भूमि का संकट है, कैसे बनाएं प्रधानमंत्री आवास

भूमि का संकट है, कैसे बनाएं प्रधानमंत्री आवास

ग्रामसभा में लिया प्रस्ताव, शासन से करेंगे पट्टे देने की मांग
इटारसी ग्राम पंचायत रानीपुर को मिले प्रधानमंत्री आवास योजना के लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाएगा, यह चिंता यहां के जनप्रतिनिधियों को सता रही है। पंचायत सचिव भी कहते हैं कि तवानगर में पंचायत के आधिपत्य की कोई भूमि नहीं है, ऐसे में यहां प्रधानमंत्री आवास का लक्ष्य कैसे हासिल किया जाएगा। पंचायत क्षेत्र में जितनी भी भूमि है, वह वन विभाग की है। वन विभाग की भूमि पर ही सिंचाई विभाग का प्रोजेक्ट संचालित हो रहा है, ऐसे में आवास के लिए भूमि कहां से लायी जाए।
इस चिंता से ग्राम सभा में सभी को अवगत कराया गया। ग्राम पंचायत रानीपुर के तवानगर कस्बे में स्थित पंचायत भवन में ग्राम सभा का आयोजन किया गया। यहां प्रधानमंत्री आवास की सूची का वाचन उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में किया गया। ग्राम सभा में उपस्थित नोडल अधिकारी सब इंजीनियर बीके उपाध्याय के मौजूदगी में पंचायत सचिव ने बताया कि ग्राम पंचायत को प्रधानमंत्री आवास योजना में 50 आवास का लक्ष्य मिला है, जिसके विरुद्ध 82 आवेदन आए हैं। इनकी सूची तैयार कर ली है, लेकिन ये आवास बनेंगे कहां, यह स्पष्ट नहीं है क्योंकि पंचायत के पास आवास के लिए कोई भूमि नहीं है। ग्राम सभा में सरपंच श्रीमती कौशल्याबाई, रोजगार सहायक सोनम मालवीय, सचिव समेर सिंह कासदे सहित ग्रामीण मौजूद थे।
इसके अलावा तवानगर में ज्यादातर लोग जल संसाधन विभाग के या तो कर्मचारी हैं या सेवानिवृत्त हैं। ये लोग विभाग के आवास में ही निवास करते हैं, इनकी अपनी कोई भूमि यहां नहीं है, ऐसे में यदि वे इस योजना के अंतर्गत लोन लेकर भी बनाना चाहें तो नहीं बना सकेंगे। बताया जाता है कि यह वन्यग्राम है और इसकी सारी भूमि वन विभाग के आधिपत्य की है। जल संसाधन विभाग ने जब यहां तवा बांध का प्रोजेक्ट शुरु किया तो विभाग से यह भूमि लीज़ पर ली थी। पंचायत को यह भी स्पष्ट नहीं है कि वर्तमान में भूमि जल संसाधन विभाग के पास है, या वन विभाग के।
वर्षों से हो रही राजस्व ग्राम की मांग
करीब दो दशक से तवानगर को राजस्व ग्राम बनाने की मांग यहां के निवासी करते चले आ रहे हैं। ग्राम पंचायत रानीपुर के जनप्रतिनिधि और यहां के राजनेता भी तवानगर के समग्र विकास और शासन की योजनाओं का समुचित लाभ लोगों को मिले, इसके लिए इसे राजस्व ग्राम घोषित कराने की मुहिम चला रहे हैं। तवानगर के लिए दो दशक में जितने भी विधायक हुए, सभी ने इस मांग का समर्थन भी किया और अपनी ओर से प्रयास भी किए लेकिन कोई तकनीकि परेशानियों के कारण यहां राजस्व ग्राम की घोषणा नहीं हो पा रही है।
चर्चा में कितनी सच्चाई?
तवानगर में इन दिनों एक चर्चा चल रही है कि जल संसाधन विभाग यहां विभाग के आवास में रहने वालों का सर्वे करा रहा है। सर्वे के बाद जो लोग जिन आवासों में रह रहे हैं, उन्हीं के नाम पर ये मकान कर दिए जाएंगे। हालांकि इस चर्चा में कितनी सच्चाई है, यह दावा कोई नहीं कर रहा है। विभाग के अधिकारी भी इस विषय पर कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं हैं। यहां के पूर्व सरपंच अभिषेक नायडू और सामाजिक कार्यकर्ता नितिन बिछौतिया ने बताया कि वल्लभभवन से एक अधिकारी पिछले दिनों आए थे, उनकी भी यहां के आवासों के संबंध में चर्चा हुई थी। मनीष होंडा नामक इस अधिकारी ने वल्लभ भवन चर्चा के लिए बुलाया था, हालांकि अभी ये लोग उनसे मिलने गए नहीं हैं। बहरहाल तवा के लोगों का यहां से जुड़ाव होने के कारण आवास पर अधिकार और राजस्व ग्राम का मुद्दा कभी खत्म नहीं हो सकता है।
इनका कहना है…!
हम ग्राम पंचायत की ओर से ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव जनपद पंचायत के माध्यम से शासन तक पहुंचा रहे हैं। प्रस्ताव में शासन से यहां आवासीय पट्टों की मांग की गई है। यदि पट्टे मिल जाते हैं तो हम प्रधानमंत्री आवास योजना पर काम कर सकते हैं।
सुमेर सिंह कासदे, पंचायत सचिव

अभी हमें भूमि संबंधी परेशानी आ रही है। ग्राम पंचायत क्षेत्र में जो भूमि है, वह वन विभाग की है और फिलहाल जलसंसाधन विभाग के पास लीज़ पर है। ऐसे में समस्या यह है कि हम यहां प्रधानमंत्री आवास योजना पर काम कैसे करें। उच्च स्तर से मार्गदर्शन मांगा जाएगा। एसडीएम-कलेक्टर से चर्चा करेंगे। सीएम ने भी कहा है, जो जहां काबिज है, उसे वहीं अधिकार मिलेगा।
मनोज गुलबाके, जनपद सदस्य

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