मेंढक संग मेंढकी का ब्याह और डंडे बजाकर इंद्र तक पहुंचा रहे आवाज़

आदिवासी अंचल में बारिश के लिए हो रहे टोटके
विवेक राठौर, सुखतवा
केसला आदिवासी विकास खंड में पानी नहीं बरसने की इथति से निपटने गांव के आदिवासी माहिलाएं आगे आयी हैं। रूठे इंद्र को मनाने माहिलाएं कई तरह के टोटके कर रही हैं ताकि ये चिलचिलाती धूप से राहत मिले और गर्मी को विदा किया जा सके। यह बीते एक माह से अल्प वर्षा की स्थिति ने न सिर्फ खेतिहरों को चिंतित किया हैं बल्कि भीषण गरर्मी और उमस ने आमजन को भी परेशान किया हैं। मंदिरों में पूजा -पाठ के बावजूद अब आदिवासी महिलाओं गुरूआ बाबा और खेड़ापति माता के माध्यम से इंद्र देव को मनाने का तरीका अपना रहे हैं। सुखतवा सहित चौकीपुरा, झालपुरा, शक्तिपुरा, मंडीपुरा, कालाआखर सहित आसपास के आदिवासी गांव में माहिलाएं सुबह से उठकर नदियों में स्नान करने जाती हैं और फिर पुरूषों में गुरूआ बाबा, खेड़ापति माता की पूजा कर मनाने की क्रिया शुरू होती है। गुरूआ बाबा यहां के आदिवासियों के आराध्य देव हैं, जिनके माध्यम से माहिलाएं इंद्र देव से पानी मांग रही है। इसके अलावा कुछ गांव से महिलाएं के निर्वस्त्र होकर खेतों में हल चलाने की भी खबरें हैं। एक अन्य टोटके के अनुसार गांव में मेंढक-और मेंढकी का विवाह रचाया जाता है और बाकायदा माहिलाएं डंडे बजाकर इंद्र देवता तक आवाज पहुंचाती हैं। गुरुवार को भी ग्राम भरगदा की महिलाओं ने चंदा एकत्र करके प्रसाद चढ़ाया और गांवभर में बांटा था। सुखतवा के आसपास के गांवों की महिलाएं राधाबाई, शकीनाबाई, कलाबाई, शकुन आदि ने बताया कि गांवों में इस तरह से पूजा-पाठ आदि करके पानी मांगने की परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है, इन तरीकों से बारिश अवश्य होती है।

TAGS
Share This
error: Content is protected !!