भगवान न करे, शहर में कोई अग्नि कांड हो जाए

दस दिन से लगातार गांव-गांव दौड़ रही नगर पालिका की दमकल

दस दिन से लगातार गांव-गांव दौड़ रही नगर पालिका की दमकल
इटारसी। भगवान न करे, शहर में कोई अग्रिकांड हो जाए! यदि ऐसा हुआ तो बचाने वाला सिर्फ़ भगवान ही मालिक रहेगा, क्योंकि नगर पालिका की दमकलें तो लगातार पिछले दस दिनों से गांवों की ओर दौड़ रही हैं। पिछले दस दिनों में हर रोज खेतों में आगजनी की दो से तीन घटनाएं हो रही हैं, अब तो नरवाई जलाने वालों पर भी जिला प्रशासन की सख़्ती दिखाई नहीं दे रही है जबकि इतिहास में जाएं तो नरवाई की आग फसलों और यहां तक गांवों तक को खास कर चुकी हैं। 22 अप्रैल को जिलवानी से शुरु हुआ इस सीज़न में आग लगने का सिलसिला, थमा नहीं है। आज देशमोहनी में आगजनी हुई।
जिलवानी से देशमोहनी तक डेढ़ दर्जन घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने इनके कारण में जाकर ऐसे लापरवाह किसानों पर कार्रवाई के प्रयास नहीं किए जो प्रतिबंध के बावजूद नरवाई में आग लगाते हैं और घटना का कारण कुछ और बता देते हैं। वर्तमान में जो कारण समझ में आ रहे हैं, वह हैं मूंग की फसल के लिए खेत तैयार करना। सवाल यह है कि ऐसे में यदि लगातार शहर की दमकलें खेतों की आग बुझाने दौड़ती रहीं तो शहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
ऐसे हो सकता है कुछ निदान
ग्राम पंचायतें स्वयं दमकल खरीद सकती हैं। दस ग्राम पंचायतें मिलकर एक दमकल ले सकती हैं, अब तो उनकी वित्तीय स्थिति भी सुदृढ़ हो चली है। गांवों और उनके खेतों की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है, न की शहर की। क्योंकि शहर को गांवों से कोई राजस्व मिलता नहीं बल्कि मानवीय आधार पर नगर पालिकाएं अपनी दमकलें भेजती हैं। दूसरा तरीका यह है कि ग्राम पंचायतों के पास अपने टैंकर हैं जिनमें पंप लगाकर उन्हें फायर फायटर बनाया जा सकता है। अनुमान के अनुसार एक टैंकर को फायर फाइटर बनाने में 25 से 30 हजार का खर्च ही आएगा। तीसरा तरीका है, कि जब कृषि उपज मंडियां किसान की फसल से राजस्व प्राप्त करती हैं तो वे क्यों दमकल नहीं खरीद सकतीं? मंडी बोर्ड अपने ढर्रे से बाहर क्यों नहीं आ सकता। जब बात संपत्ति के नुकसान की है तो क्यों नियमों को शिथिल नहीं किया जा सकता? आखिर राजस्व तो खेतों से ही मिलता है, जब फसल ही नहीं रहेगा तो राजस्व कहां से पाओगे? अब लगातार हो रही घटनाओं से लगने लगा है कि मंडी बोर्ड को इस ओर ध्यान देना ही चाहिए।
तेरह दिन में डेढ़ दर्जन घटनाएं
लगातार तेरह दिन से किसी न किसी और किसी न किसी खेत में आगजनी हो रही है। जिलवानी से शुरु हुआ सिलसिला आज देशमोहनी में तीन बार आगजनी तक आ पहुंचा है। इस बीच तीखड़ और ग्राम बिछुआ के खेत में लगी आग से फसल जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने परंपरागत तरीके से आग बुझाकर अन्य खेतों में फैलने से रोका। ग्राम तीखड़ और धुरगाड़ा के बीच खेतों में आग से करीब तीस एकड़ की फसल और लगभग बीस एकड़ की नरवाई जलकर राख हो गई। आग की सूचना के बाद नगर पालिका इटारसी की दमकल भी मौके पर पहुंची लेकिन उससे पहले किसानों की करीब दस लाख रुपए की फसल जल गई। आगजनी की घटनाओं को देखें तो 29 मार्च सबसे दुखद दिन रहा जब इस सीज़न की सबसे बड़ी आगजनी ढाबाकलॉ ढाबाखुर्द के खेतों में हुई। यहां करीब 130 एकड़ की फसल जल और आग नरवाई मिलाकर करीब एक हजार एकड़ में फैली थी। इटारसी, होशंगाबाद, शिवपुर, सिवनी मालवा की दमकलों ने लगातार साढ़े पांच घंटे खेतों में आग बुझाने दौड़ लगाई।
इन गांवों में हुई हैं आगजनी
अब तक तेरह दिन की आगजनी की घटनाओं पर नज़र दौड़ाएं तो जिलवानी, ढाबाखुर्द, ढाबाकलॉ, तीखड़, इटारसी, बीसारोड़ा, भीलाखेड़ी, बाईखेड़ी, खेड़ी बम्हनगांव,तारारोड़ा, सांवलखेड़ा, खोकसर, जेतपुरा, टेमला, गुर्रा, चारआम, धुरपन, पथरई कलॉ धौंखेड़ा, सनखेड़ा, गजपुर, देशमोहनी के अलावा कुछ अन्य गांव भी हैं। सवाल यह है कि यदि शहरों की दमकलें खेतों की आग ही बुझाती रहेंगी तो शहर की सुरक्षा तो खतरे में पड़ जाएगी। अब तक तो यहां ऐसी कोई घटना नहीं हुई और ईश्वर न करे कि ऐसा हो, लेकिन सवाल तो है कि वर्षों से हम आगजनी में इतना कुछ खो चुके हैं, बावजूद इसके कोई ऐसा समाधानकारक कदम नहीं उठाया गया है कि गांव और खेत भी सुरक्षित हो जाएं और शहरों में भी आगजनी की घटनाओं से चिंता हटे। जिला प्रशासन को स्वयं पहल करके ग्राम पंचायतों को इतना सक्षम बना देना चाहिए कि गांवों की अर्थव्यवस्था जिस खेती पर आधारित है, वह सुरक्षित रहें और शहर के भरोसे न रहे। इससे शहर की चिंता भी हटेगी और गांव और खेत भी सुरक्षित रहेंगे।
इनका कहना है…!
हमें मानवीयता के आधार पर आगजनी की घटनाओं में दमकल भेजना ही है। जहां तक शहर की सुरक्षा का सवाल है, जिला प्रशासन और राज्य शासन ने एक और दमकल की स्वीकृति दे दी है, उम्मीद है एक और दमकल शीघ्र ही हमारे पास होगी।
सुरेश दुबे, सीएमओ
it030417 (2)किसान स्वयं बने फायर बिग्रेड
शासन-प्रशासन एवं किसानों का ध्येय यह होता है कि नरवाई में आग न लगे इसी बात पर पूरा ध्यान केन्द्रित रखा है किन्तु आग लगने के बाद किन उपायों पर गौर करना चाहिए इस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। ग्राम सुपरली के कृषक योगेन्द्र पाल सिंह सोलंकी ने किसानों से अपील की है कि यदि नरवाई में आग लगती है तो इन उपायों पर अमल करें। किसान कम से कम पांच लीटर पानी, तगाडी एवं फावड़ा साथ लेकर चलें पांच फुट के बांस में एक जूट के बोरे को वर्गाकार बनाकर साथ लेकर चले ताकि दूर से आग पर काबू पाया जा सकें। अमूमन देखा गया है कि घटना स्थल पर हजारों लोग खाली हाथ ही आग बुझाने चले जाते हैं। यदि 500 व्यक्ति घटना स्थल पर अपने साथ 5-5 लीटर पानी की केन भी लेकर जायें तो 2500 लीटर पानी से तत्काल लगी आग पर काबू पाया जा सकता है और खेत खलिहानों में रखी फसल को जलने से बचाया जा सकता है। श्री सोलंकी ने बताया कि उनकी उक्त सुझाव/उपायों को अमल में लाने के लिए जन-सहयोग से फ्लेक्स व बनैरों के माध्यम से किसानों से अपील करने की तैयारी चल रही है।

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