दीपावली पर पटाखों से ज्यादा जगमग पर रहा जोर

दीपावली पर पटाखों से ज्यादा जगमग पर रहा जोर

इटारसी। दीपावाली का त्योहार जीएसटी और नोटबंदी से लगभग बेअसर ही रहा। बाजार में दीप पर्व की जमकर खरीदी भी हुई और अपने आशियानों की साज-सज्जा में भी लोगों ने जमकर खर्च किया। अलबत्ता पटाखों की धमक उतनी नहीं रही, जितनी घरों में चमक दिखाने लोगों ने खर्च किया। कुल जमा हर्ष और उल्लास इस पर्व पर महंगाई, जीएसटी और नोटबंदी से ऊपर दिखाई दिया।
प्रकाश पर्व दीपावली मंगलवार को उत्साह और उमंग के साथ मनाया। लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी, मिठाइयों का आदान-प्रदान हुआ, मंदिरों के अलावा घर-घर में लक्ष्मी-गणेश की पूजा की गई। बच्चे, युवा और बूढ़े-बुजुर्ग तक त्योहार की खुशियों में मग्न दिखे। दीये और आधुनिक प्रकाश-स्रोत अमावस के अंधियारे को हर ओर चुनौती देते दिखे। लोगों ने इस बार पटाखों से निश्चित दूरी बनाकर रखी। पटाखे सिर्फ उतने ही चले, जितने त्योहार मनाने की रस्म निभाने को काफी होते हैं। पहले की तरह धमाके सुनाई नहीं दिए। तेज़ धमाकों से भी लोगों ने परहेज किया तो ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे भी कम ही बिके। खासबात यह रही कि इस बार चायनीज पटाखों व खिलौनों को लोगों ने ही नहीं बल्कि, दुकानदारों ने भी नापसंद कर दिया।

विरोध हो गया था शुरु
चायनीज पटाखों व सामानों को लेकर संगठनों ने विरोध करना पहले से ही शुरू कर दिया था। भारतीय जनता युवा मोर्चा ने बाजार से रैली निकालकर लोगों से चायनीज सामान व पटाखे नहीं खरीदने की अपील की थी। इसका असर बाजार में साफ देखने में मिला। लोगों ने बाजार में आए चायनीज सामान को नकारते हुए देशी पटाखे, देशी झालरों की खरीदारी की। देसी पटाखे चाइनीज पटाखों की तुलना में महंगे हैं लेकिन, बाजार में हुई खरीदारी के हिसाब से महंगाई का कोई असर नहीं दिखा। देशी पटाखे महंगे होने के बाद भी लोगों के लिए पहली पसंद रहे।

जमकर हुई बाजारों में खरीदारी
त्योहार के बाजार में खरीदारों की भारी संख्या में भीड़ उमड़ी। इसमें बाजार पूरे दिन गुलजार रहा और हरेक दुकानदार के यहां ग्राहकों की भीड़ रही। इनमें किराना से लेकर नाश्ता और इलेक्ट्रानिक, कपड़ा, बर्तन, सराफा, जूते के शो-रूम पर भी लोगों की भीड़ रही। कुल मिलाकर त्योहार के बाजार ने महंगाई, जीएसटी और नोटबंदी के असर को लगभग खत्म सा कर दिया। हालांकि अक्टूबर में दीवाली आने और फसल नहीं आने से कुछ प्रभाव अवश्य पड़ा। यदि फसल कटकर आ चुकी होती तो फिर दीपावली के बाजार में अप्रत्याशित उठाव देखने को मिलता।

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