डॉक्टर्स नहीं आने की शिकायत पर अस्पताल पहुंचे एसडीएम

ओपीडी के नये नियमों का पालन करने के निर्देश
इटारसी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शासकीय चिकित्सालय में महिला चिकित्सकों के नये ओपीडी टाइम का पालन नहीं करने शिकायत के बाद। बुधवार को एसडीएम हरेन्द्र नारायण ने अस्पताल पहुंचकर लेडी डॉक्टर्स को वक्त पर आने को लेकर पाबंद किया। हालांकि लेडी डॉक्टर्स ने अपनी कई दलीलें दी। लेकिन, एसडीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उन्होंने अपनी ड्यूटी करने की शैली में सुधार नहीं किया तो कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
सरकारी अस्पताल में नये ओपीडी टाइम का पालन नहीं करने की शिकायतें मिलने पर बुधवार को एसडीएम ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शासकीय चिकित्सालय पहुंचकर वहां के चिकित्सकों को टाइम को लेकर सख्त निर्देश दिये हैं। संक्षिप्त बैठक में महिला चिकित्सकों को भी बुलाया गया था, जिनकी दोपहर बाद नहीं बैठने की शिकायतें थीं। बता दें कि अपने 18 सितंबर के बुलेटिन में एसीएन न्यूज ने लेडी डॉक्टर्स की मनमानी को लेकर खबर प्रसारित की थी। जिस पर संज्ञान लेकर आज एसडीएम हरेन्द्र नारायण अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एके शिवानी ने बताया कि एसडीएम ने लेडी डाक्टर्स को कहा है कि समय से आएं और नये ओपीडी नियमों का पालन करें, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा आज की बैठक में पोस्टमार्टम रूम तक जाने के लिए रोड के निर्माण पर भी बात हुई है। फिलहाल, पोस्टमार्टम रूम अस्पताल परिसर में पुराने हैजा वार्ड में संचालित किया जा रहा है। बारिश कम हो गई है, इसे पुन: मूल स्थान पर ले जाने के निर्देश भी एसडीएम ने दिये हैं।

डाक्टर्स ने ये दी सफाई
अस्पताल में डॉक्टर्स को ओपीडी के अलावा भी कई काम होते हैं। कभी पोस्टमार्टम रूम में पोस्टमार्टम के लिए जाना होता है तो कभी वार्ड में कोई गंभीर मरीज आ जाता है तो देखने जाना होता है। ऐसे में कोई मीडियाकर्मी यदि आकर खाली कुर्सी की फोटो खींच ले तो उसमें हम क्या कर सकते हैं। यही बात मीडिया से बातचीत में एसडीएम हरेन्द्र नारायण ने भी कही। इस तरह के बयान से जाहिर है, सरकारी अस्पताल की डाक्टर लॉबी कितनी एकजुट है। किसी पत्रकार को किसी डाक्टर से कोई निजी बैर नहीं होता है। पिछले दिनों जो भी खबरें प्रकाशित हुई हैं, उनमें सारी परिस्थितियों को देखने के बाद ही प्रकाशित की गई हैं। न तो उस वक्त डॉक्टर वार्ड में थे, और ना ही कोई पोस्टमार्टम चल रहा था। दरअसल, अपनी गलती को छिपाने के लिए कई तरह के बड़े बहाने बनाए जा सकते हैं। लेकिन, गलती में सुधार के लिए छोटा सा प्रयास नहीं किया जा सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल के डाक्टर अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की जगह मीडिया को यदि कटघरे में खड़ा करते हैं तो हमारा तो यह मानना है कि अधिकारियों को बिना सूचना दिये औचक निरीक्षण करके ही स्थिति देखना चाहिए।

इनका कहना है…!
यह सही है कि शिकायतें मिल रही थीं। हमने डाक्टर्स को कह दिया है कि सभी नियम से ड्यूटी करें। अधीक्षक को भी कहा है कि जिन भी डाक्टस की ड्यूटी हो, उसे सामने बोर्ड पर अंकित किया जाए ताकि मरीजों को भी पता चले कि कौन डाक्टर ड्यूटी पर है ताकि किसी प्रकार की शिकायतें न हों।
हरेन्द्र नारायण, एसडीएम

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