मन जैसे कश्मीर हुआ है, आंखें नैनीताल हुई

मन जैसे कश्मीर हुआ है, आंखें नैनीताल हुई

बसंत काव्य निशा में हुई रस भरे गीतों की बरसात
इटारसी। अखिल साहित्य परिषद इटारसी द्वारा आयोजित बंसत काव्य निशा में गीतकारों द्वारा रस भरे गीतों की बरसात हुई। काव्य रसिक श्रोताओं ने ईश्वर रेस्टॉरेंट के सभागार में बंसत काव्य निशा, निराला जयंती के अवसर पर अभिनव काव्य निशा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पीला बासंतिया चांद जैसे अमर गीत के रचनाकार गीतकार रमेश यादव भोपाल का तथा बुंदेली लोकभाषा के सुमधुर गीतकार राजेन्द्र सहारिया सोहागपुर का सारस्वत सम्मान किया। प्रशस्ति पत्र का वाचन जीपी दीक्षित व सतीष पाराशर ने किया।
सम्मान समारोह का संचालन करते हुए राजकुमार दुबे ने कवि सम्मेलन के संचालन की बागडोर परिषद के संभागीय अध्यक्ष एवं हास्य व्यंग्य कवि बृजकिशोर पटेल को सौंपी। श्री पटेल ने हास्य की चुटकियों के साथ संचालन करते हुये अपनी बारी आने पर गजल की इन पंक्तियों लोग उडऩे लगे हवाओं में पांव अपने निशान क्या देगें सुनाकर वाहवाही लूटी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संपादक गीत गागर के दिनेश प्रभात ने की. मुख्य अतिथि संस्था के संरक्षक एनपी चिमानिया रहे। गजलकार जहीर कुरैशी, गीतकार रमेश यादव, राजेन्द्र सहारिया, हरीश नाविक, बाल साहित्यकार अहद प्रकाश और रामकिशोर नाविक ने भी कविता पाठ किया। दिनेश प्रभात की इन पंक्तियों पर श्रोतागण झूम उठे आप मिले तो लगा जिंदगी, अपनी आज निहाल हुई, मन जैसे कश्मीर हुआ है, आंखें नैनीताल हुई।
रमेश यादव की यह पंक्तियां उल्लेखनीय है, माना हर कानून दबा है, मरहम है, लोग दवाओं से भी तो मर जाते हैं। जहीर कुरैशी को गजल के इस शेर पर खूब दाद मिली शहर मिटा के बनाए हो गांव, याद नहीं, यह लोग गांव मिटाकर शहर बनाते हैं। हरीश नाविक ने गीत सुनाया मैं तो पनिहारिन की गागर में ही अच्छा था। कवि रामकिशोर नाविक ने सुनाया सबका चुकता हिसाब करना है, फिर तसल्ली के साथ मरना है, जिदंगी तुझको जानने के लिए और गहराई में उतरना है। अहद प्रकाश ने ढोल की पोल खोल दी हमने, इसलिये इतने लाल पीले हैं, सुनाई। कार्यक्रम को सफल बनाने में जीपी दीक्षित, बृजमोहन सोलंकी, भगवानदास अहिरवार बेधड़क, राजकुमार दुबे, अखिलेश दुबे, सत्येन्द्र तिवारी, सुरेश चिमानिया, मयंक दुबे आदि की सराहनीय भूमिका रही।

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