भारत की उन्नति में ही, हर समाज की उन्नति : विधानसभा अध्यक्ष डॉ.शर्मा

भारत की उन्नति में ही, हर समाज की उन्नति : विधानसभा अध्यक्ष डॉ.शर्मा

सामाजिक सदभाव व समरसरता के कार्यक्रम में हुए शामिल
होशंगाबाद। मध्यप्रदेश सरकार एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को धन्यवाद कि हम संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर की जयंती को सामाजिक सदभाव व समरसता के रूप में मना रहे हैं। आजादी के बाद से ही डॉ.अंबेडकर पर विदमानो को तो बोलने नहीं दिया गया, इस विषय पर राजनीतिकजन ही बोलते रहे किन्तु मध्यप्रदेश की सरकार व मुख्यमंत्री ने विदवानों को बोलने का खुला मंच दिया। उक्त बात मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष डॉ.सीताशरण शर्मा ने आज डॉ.बी.आर.अंबेडकर की 126 जयंती के अवसर पर आयोजित सामाजिक सदभाव व समरसता के कार्यक्रम में कही।
डॉ.शर्मा ने कहा कि जब तक सारे भारत की उन्नति नही हो जाती तब तक समाज की उन्नति नही हो पाएगी और ना ही किसी जाति की उन्नति हो पाएगी इसलिए आवश्यकता है पहले देश की उन्नति हो। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कुछ कुरीतियां मुगल शासनकाल से ही है। डॉ.अंबेडकर ने इसे प्रमुखता से उठाया था, उन्होंने सबसे ज्यादा जोर सामाजिक समानता पर दिया था। संविधान में समता, समानता, स्वतंत्रता का अधिकार दिया।
डॉ.शर्मा ने कहा कि संघर्ष करने से झगड़े व समाधान इन दो चीजो की प्राप्ती होती है। डॉ.अंबेडकर ने कहा कि संघर्ष तो करे किन्तु किसी के प्रति मन में बैर ना पाले। रामचरित मानस में भी लिखा है कि समरसता से देश को आगे ले जाया जा सकता है।
कलेक्टर श्री अविनाश लवानिया ने उपस्थित लोगो को पैराओलंपिक खेल में शामिल मानसिक विकालांग बच्चो की प्रेरणादायक कहानी के माध्यम से बताया कि पूरा देश उन मानसिक बच्चों की तरह होना चाहिए जो अपने एक मानसिक कमजोर साथी को उठाकर उसे साथ लेकर ओलंपिक की रैस में साथ-साथ पहुँचते हैं। श्री लवानिया ने कहा कि हम इस भावना को याद रखे कि दौड़ में अंतिम व्यक्ति भी पीछे ना छूटे, गांव के अंतिम व्यक्ति को समाज तिरस्कार की दृष्टि से देखता है वो व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है।
इसके पूर्व संविधान निर्माता डॉ.अंबेडकर के चित्र पर दीप प्रज्जवलन कर एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर वंदेमातरम व मध्यप्रदेश गान का गायन किया गया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ.शर्मा ने जांगड़ा समाज के अध्यक्ष श्री फूलसिंह चौधरी का शाल व श्रीफल देकर सम्मान किया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री कुशल पटेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती संगीता सोलंकी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अखिलेश खंडेलवाल, अजाक्स के अध्यक्ष श्री एन.आर.हरियाले, जिला पंचायत के सीईओ श्री पी.सी.शर्मा, अपर कलेक्टर श्री मनोज सरियाम, एसडीएम श्रीमती रितु चौहान, विभिन्न महाविद्यालय के प्राध्यापकगण व गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
अतिथि विदवानों ने डॉ.अंबेडकर का किया स्मरण
सामाजिक सदभाव व समरसता के कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापको ने डॉ.अंबेडकर के व्यक्तित्व, कृतित्व व उनके जीवन पर प्रकाश डाला। डॉ.संतोष व्यास ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि डॉ.अंबेडकर सही मायने में त्रिमूर्ति थे, वे अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री व अन्वेषणकर्ता थे, उनका प्रमुख विचार सामाजिक समरसता का था उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के कल्याण के लिए लगाया, तत्वज्ञान में उनकी निष्ठा रही किन्तु वे राजनीति के क्षेत्र में सबसे ज्यादा अपमानित हुए। गांधीजी से उनके वैचारिक मतभेद रहे। उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया किन्तु भारत की सनातन परम्परा नही छोड़ी। डॉ.हंसा राय ने बताया कि डॉ.अंबेडकर ने देश के प्रत्येक व्यक्ति को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया है। जिस समता, बंधुत्व व समानता की बात वे करते थे वो सदियो से भारत की संस्कृति में बही है। उन्होंने शिक्षा पर बहुत जोर दिया और कहा कि आधी रोटी खाओ पर शिक्षा ग्रहण करो। डॉ.विनिता अवस्थी ने बताया कि डॉ.अंबेडकर को वेदो का पूर्ण ज्ञान था और उन पर अध्ययनो का बहुत प्रभाव था, जब उन्होंने ज्ञान प्राप्त कर लिया तो जाना कि यह शरीर पंचतत्वो से मिलकर बना है। हम सब एक हैं तो फिर यह शोषित एवं शोषण वाली व्यवस्था कहां से पनपी। डॉ.अंबेडकर ने कहा था कि शीर्ष स्थान पाने के लिए श्रेष्ठ विकसित करना होगा, उन्होंने जाति व वर्ण व्यवस्था का पूरा अध्ययन किया था। डॉ.विनय गोखले ने बताया कि डॉ.अंबेडकर ने समाज में जाग्रति लाने का आंदोलन चलाया यह आंदोलन मनुष्य को मनुष्य के रूप में देखने का आंदोलन था, उन्होंने कहा था कि देश का विकास तब होगा जब व्यक्ति का विकास होगा। डॉ.गोखले ने कहा कि इस देश की सरकार व व्यवस्था ने डॉ.अंबेडकर को सोशल आईकान मानते हुए खुला मंच छोड़ा है।

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