तालाब की शक्ल में बदल गया गांधी मैदान

हॉकी खिलाड़ी नहीं कर सके प्रेक्टिस
इटारसी। शहर के हॉकी खिलाड़ी आज अपनी प्रेक्टिस नहीं कर सके। दरअसल, रोज की तरह जब ये खिलाड़ी गांधी मैदान पर पहुंचे तो बारिश प्रारंभ हो गयी और दस मिनट में सारा मैदान एक तालाब की शक्ल ले चुका था। उनके खेलने के लिए मैदान में कोई स्थान नहीं बचा था। मायूस खिलाड़ी गैलरी में बैठकर पानी निकलने का इंतजार करने लगे, लेकिन निकासी की बदहाली ने उनके इस इंतजार को इतना लंबा कर दिया कि शाम हो गयी।
शहर का एकमात्र खेल मैदान गांधी स्टेडियम में बारिश हॉकी खिलाडिय़ों की सबसे बड़ी दुश्मन है। जहां आज की हॉकी में पानी का अहम रोल है तो वहीं, इटारसी के खिलाडिय़ों के लिए पानी दुश्मन की तरह है। दरअसल, उनके खेल का एकमात्र मैदान मिट्टी का है तो जाहिर है, बारिश में यहां खेल हो ही नहीं सकता। जबकि आज की हॉकी एस्ट्रोटर्फ पर खेली जाती है और उसमें पानी का रिसाव होता रहता है। सरकारों से एस्ट्रोटर्फ मांगने के बाद मुराद पूरी न होते देख, इसे अपनी नीयति मान चुके इन खिलाडिय़ों की प्रेक्टिस छह से आठ माह ही बमुश्किल हो पाती है। आज बारिश ने उनकी प्रेक्टिस में बाधा पहुंचायी है। मैदान पूरी तरह से तालाब की शक्ल ले चुका था। खिलाड़ी गैलरी में बैठकर व्यायाम करके पानी निकासी का इंतजार करते रहे। लेकिन, निकासी की बदहाल व्यवस्था के कारण पानी नहीं निकला और अंधेरा हो गया। खिलाडिय़ों का कहना है कि नगर पालिका ने इस मैदान का केवल उपयोग किया है और व्यवस्था के नाम पर हमेशा अनदेखी की है। मैदान में दोनों ओर निकासी के लिए नालियां हैं, लेकिन, उनकी कभी सफाई नहीं होती है और ना ही गैलरी की सफाई की जाती है। कुछ माह पूर्व मैदान की सफाई की गई थी। लेकिन, फिर कभी यहां सफाई कर्मी नहीं आए। बच्चों ने कहा कि निकासी के कारण हम खेल नहीं सके।
मैदान पर हर रोज आकर बच्चों को हॉकी कला की बारीकी सिखाने वाले कोच कन्हैया गुरयानी का कहना है कि नगर पालिका में फरियाद करने कई मर्तबा गये हैं। हमेशा हमें मायूसी ही हाथ लगी है। उन्होंने मैदान की सुरक्षा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यहां गैलरी में असमाजिक तत्वों का डेरा रहता है और रोज शराब की बोतलें और कचरा मिलता है।

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