न्यायालय परिसर में आग की सूचना, मची भगदड़

पुलिस बल, चिकित्सा दल तत्काल मौके पर पहुंचे
इटारसी। शनिवार को दोपहर बाद, न्यायालय परिसर में भूकंप की चेतावनी मिलने की सूचना मिलते ही परिसर में मौजूद वादी-प्रतिवादी तत्काल बाहर आ गये, वकील अपने दस्तावेज और अन्य सामान लेकर जगह से हट गये तो होशंगाबाद से मुलजिम लेकर आयी पुलिस मुलजिम सहित परिसर से बाहर आ गयी। पुलिस ने बताया कि भूकंप की चेतावनी मिली है, सभी तत्काल बाहर आ जाएं, बिल्डिंग गिरने से जनहानि हो सकती है। इस दौरान इटारसी, केसला, पथरोटा का पुलिस बल भी बड़ी संख्या में मौजूद था।
सूचना पर तत्काल नगर पालिका से दमकल, अस्पताल से डाक्टर्स की टीम के साथ एम्बुलेंस, स्ट्रेचर सहित चिकित्साकर्मी समय पर पहुंचे। इस दौरान कोर्ट परिसर के पिछले हिस्से में आग की सूचना भी मिली। सौभाग्य से फायर एक्सटिंगुइशर भी काम में लिया गया। कोर्ट परिसर के पिछले हिस्से से चार पुलिसकर्मी एक घायल व्यक्ति को स्ट्रेचर पर लिटाकर तेजी से भागते हुए एम्बुलेंस से लाए। सारा नजारा देख लोगों के दिल दहल गये। लेकिन, सारी प्रक्रिया के बाद लोगों को ज्ञात हुआ कि यह केवल भविष्य में अकस्मात् घट सकने वाली विपरीत एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने के लिए सामूहिक अभ्यास कार्य था जिसे माक ड्रिल कहा जाता है।

गोपनीय रखा गया था
टीआई राघवेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि यह अकस्मात अभ्यास था और केवल न्यायालय में न्यायाधीश को इसकी जानकारी दी गई थी। वकील, न्यायालय परिसर में आने वालों, आसपास के होटल वाले, होशंगाबाद से पेशी पर मुलजिम को लाने वाली टीम को भी इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। भूकंप और अग्नि दुर्घटना में हमारी व्यवस्था कितनी चाक चौबंद है, यह जांचने के इस अभ्यास में सभी सफल हुए हैं। फायर एक्सटिंगुइशर दुरुस्त था, दमकल ठीक समय पर आयी तो मेडिकल स्टाफ भी टाइम पर मौके पर पहुंच गया था। स्ट्रेचर एम्बुलेंस में उपलब्ध था। कुल जमा, निष्कर्ष यह निकला कि इस माक ड्रिल में सभी ने पूरी जिम्मेदारी से काम करके सफल हुए।

उद्घोषणा होते ही भागे
जैसे ही इस अभ्यास को शुरु किया गया, सबसे पहले माइक से उद्घोषणा की गई कि न्यायालय परिसर के पिछले तरफ बिल्डिंग में आग लगी है, सभी लोग तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचें। उद्घोषणा होते ही वकील, मुलजिम, पेशी पर आए लोग परिसर से बाहर निकलकर खुद को सुरक्षित करने में लग गये। होशंगाबाद जेल से मुलजिम लेकर आयी पुलिस पार्टी भी मुलजिम लेकर तत्काल बाहर आकर वाहन में बैठ गयी। कोर्ट परिसर में तत्काल तमाशायी भी एकत्र हो गये। पुलिस ने भीड़ को कंट्रोल किया। इस दौरान द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश प्रीति सिंह, तृतीय सत्र न्यायाधीश संजय कुमार पांडेय, न्यायाधीश वर्ग 1 देवेश उपाध्याय, स्वाति निवेश जैसवाल भी कोर्ट में मौजूद थे।

उच्च स्तर से थे आदेश
माक ड्रिल करके व्यवस्था की सच्चाई जानने के ऐसे आदेश उच्च स्तर से ही आये थे। जानकारी के अनुसार उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्रेश कुमार खरे के निर्देश पर शनिवार को अग्नि एवं भूकंप से संबंधित माकड्रिल किया गया था। इस दौरान कोर्ट परिसर में विद्युत शार्ट सर्किट से आग लगने की काल्पनिक घटना तैयार की गई और आनन-फानन में बचाव दल, अग्निशमन दल, चिकित्सा दल, पुलिस बल को सूचना देकर बुलाया गया था। सभी इस कसौटी पर खरे उतरे हैं। माक ड्रिल की इस कवायद से वकीलों, पेशी पर आने वालों और आसपास के होटल वालों को हुई परेशानी के लिए बाकायदा माइक से खेद प्रकट कर सच्चाई बतायी गयी।

इनका कहना है…!
यह माकड्रिल था, जिसे वास्तविक रूप देने के लिए किसी को भी पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। सभी विभाग समय पर पहुंचे। बाद में कोर्ट परिसर में वकीलों और अन्य लोगों को हुई परेशानी के लिए माफी भी मांगी गई है।
राघवेन्द्र सिंह चौहान, टीआई

CATEGORIES
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: