दक्षिण का प्रमुख पर्व ओणम मनाया

इटारसी। दक्षिण भारत के प्रांत केरल का प्रमुख त्योहार ओणम को केरल निवासियों ने श्रद्धा एवं भक्तिभाव से मनाया। जिले में केरल के निवासी बहुतायत में हैं और वे वर्षों पूर्व अपने प्रांत से किसी न किसी कारण ये यहां आकर रह रहे हैं। लेकिन, अपनी संस्कृति से पूरी तरह से अब भी जुड़े हैं। इस मलयाली पर्व को दीपावली के समतुल्य माना जा सकता है। केरल में यह पर्व दस दिनों का होता है। भादौ मास की त्रयोदशी पर इटारसी में मलयाली समाज ने ओणम पर्व मनाया।
भारत विविधताओं का देश है। यहां कई धर्म और रीति-रिवाजों को मानने वाले बसते हैं। सबसे बड़ा धर्म हिन्दू धर्म है, जिसमें कई प्रकार के रीति-रिवाज चलते हंै। लोग अलग-अलग तरह से अपने त्योहारों को मनाते हैं। उत्तर से दक्षिण जाते हैं तो पर्व मनाने के तरीके बदल जाते हैं। आज दक्षिण भारत के तटीय प्रदेश केरल का मुख्य पर्व ओणम यहां के मलयाली समाज ने श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया। यह मलयाली समाज की दीपावली होती है। मलयाली समाज पिछले नौ दिनों से इस पर्व के सभी रीति-रिवाज अदा कर रहा था। बुधवार को अंतिम दिन हमारी न्यूज टीम ने सरदार भगत सिंह नगर के नया एरिया में रहने वाले मलयाली परिवार रामकृष्ण नायर के निवास पर पहुंची। यह परिवार केरल के कोट्टयम जिले से सन् 1958 में इटारसी आ गया था। इनके साथ आए कई मलयाली परिवार तो समय के साथ वापस चले गये लेकिन यह परिवार यहीं ठहर गया। तब से अब तक अपनी सामाजिक परंपरा का निर्वाह करता आ रहा है। आज ओणम पर्व की खुशियां श्रीलता, मोहन नायर, पुष्पलता श्याम नायर, कृष्णकांत बिन्दु नायर एवं आशा शशिकांत नायर ने अपने बच्चों के साथ मनायी। परिवार की महिलाओं ने फूलों की रंगोली डालकर उसमें बड़ा दीप प्रज्वलित कर सामूहिक नृत्य किया।
इस त्योहार के महत्व को लेकर श्रीमती आशा नायर ने बताया कि हमारा मलयाली समाज राजा महाबलि का अनुयायी है जिन्हें भगवान बामन ने उनके राज्य को दान में लेकर पाताल लोक का राजा बना दिया था। लेकिन वर्ष में एक बार राजा महाबलि अपनी प्रजा से मिलने अपने राज्य केरल आते थे। तभी से यह पर्व राजा बलि के स्वागत में मनाया जाता है। ओणम के पर्व को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मोहन नायर ने बताया कि जैसे हम सब मिलकर दीपावली मनाते हैं। वैसे ही यह पर्व भी है जिसे हम सब मलयाली परिवार भले ही कोई कहीं रहे लेकिन, अपनी परंपरा के अनुसार ही मनाते हैं। चूंकि यह पर्व भी सुख शांति और समृद्धि देने वाला पर्व है। मलयाली समाज ने अपनी सामाजिक परंपरा का बखूबी निर्वाह किया है। आज उनका सबसे बड़ा पर्व था और इस पर्व को खुशियों के साथ मनाया गया।

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