जीप में आग लगाने वाले दो को 3-3 वर्ष की सजा

इटारसी। कोर्ट ने लगभग छह वर्ष पूर्व एक वाहन में आग लगाने के आरोपियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर उनको एक-एक माह का सश्रम कारावास की सजा और भोगनी होगी।
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश संजय कुमार पांडे ने निर्णय में स्पष्ट लिखा है कि आरोपी प्रशांत राजपूत एवं पप्पू उर्फ अमित गौर ने प्राथी को क्षति पहुंचाने के आशय से उनकी टाटा सूमो ग्रांड चार पहिया वाहन में आग लगाने का प्रयास किया था। परिणाम आरोपी का अपराध धारा 435 धारा 511 भारतीय दंड विधान के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में पाया। दोनों आरोपियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा एवं जुर्माना भी किया जाता है कि तथ्यों के परिपेक्ष में दोषी गण को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ प्रदान किया जाना उपयुक्त नहीं है, इसलिए उन्हें उक्त सजा से दंडित किया जाता है।
गौरतलब है कि तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश इटारसी ने आरोपी प्रशांत राजपूत एवं पप्पू उर्फ अमित गौर को भारतीय दंड विधान की धारा 435, 511 में दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा एवं 2000 के अर्थदंड से दंडित किए जाने का दंड आदेश पारित किया है। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर एक-एक माह के सश्रम कारावास की सजा पृथक से भोगना होगा। अपर लोक अभियोजक राजीव शुक्ला ने बताया कि रमन राजपाल मालवीयगंज पत्ता गोदाम के पास इटारसी में रहते हैं तथा पान मसाला का व्यवसाय करते हैं 22 मार्च 2013 को उनकी गाड़ी सूमो ग्रांड एमपी 05 सीए 1361 उनके घर के सामने खड़ी थी और वह खाना खाकर घर में सो गए थे। 23 मार्च 13 के रात्रि करीब 3:04 बजे घर के सामने आवाज आई तो वह और उसका भाई दर्पण राजपाल उठे और देखा तो घर के सामने खड़ी सूमो ग्रांड गाड़ी में प्रशांत, पप्पू और प्रवीण मिलकर कपड़े से बोनट पर आग लगाने का प्रयास कर रहे थे। उसी समय वह और उसका भाई चिल्लाया तो तीनों भागने लगे। तभी मोहल्ले का अनूप दास भी आ गया। उसने भी देखा था कि आग लगाने से उसकी सूमो ग्रैंड गाड़ी के बोनट के ऊपर काला सा पड़कर नुकसान हो गया है। वे लोग अभियुक्त प्रशांत एवं पप्पू प्रवीण को पत्ता खेलने से मना करते थे इसी कारण से इन लोगों ने उसकी गाड़ी को आग लगाने का प्रयास किया था। रमन राजपाल ने मौके की रिपोर्ट के आधार पर थाना इटारसी में अपराध क्रमांक 115/2013 धारा 452, 511, 34 भारतीय दंड विधान की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना में लिया। इसी आधार पर आरोपी को न्यायालय ने दोषी पाते हुए उक्त सजा से दंडित किया है। आरोपी प्रवीण मसीह की विचारण के दौरान 19 जून 2016 को मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उसके खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई दंड आदेश की कार्रवाई प्रस्तावित नहीं की है।

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