जहां ठहरे थे गांधी, वहां बनेगा स्मृति संग्रहालय

गांधी स्मृति यात्रा का शहर में जगह-जगह स्वागत किया
इटारसी। गांधी जी के चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के अवसर पर गांधी भवन भोपाल और गांधीवादी संस्थाओं के सहयोग से निकाली जा रही गांधी स्मृति यात्रा आज इटारसी पहुंची। यहां यात्रा का आत्मीय स्वागत किया। गांधी यात्रा में जयनारायण नामदेव, आरके पालीवाल, श्याम बोहरे, शंकारलाल, किशोर भाई, बीएस चौहान, राधाकृष्ण शर्मा, एके जैन आदि गांधीवादी जन इटारसी पहुंचे। यात्रा महात्मा गांधी मार्ग होते हुए जयस्तंभ पहुंची जहां नगरपालिका परिषद इटारसी की ओर से विधायक प्रतिनिधि कल्पेश अग्रवाल के नेतृत्व में यात्रा का स्वागत किया। गांधी स्टेडियम स्थित गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण के पश्चात यात्रा गोठी धर्मशाला पहुंची जहां पर गांधीवादियों, स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों और उनके वंशजों का सम्मान किया। इस अवसर पर एक सभा भी हुई। इस अवसर पर वीणा वादक पंडित सलिल भट्ट और तबला वादक हिमांशु महंत ने प्रस्तुति दी। सभा को संबोधित करते हुए आरके पालीवाल ने कहा कि चंपारण गांधी का पहला स्वदेशी सत्याग्रह था। इससे लोगों में उम्मीद जागी थी कि अंग्रेजों को हराया जा सकता है, क्योंकि इस सत्याग्रह के समय किसानों की सारी मांगे मान ली गई थी। उन्होंने कहा कि गांधी जी की आत्मा गावों में बसती थी जैसे-जैसे शहरों की ओर जाते हैं गांधी कम होते जाते हैं। इस यात्रा का पहला पड़ाव सोहागपुर के पास छेड़का गांव इसीलिए चुना था क्योंकि यह इस क्षेत्र का सबसे पिछड़ा आदिवासी गांव है। सोहागपुर के निवासी ही इस गांव की परिस्थिति से अछूते हैं। हमें गांधी आदर्शों और संकल्पों को पूरा करने की कर्मठ कोशिश करनी चाहिए। इस अवसर पर श्री पालीवाल ने गोठी परिवार से अनुरोध किया कि गोठी धर्मशाला में जिस कमरे में गांधी जी रुके थे उसे गांधी स्मृति संग्रहालय बनाया जाए। जिसके जवाब में गांधीवादी विचारक समीरमल गोठी ने कहा कि इस बात के लिए हम आश्वासन देते हैं कि गांधी स्मृति संग्रहालय बनाया जाएगा।
विनोवा भावे के शिष्य किशोर भाई ने कहा कि जिनके साथ हम रहते हैं, हम वैसे हो होते चले जाते हैं। गांधी जी और विनोवा जी के विचारों, भावनाओं, संकल्पों और कर्मों से हमें प्रेरणा मिलती है। अच्छे लोगों का स्मरण करना वरदान साबित होता है। श्याम बोहरे ने कहा कि गांधी जी का सपना था कि एक गांव को एक गणराज्य के बराबर अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा था कि हिंदुस्तान को 7 लाख गावों का महासंघ होना चाहिए। गांधी का जीवन ही संदेश है वे जैसा कहते थे वैसा करते थे और वैसा ही जीते थे।
दयाराम नामदेव ने कहा कि इटारसी का क्षेत्र गांधी विचार से अभिसिंचित है। गांधी विचार के बीज को हमें अगली पीढ़ी के लिए बोना होगा। क्योंकि विचार ही सबसे सशक्त होता है। उन्होंने कहा कि यदि आम आदमी का जीवन स्तर नहीं सुधार सका है तो यह देश आज भी आज़ाद नहीं हुआ है। इस अवसर पर वरिष्ठ गांधीवादी समीरमल गोठी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी करण सिंह तोमर, कार्यक्रम के सूत्रधार प्रोफेसर केएस उप्पल, सुधीर गोठी, पूर्व विधायक अंबिका प्रसाद शुक्ला, विजय दुबे काकू भाई, रमेश बामने, मोहन झलिया, पंकज राठौर, ब्रजमोहन सोलंकी, मनोज गुलबांके सहित नगर के सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। संचालन जसपाल सिंह भाटिया पाली ने एवं आभार प्रदर्शन विजय बाबू चौधरी ने किया।

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