा में खरीफ फसल के अनाज के नए दानों का उपयोग किया जाता है। साथ ही इस सीजन के नए फल भी उपयोग किए जाते हैं। अब तक यह कहावत प्रचलित है कि जो उदय होता है, वह डूबता अवश्य है। लेकिन, छठ पर्व संदेश देता है कि जो अस्त होता है, उसका उदय भी होता है।

नहीं छोड़ा नहर में पानी
हर वर्ष छठ पर्व के लिए नहरों में जलसंसाधन विभाग द्वारा प्रशासनिक हस्तक्षेप के साथ पानी छोड़ दिया जाता था। इस वर्ष बारिश होने के कारण पानी की खेतों में मांग नहीं होने से नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया और मजबूरी में छठ व्रतियों ने नहर में मौजूद बारिश के पानी में ही खड़े होकर सूर्य को अघ्र्य दिया। छठ पर्व के पहले दिन नदी या बहते हुए जल स्त्रोत पर जाकर डूबते हुए सूरज को अघ्र्य दिया जाता है। दूसरे दिन सुबह महिलाएं फिर नदी या बहते हुए जल स्त्रोत पर उगते हुए सूरज को अघ्र्य देती हैं। यह परंपरा महाभारत काल से चली रही है। इस पर्व को लेकर कहा जाता है कि जब पांडव जुएं में सब कुछ हार गए थे तो द्रोपती ने सूर्य देव से आराधना की थी तो जब उनका राजपाट मिल गया तो इस पर्व की शुरुआत हुई।


पथरोटा नहर पर लगा भक्तों का मेला
नहाय-खाय के साथ ही शुरु हुए छठ पर्व के अंतर्गत आज यहां पथरोटा नहर पर छठ व्रतियों ने डूबते सूर्य को अघ्र्य देकर छठ माता से अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। छठ पूजा का नियम पालन पिछले दो दिन से व्रती सादगी और पवित्रता का विशेष ध्यान रख रहे हैं। छठ पर्व के तहत खरना के बाद अस्त होते सूर्य को अघ्र्य दिया गया। रविवार उगते सूर्य को व्रतधारी अपने रिश्तेदार व मेहमानों के साथ अघ्र्य देंगे। इसके साथ ही व्रत का समापन हो जाएगा।
छठ पूजा करने वाले व्रतियों ने व्रत प्रारंभ करने से पूर्व सुबह स्नान कर धूप अगरबत्ती से सूर्य देव का ध्यान किया। उसके बाद चावल, घीया की सब्जी, चने की दाल और रोटी का भोजन ग्रहण किया। सांध्य प्रहर में फिर इसी तरह से भोजन बनाकर ग्रहण किया। खरना के दिन सुबह स्नान के बाद दिन भर व्रत रखा। रात को सादी रोटी, गुड़ वाली खीर, केला का खरना हुआ। शनिवार को पहला अघ्र्य यहां पथरोटा नहर पर हुआ। यहां रातभर वेदी बनाकर छठ माता की पूजा-अर्चना की। बताया जाता है कि शहर और आसपास लगभग एक हजार परिवार उत्तर भारत के हैं, जो वहां से यहां आकर विभिन्न कारोबार से जुड़कर यहीं रह रहे हैं। कई समाजसेवी इस छठ पूजा कार्यक्रम में विशेष योगदान देते है। रविवार को छठ व्रती सुबह उगते सूरज को अघ्र्य देने के बाद गुड़ और अदरक का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का उद्यापन करेंगे। इसी के साथ छठ पर्व का समापन होगा।

क्या है छठ पूजा
छठ पर्व सूर्यदेव की पूजा-अर्चना का पर्व है। इसे बिहार के भोजपुर निवासी खासतौर पर मनाते हैं। हालांकि यह संपूर्ण बिहार और उत्तर भारत के कुछ और रायों में मनाया जाता है। यह पर्व दीपावली के बाद छठी तिथि को मनाया जाता है। पुराणों में भी इस पर्व की महिमा का बखान किया है। मान्यता है कि इस पर्व याचक को सब कुछ मिल जाता है। पुराणों में यह भी कहा है कि इस पर्व को मनाने से कुष्ठ रोग तक दूर हो जाता है।

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