इटारसी। रेलवे स्टेशन के पश्चिमी द्वार के सामने जीआरपी परिसर में स्थित श्री सिद्धेश्वर शिव मंदिर में चल रहे श्री विष्णु महायज्ञ का गुरुवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। इस वर्ष इस महायज्ञ का 24 वॉ वर्ष था। गुरूवार को समापन अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ की पूर्णाहुति के भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
विगत एक सप्ताह चले श्री विष्णु महायज्ञ के समापन अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु श्री सिद्धेश्वर शिव मंदिर में पहुंचे। आमतौर पर यज्ञ में जो लोग नहीं पहुंचे वे भी विश्राम दिवस पर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे थे। श्री विष्णु महायज्ञ में विश्राम दिवस पर होने वाले भंडारे में शहर के हजारों लोग पहुंचते हैं। हालात यह हो जाते हैं कि कम से कम पचास से सत्तर हजार लोग इस भंडारे में प्रसादी ग्रहण करते हैं। शाम करीब 6 बजे से प्रारंभ होने वाली भंडारा रात 12 बजे के बाद तक जारी रहता है और लगभग हर वर्ग के लोग यहां प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं। एक बार में करीब दो हजार लोगों को यहां भंडारे में प्रसाद मिलता है। कुछ लोग वहीं बैठकर भोजन प्रसादी पाते हैं तो कुछ अपने घर भी ले जाते हैं।
आज विश्राम दिवस पर संबोधित करते हुए आचार्य मनमोहन शास्त्री ने कहा कि जो दूसरों को कष्ट में डाले उसकी संगति से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस और श्रीमद् भागवत में जगह-जगह उन बातों का उल्लेख है कि कष्ट देने वाले की संगति से दूर रहना चाहिए। जीवन में व्यक्ति को कुछ नया कर गुजरने का चिंतन करते रहना चाहिए। उससे निरंतर कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति कर्म को छोड़कर आशावादी हो जाता है वह सदैव निराशा में ही रहता है, क्योंकि उसके जीवन में फिर अवसाद के अलावा उसे कुछ भी प्राप्त नहीं होता। श्रीविष्णु महायज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर यज्ञाचार्य पं. अशोक भार्गव ने रेल थाना प्रभारी बीएस चौहान एवं मुख्य यजमान दामोदर राव कोहले एवं पुष्पा कोहले सहित सभी यजमानों को आशीर्वाद दिया। शिव मंदिर के पुजारी और श्रीविष्णु महायज्ञ के संयोजक रामस्वरूप मिश्रा ने आचार्य अशोक भार्गव, प्रवचनकर्ता मनमोहन शास्त्री दीपक मिश्रा, राहुल गोस्वामी, अमित दुबे, अतुल मिश्रा, रामकिशोर तिवारी को तिलक लगाकर श्रद्धानिधि एवं विदाई दी।
पूर्णाहुति के साथ श्री विष्णु महायज्ञ का समापन
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