भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना भजन पर झूमे भक्त

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना भजन पर झूमे भक्त

श्रीमद् भागवत कथा को दिया विश्राम
इटारसी। श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर संदलपुर के संत भक्त पं.भगवती प्रसाद तिवारी ने प्रद्युम्न जन्म, मणि प्रसंग, जरासंध वध, राजसूय यज्ञ, सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाने के बाद कथा को विश्राम दिया।
समापन दिवस पर सुबह 11 बजे से 1 बजे तक कथा चली. पं.भगवती प्रसाद तिवारी ने जब भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना भजन गाया तो सारा पंडाल साथ में सुर दे रहा था। करतल ध्वनि के साथ सभी भक्ति में लीन थे और
कथा का आनंद उठा रहे थे।
कथा समापन के बाद आरती महाप्रसाद वितरण और भंडारे का हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। मुख्य यजमान श्रीमती कल्पनादेवी शर्मा, डॉ.सीतासरन शर्मा ने कथावाचक पं.भगवती प्रसाद तिवारी का शॉलश्रीफल से सम्मान कर
विदाई दी। इसके बाद श्रीमद् भागवत की विदाई की गई। डॉ. शर्मा ने सात दिवस की कथा में सेवा करने वालों का आभार जताया। श्री तिवारी ने भी डॉ. शर्मा और श्रीमती कल्पना शर्मा का अभिनंदन किया। इस अवसर पर श्री तिवारी
द्वारा रचित पुस्तक जीवन का सार का विमोचन पूर्व मुख्य सचिव कृपाशंकर शर्मा और चंद्रभूषण ने किया। पुस्तक को तैयार करने में श्रीरामपुरी गोस्वामी, जगलकिशोर मालवीय ने योगदान दिया।
सुबह कथा में श्री तिवारी ने भक्ति की शक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि जितना भी जीवन में कमाओ, भौतिक चीजें यहीं रह जाएंगी, साथ केवल भथ्कत ही जाएगी क्योंकि भक्ति से ही मुक्ति होती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति
जीवन में आए दुख सहने की शक्ति देती है। उन्होंने कहा कि जीवन में खुश रहने की आदत डालनी चाहिए. जितना मिला है, उसमें खुश रहोगे तो कभी दुख पास नहीं फटकेगा। प्रतिदिन समय निकालकर घर में भी धर्म की चर्चा करनी
चाहिए जिससे घर में खुशी का वातावरण रहता है. उन्होंने कहा कि जीवन में कभी भी भूलकर किसी की बुराई नहीं करना चाहिए।
गौसेवा को अनिवार्य बताते हुए पं.तिवारी ने कहा कि गौ की सेवा जरूरी है। आज जिस मात्रा में गौ हत्याएं हो रही हैं, उसके लिए हम भी कहीं न कहीं दोषी हैं। हम यदि गौसेवा करना शुरु कर देंगे तो गौ को बूचडख़ाने में जाने से बचा
पाएंगे। जीवन का दृष्टिकोण बताते हुए श्री तिवारी ने पंडाल में उपस्थित महिलाओं से कहा कि वे अपने बच्चों को संस्कार से जीने की शिक्षा दें। बच्चियों से कहा कि वे मर्यादत रहें, मर्यादित कपड़े पहने। हमारा पहनावा बहुत हद तक
लोगों की नजरों को बुरा बनाने का कारण बनता है।
कथावाचक पं.भगवती प्रसाद तिवारी का स्वागत डॉ. शर्मा के साथ ही भैयालाल पालीवाल, ओम पालीवाल, रितुराज पालीवाल, महेन्द्र पालीवाल, भरत वर्मा, कल्पेश अग्रवाल, राहुल चौरे, सुधीर बतरा, अशोक खंडेलवाल, दीपक अठौत्रा,
हिम्मत सिंह मुख्तयार, राजेन्द्र हरदेनिया, सिवनी मालवा मंडी अध्यक्ष रामेश्वर पटेल, इटारसी मंडी अध्यक्ष विक्रम तोमर, पत्रकार शिव भारद्वाज, अनिल चौधरी ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हेमा पुरोहित और प्रमोद पगारे ने किया।

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