देर रात तक चली संगीत और हास्य की जुगलबंदी

देर रात तक चली संगीत और हास्य की जुगलबंदी

इटारसी। डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर गांधी मैदान में आयोजित एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम के शुरुआती दौर में मुंबई से आए दो कलाकारों ने एक-एक देशभक्ति गीत सुनाकर आगाज़ किया और फिर फिल्मी गीतों पर श्रोताओं को झूमने को मजबूर कर दिया। मुंबई से आए संगीत निर्देशक विष्णोदेव ने देशभक्ति गीत मेरी आवाज़ सुनने वालो तुम याद रखना से कार्यक्रम की शुरुआत की और फिर उसे तुम तो ठहरे परदेशी के माध्यम से आगे बढ़ाया। गायिका माधवी श्रीवास्तव ने नए और पुराने फिल्मी गीतों को लडिय़ों में पिरोकर नए और पुराने गीतों को पसंद करने वाले श्रोताओं में तालमेल बिठाने का प्रयास किया। उन्होंने मोरनी बांगा में बोले, परदे में रहने दो, मैं तूनू समझावां के, कजरा मुहब्बत वाला, राम चाहे लीला चाहे, लीला चाहे राम जैसे गीत लगातार गाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में हंसी का दौर शुरु करने कामेडियन सुनील पाल आते, इससे पूर्व आयोजक सुरेश करिया ने शम्मा मह$िफल में जलती है तन्हां, कोई परवाना जलता नहीं है, कव्वाली गाकर लोगों का दिल जीत लिया। उन्होंने इसके बाद भर दे झोली मेरी या मुहम्मद भी गायी। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व विधायक पं. गिरिजाशंकर शर्मा ने मशाल जलाकर और शहीदों के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। इस अवसर पर उद्योगपति सतीश अग्रवाल सांवरिया भी मौजूद थे। सुरेश करिया ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। श्री शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि हम शहीदों की शहादत को न भूलें, इसलिए ऐसे कार्यक्रम होते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मंच से बाबुल सुप्रियो और विनोद राठौड़ जैसे कलाकारों को सुना है। संगीतमय कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय गायिका राशि खाड़े के गीत ऐ मेरे वतन के लोगों से हुई।
लगातार छूटे हंसी के फव्वारे
रात करीब 11बजे मंच पर आए कामेडियन सुनील पाल। आते से ही उन्होंने मजेदार चुटकुले सुनाकर दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। सुनील पाल ने रेस्टॉरंट में प्रेमिको को ले जाकर खाना खिलाने पर प्रेमी की दशा का वर्णन कर श्रोताओं को खूब हंसाया तो यूपी के आपरेशन रोमियो पर भी चुटकुला सुनाया और नाना पाटेकर, सुनील सेट्टी, शाहरुख खान, नसीरुद्दीन शाह जैसे फिल्मी कलाकारों की आवाज निकालकर उनका वीरप्पन आयटम पेश किया तो दर्शकों के हंस-हंसकर पेट में बल पड़ गए। दर्शकों की मांग पर सुनील पाल ने रतन नूरा भी सुनाया तो कुछ नए आइटम भी पेश किए। संचालन हसन नज़मी ने किया तथा गीतों को संगीत से सजाया, जबलपुर के संगीतकार बबलू मैथ्यू की आर्केस्ट्रा कलाकारों ने। देर रात तक श्रोता गांधी मैदान में कार्यक्रम सुनने के लिए उपस्थित थे।

CATEGORIES
error: Content is protected !!
%d bloggers like this:
Narmadanchal

FREE
VIEW