तवा में नहीं है पानी, धौंखेड़ा से बुझेगी शहर की प्यास

तवा में नहीं है पानी, धौंखेड़ा से बुझेगी शहर की प्यास

इटारसी। करीब 24 करोड़ की जल आवर्धन योजना सफेद हाथी ही साबित होगी। तवा नदी में पानी नहीं है, पिछले वर्ष भी यही स्थिति थी और करीब तीन किलोमीटर दूर से नदी में नहर बनाकर नगर पालिका के मेहराघाट जल संयंत्र तक पानी लाया गया था। इस वर्ष भी वही स्थिति बन रही है। इंटेकवेल से पानी काफी दूर है और नदी में पोकलेन उताकर कैनाल बनाकर इंटेकवेल तक पानी लाना पड़ेगा। बावजूद इसके मई-जून तक नदी में पानी बचेगा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। इन हालातों में धौंखेड़ा के पांच दशक पुराने जल संयंत्रों से ही शहर की प्यास बुझाई जाएगी।
गर्मियों में शहर को पेयजल की किल्लत होगी, इसके संकेत अभी से मिलना शुरु हो गये हैं। पिछले वर्षों में शहर के कई इलाके गंभीर संकट देख चुके हैं। नगर पालिका के लिए हर वर्ष गर्मियों धौंखेड़ा जल संयंत्र ही एकमात्र बड़ा सहारा होता है। शहर में कुछ नलकूप हैं, जो टैंकर भरने के काम आते हैं। इन टैंकरों से वार्डों में पानी की आपूर्ति की जाती है, क्योंकि वार्डों के नलकूप तो मार्च माह से ही दम तोडऩे लगते हैं और अप्रैल तक नब्बे फीसद नलकूप मृतप्राय: हो जाते हैं।
तैयारियों में नहीं है तेजी
फरवरी का माह खत्म होने को है और नगर पालिका की ओर से अभी गर्मियों में पेयजल वितरण की तैयारियों ने रफ्तार नहीं पकड़ी है। सीएमओ नये हैं और उनको अभी यहां गर्मियों में होने वाले पेयजल संकट का अंदाजा नहीं है। जल विभाग के अधिकारियों को उनको इसकी जानकारी देनी चाहिए। दरअसल, अब तक सीएमओ सीपी राय ने जल वितरण व्यवस्था के लिए कोई बैठक नहीं ली है और ना ही कोई कार्ययोजना बनी है। ऐसे में इस वर्ष जलसंकट के समय क्या कदम उठाए जाएंगे, इसकी जानकारी जलकार्य विभाग के पास नहीं है। मेहराघाट जल आवर्धन योजना के भरोसे गर्मियों की तैयारी करना बेमानी है और अकेले धौंखेड़ा के भरोसे रहना शहर के साथ धोखा ही होगा।
अब तक केवल यह किया
नगर पालिका ने अब तक अपनी तैयारियों में कुछ वार्डों में नये नलकूप खनन किये हैं। नपा ने अब तक वार्ड 16 में दो नलकूप, हनुमान मंदिर पुरानी इटारसी में एक, पीपल मोहल्ला में एक, न्यास के झुग्गी बस्ती में एक नलकूप का खनन किया है। लेकिन, केवल भूमिगत जल के भरोसे पेयजल वितरण व्यवस्था से काम नहीं चलने वाला है, यह पिछले वर्षों में देखा जा चुका है। गर्मियों में शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी जमीन में काफी भीतर चला जाता है। इनके अलावा शहर के विभिन्न वार्डों में 210 नलकूप हैं, जिनसे नागरिको को पानी दिया जाता है तो करीब साढ़े चार हजार नल कनेक्शन हैं। इसके अलावा गर्मियों में जलस्तर नीचे जाने के बाद टैंकरों से जल वितरण किया जाता है।
– नगर के जल संकटग्रस्त क्षेत्र
टै्रक्टर स्कीम (पहले जलस्तर गिरता)
काबड़ मोहल्ला
बूढ़ी माता क्षेत्र
सोनासांवरी नाका
सुदामा मैरिज हाल के पास

– पेयजल टंकियां
पीपल मोहल्ला
जोधराज शाला
विश्वनाथ चौराह
सिविल अस्पताल
पुरानी इटारसी
कमला नेहरु पार्क
सोनासांवरी नाका
न्यास कालोनी
गांधीनगर स्कूल
हाउसिंग बोर्ड कालोनी
– जल आवर्धन योजना
स्वीकृत- 2007- 2008
प्रस्तावित राशि- 14 करोड़ रुपए
काम शुरू हुआ- 2012 में
योजना की राशि- 24 करोड़ 36 लाख रुपए
टंकी-5 बनना है, 4 बनी
कुल पाइप लाइन- 14 किलोमीटर
क्लियर वाटर पाइप लाइन- 11 किलोमीटर
स्रोत जल से पंप तक की पाइप लाइन- 3 किलोमीटर
शहर की आबादी- रिकार्ड में 98 हजार
पहले से यह है उपलब्ध
वाटर सप्लाई- 80 लाख लीटर
पुरानी टंकी- 4
जलावर्धन की स्थिति
बिना पानी लिये हर माह करीब सवा लाख का बिजली का बिल नगर पालिका को जमा करना पड़ रहा है। दो चौकीदार पदस्थ हैं जिनका वेतन भी नगर पालिका को देना पड़ रहा है। यह महीनों से बंद पड़ी है और ऐसे में इसे चालू करेंगे तो पुन: पिछले वर्ष की तरह कई लीकेज मिलेंगे और गर्मी का सीजन उनको दुरुस्त करने में ही निकल सकता है। जैसा पिछले वर्ष का अनुभव रहा है, उससे सबक लेकर कुछ बदलाव किया तो हो सकता है, कुछ समय इस योजना से पानी मिल सकेगा।
इनका कहना है…
मेहराघाट और धौंखेड़ा जाकर निरीक्षण किया है। डिस्ट्रीव्यूशन के लिए इंजीनियर्स और ठेकेदार के साथ जल्द ही एक बैठक लेंगे। हमारा प्रयास है कि गर्मियों में नागरिकों को पर्याप्त पीने का पानी मिले।
सीपी राय, सीएमओ

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Narmadanchal

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