देर से आये, पर दुरुस्त रहें तो बेहतर होगा शहर के लिए

नाले-नालियों की सफाई में नगर पालिका एक माह पिछड़ी
इटारसी। नगर पालिका के स्वास्थ विभाग ने शहर के नाले-नालियों में जमी सिल्ट की सफाई का काम प्रारंभ करा दिया है। स्वास्थ अमले ने पहले जेसीबी से शहर की छोटे नालों की सफाई की साथ ही सफाई कर्मचारियों ने भी गलियों में बनी छोटी नालियों सफाई की है। अब बारिश का समय निकट आ रहा है। ऐसे में बड़े नालों में जमा कचरे को बाहर निकालकर पानी निकासी का माध्यम खोला जाएगा। मानसून के 15 से 20 जून के मध्य सक्रिय होने की संभावना जतायी जा रही है।
नगर पालिका ने बारिश में जलभराव की स्थिति न बने इसके लिए यादव भवन के पीछे से नालियों की सफाई प्रारंभ की है। इसके बाद आगामी पांच दिन में शहर के अन्य बड़े नालों की सफाई भी प्रारंभ कर दी जाएगी। वर्तमान में अनेक बड़ी नालियों में कचरा भर जाने से बहाव रुका हुआ था। नगर पालिका प्रशासन का यह मानना है कि बरसात से पहले अगर नालों की सफाई कर ली जाए तो अधिक बारिश में भी हालात काबू में रहेंगे। सीएमओ हरिओम वर्मा ने कहा कि नालियों की सफाई का कार्य निरंतर चलेगा ताकि पानी की निकासी में बाधा न आए।
अब तक प्रारंभ नहीं हुआ कार्य
नगर पालिका ने इस वर्ष शहर के नाले-नालियों की सफाई में काफी देर कर दी है। अमूमन हर वर्ष मई माह में बड़े नालों की सफाई कार्य लगभग पूर्ण हो जाता है जबकि इस वर्ष अभी तक प्रारंभ ही नहीं हुआ है। जिस तरह से यह कार्य प्रारंभ हो रहा है इसी तरह अगर सफाई की गई तो शहर के अधिकांश बड़े नालों में गंदगी रह जाएगी। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पिछले दिनों सीएमओ हरिओम वर्मा को अवगत कराया था। उन्होंने आश्वस्त किया था कि शहर के साइड से गुजरने वाले बड़े नालों की सफाई के वक्त सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से काम होगा, लेकिन अब तक ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया है। दरअसल, पिछले वर्षों में देखा गया है कि नगर पालिका जिस तरह से सफाई कराती है, वह रस्म अदायगी होती है। इसलिए इस वर्ष जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने काम कर रहे नर्मदांचल जल अभियान के सदस्यों ने नालों की सफाई और गहरीकरण में रुचि ली है।
इन स्थानों पर सफाई जरूरी
नगर पालिका को शहर में बाढ़ की स्थिति रोकने के लिए शहर के पूर्व और पश्चिम के साथ ही उत्तर तरफ की पहाड़ी नदियों की सफाई और गहरीकरण करना होगा, तभी काम ठीक तरह से हो सकेगा। दरअसल, नगर पालिका ने सफाई अमले ने शहर के भीतर के बड़े नाले और नालियों की सफाई तो करा ली है। लेकिन, बड़े नालों की सफाई नहीं होगी तो उनका पानी शहर के भीतर तक आएगा और शहर में बाढ़ की स्थिति निर्मित होगी। बारह बंगला से होकर नाला मोहल्ला के बीच से गुजरने वाली ठंडी पुलिया वाला नाला, मेहरागांव और इटारसी के बीच की पहाड़ी नदी और सीपीई के पास से पुरानी इटारसी, बंगलिया, अवाम नगर, पीपल मोहल्ला होकर रेलवे पुल के नीचे से सोनासांवरी गांव तक की पहाड़ी नदी की सफाई भी बेहद जरूरी है, जिस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में इनमें बारिश के वक्त तेजी से आना वाला पानी शहर की बस्तियों में घुसेगा और बाढ़ की स्थिति निर्मित करेगा।
जो होना चाहिए, वह नहीं होता
नगर पालिका का सफाई विभाग बारिश पूर्व नाले-नालियों की जो सफाई करता है, वह ऊपरी तौर पर केवल मलबा निकालकर पानी को बहने में मदद करने का केवल प्रयास भर होता है। हालांकि इससे बारिश का पानी तेजी से निकल तो जाता है, लेकिन गहरीकरण में सफाई अमला रुचि नहीं लेता है। यदि गहरीकरण हो तो इसके दो फायदे होंगे। एक तो पर्याप्त गहराई तक खुदाई से पानी जमीन में भी जाएगा, जिससे जल संरक्षण का काम भी होगा और इन नाले और नालियों के माध्यम से अधिक पानी की निकासी भी हो सकेगी। लेकिन नगर पालिका का सफाई अमला ऊपर का मलबा ही बाहर निकालता है। लेकिन, नाले-नालियों में जो गाद जम जाती है, उसको निकालना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि उसे निकाले बिना जमीन के भीतर पानी जाना संभव नहीं है। यदि इनकी सफाई के साथ ही पर्याप्त गहरीकरण का कार्य भी किया जाए तो जलसंरक्षण और बाढ़ से बचाव, दोनों कार्य हो सकेंगे।
इनका कहना है…!
नगर में नालों की जेसीबी से सफाई का काम प्रारंभ कर दिया है। यादव भवन के पीछे से काम शुरु किया है। आगामी दिनों में अन्य नालों की सफाई भी होगी। यह प्रक्रिया निरंतर चलेगी जिससे बारिश में पानी की निकासी संभव हो सके।
हरिओम वर्मा, सीएमओ

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