महाकाल (Mahaakaal) से ही उज्जैन (Ujjain) पहचाना जाता है

महाकाल (Mahaakaal) से ही उज्जैन (Ujjain) पहचाना जाता है

मुख्यमंत्री (CM) के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना की
इटारसी। श्री दुर्गा नवग्रह मंदिर (Shri Nav Grah Durga Mandir) में सावन में महाकाल ज्योर्तिलिंग (Mahaakaal Jyotirlinga) का पूजन एवं अभिषेक मुख्य आचार्य पं. विनोद एवं वेद पाठी ब्राह्मणों सत्येन्द्र पांडे एवं पीयूष पांडे ने किया। मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रमोद पगारे (Pramod Pagare), श्रीमती कीर्ति पगारे एवं प्राची पगारे ने भगवान महाकाल का पूजन एवं रूद्राभिषेक किया। ब्राह्मणों ने मंदिर समिति के आग्रह पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए भगवान महाकाल का विशेष पूजन किया। सोमवार को श्मशान की ताजी चिता की राख भगवान महाकाल चढ़ाई।
उज्जैन के क्षिप्रा तट पर स्थित विश्व विख्यात महाकाल ज्योर्तिलिंग अपनी खास विशेषताओं के लिए जाना जाता है। ग्वालियर का सिंधिया राजवंश आज भी महाकाल की नगरी में रात्रि विश्राम नहीं करता है, पूरी दुनिया के केवल महाकाल एवं कुंभ के कारण ही उज्जैन की पहचान है। भूगोल की कर्क रेखा भी इसी के पास से गुजरी है।
महाकाल ज्योर्तिलिंग (Mahaakaal Jyotirlinga) को प्रतिदिन प्रात:काल की आरती में ताजे शव की चिता की भस्म चढ़ाई जाती है जिसे भस्म आरती कहते हैं। उज्जयिनी के नरेश चंद्रसेन पक्के शिव भक्त थे तथा उन्हें शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान था। महेश्वर के गण ने उन्हें एक चितामंणी भेंट दी थी जिस कारण देवता भी उनसे ईष्या रखते थे। उज्जैन के आस-पास के राजाओं ने नरेश चंद्रसेन से इसीलिए मित्रता की क्योंकि चंद्रसेन को जीतना संभव नहीं था शिवजी का आशीर्वाद चंद्रसेन के साथ था। उज्जैन के महाकाल की प्रमुख धार्मिक अवसरों पर सवारी निकाली जाती है खासकर सावन के प्रत्येक सोमवार को महाकाल की शाही सवारी निकाली जाती है। सोमवार को श्रीमती सीमा अनिल भदौरिया ने भी यजमान के रूप में भगवान का पूजन एवं रूद्राभिषेक किया।

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