मुसीबत में इंसान ही इंसान के काम आता है : आर.जे. अमित

सुनील सोन्हिया, भोपाल की विशेष बातचीत

सुनील सोन्हिया, भोपाल की विशेष बातचीत
आवाज एक उत्कृष्ट कला है। इस कला को हम स्वरों का ऐसा सम्मिश्रण कह सकते हैं जो कलाकारों की भावनाओं को मधुर बनाकर दूसरों के सामने प्रकट करता है। स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ टैगौर ने भी इसे सौन्दर्य का साकार एवं सजीव प्रदर्शन माना है। आवाज की यह कला विरले लोगों में ही होती है। आवाज कोई बाजार में बिकने वाली कोई वस्तु नहीं है, जिसे खरीदा जा सके। आवाज आत्मा में वास करती है, जो आत्मा से निकलकर कला के रास्ते उभरकर सामने आती है। कलाकार वह सागर है जो अपनी आवाज के जादू से सम्मोहित करता रहता है। ऐसा ही एक कलाकार है अमित वाधवा जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है।

92.7 बिग एफएम के आर.जे. अमित रेडियो जॉकी के साथ-साथ बेहतरीन गायक भी हैं। मूलतः ग्वालियर निवासी अमित बचपन में बहुत ही शर्मीले थे, किसी से भी बात करने में संकोच करते थे। स्कूल स्तर पर संगीत प्रतियोगिता में गीत गाने पर उनके शिक्षक-शिक्षिकाओं से अमित को संगीत के क्षेत्र में जाने की सलाह दी। दोस्तों ने आवाज के जादू को राष्ट्रव्यापी बनाने के लिए एफएम में जाने की सलाह दी। अंततः अमित ने ग्वालियर आकाशवाणी से अपनी आवाज का जादू बिखेरना प्रारंभ किया।
आरजे बनने के सफर के बारे में बताया कि आकाशवाणी के सहयोगियों ने मुझे एफएम में जाने हेतु प्रेरित किया, लेकिन जब आर.जे. का ऑडिशन था तो मैं शहर से बाहर इंदौर गया हुआ था। परिस्थितियाँ ऐसी थीं कि मैं ऑडिशन देने ग्वालियर नहीं पहुंच पाया। ऑडिशन समाप्त हो गया लेकिन अचानक एक दिन 92.7 बिग एफएम से मुझे फोन आया कि फोन पर बात करते ही तुम्हारा पहले चरण में चयन हो गया है। अब दूसरे चरण हेतू झाँसी आ जाओ। मैंने कहा कि मैं परदे के पीछे बनने वाले विज्ञापनों में अपनी आवाज देना चाहता हूँ, तो एफएम वालों ने कहा कि आर.जे. बनने के साथ ही तुम्हारी यह इच्छा भी पूरी हो जाएगी। दूसरे और तीसरे चरण में मेरा सहजता से चयन हो गया और मैं 92.7 एफएम का बिग आर.जे. बन गया।
चूँकि मूलतः आप गायक हैं तो आर.जे. बनने के बाद आपकी गायकी पर तो असर पड़ा ही होगा, इस पर अमित कहते हैं कि सुनील सर यह तो सही है कि मैं अब रियाज नहीं कर पाता हूँ, फिर भी जब कभी भी मौका मिलता है तो किसी न किसी कार्यक्रम में गा ही लेता हूँ और फिर आपने भी तो सेंट्रल बैंक के कार्यक्रम में मुझसे गाना गवा ही दिया था। पसंदीदा पुराने गायकों के बारे में बताया कि हेमंत कुमारजी के गानों से अपनी गायकी शुरू की थी बाद में किशोर दा, मो. रफी, महेन्द्र कपूर एवं मन्ना डे के गाये गीतों को अपनी आवाज दी। वहीं नए गायकों में सोनू निगम, शान, के.के., अर्जित सिंह आदि पसंदीदा गायक हैं।

-आर.जे. होने के कारण बहुत सारे सेलीब्रेटी के साक्षात्कार लेते हैं। आपको किस कलाकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया।
-आमिर खान एवं अन्ना हजारे ने मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित किया।

-पीस ऑफ माइंड टी.वी. चैनल से कैसे जुड़े ?
-अच्छा बोलने तथा गाने की कला ईश्वर से ही मिली है। पहले जागरण एवं भजन किया करता था। ब्रह्मकुमारी से ज्ञान मिला कि आत्मा के अंदर जो भी विषेशता है वह परमात्मा के द्वारा ही दी गई है। मैंने वहां से ज्ञान, योग, धारणा एवं सेवा सीखी। उनके दो कार्यक्रम किसानों के लिए ”शाश्वत यौगिक खेती“ के 185 एपिसोड अभी तक कर चुका हूँ। ” नया सोच नया विश्वास” कार्यक्रम के कुछ एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं और शेष अभी बन रहे हैं।

-विज्ञापन की दुनियाँ में रेडियो एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, इस बारे में आपके क्या विचार है ?
– यह सही है कि अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए रेडियो एक बेहतरीन माध्यम है, परन्तु रेडियो वर्तमान में सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों में भी अपनी जागरुकता दिखा रहा है, साथ ही नई-नई प्रतिभाओं को मंच भी प्रदान कर रहा है।

-किस आर.जे. ने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया ?
-पूरी तरह से किसी ने भी प्रभावित नहीं किया है, इस क्षेत्र में कभी किसी की नकल नहीं की जा सकती है, अपना स्वयं का अंदाज बयां करना होता है। फिर भी मुंबई के आर.जे. जितु राज एवं मलिष्का के कार्यक्रम प्रस्तुत करने का अंदाज अच्छा लगता है

-आपका आदर्श ?
-माता-पिता के साथ-साथ किशोर कुमार, शम्मी कपूर एवं अमिताभ बच्चन जी को अपना आदर्श मानता हूँ।

-युवाओं के लिए कुछ कहना चाहेंगे ?
-अगर अपना लक्ष्य या मंजिल निर्धारित कर लें तो कॅरियर बनाने में कोई समस्या नहीं है। विवेकानंदजी एवं एकलव्य इस बात के मील के पत्थर हैं।

– पाठकों के लिए नववर्ष पर क्या संदेश देना चाहेंगे ?
-कहते हैं मुसीबत में इंसान ही इंसान के काम आता है और इसलिए हमारे पास ऐसे कई मौके आते हैं, जब हम दूसरों के काम आ सकते हैं। देने का सुख अलग ही होता है, तो आइए इस वर्ष हम मुसीबत में फंसे लोगों की सहायता करने का संकल्प करें।

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