यूरिया भरपूर फिर भी सोसायटी को नहीं दे रहे, किसान परेशान

इटारसी। रबी फसल में डालने के लिए किसानों को यूरिया केवल तीन स्थानों पर ही मिल रहा है। मंगलवार या बुधवार से अन्य सोसायटियों को मिलेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। उपसंचालक कृषि के अनुसार यूरिया की कमी नहीं है। सोमवार को इफको का एक रैक इटारसी पहुंच जाएगा। इसके बाद सोसायटियों को भी बांटा जाएगा। अभी केसला, सुखतवा की सोसायटी के अलावा इटारसी में मार्कफेड के माध्यम से किसानों को यूरिया दो बोरी प्रति एकड़ के मान से दिया जा रहा है।
उपसंचालक कृषि जितेन्द्र सिंह के आदेश के बाद फिलहाल इटारसी, सुखतवा और केसला में ही किसानों को यूरिया मिल रहा है। वह भी केसला और सुखतवा की दूरी अधिक होने के कारण वहां की समितियों को यूरिया दिया जा रहा है, जबकि अन्य समितियों को यूरिया वितरण नहीं करने के निर्देश हैं। केवल मार्कफेड के माध्यम से ही यूरिया वितरण करना है। इसका उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि अभी यूरिया मिलने की गति धीमी है और समितियों पर नियंत्रण नहीं रह पाने से किसानों को वितरण में न्याय हो सकेगा या नहीं इसमें संदेह है।

सहकारी समितियों को यूरिया नहीं
इस क्षेत्र में केवल सुखतवा और केसला की समितियां ही किसानों को प्रति एकड़ दो बोरी के मान से यूरिया वितरण कर रही हैं। शेष तेरह सोसायटियों का डिमांड ड्राफ्ट जमा होने के बावजूद यूरिया नहीं दिया जा रहा है, जिससे इन समितियों से जुड़े किसान एक-एक बोरी यूरिया के लिए परेशान हो रहे हैं। आदिवासी ब्लाक की इन दो समितियों के अलावा इटारसी तहसील के लिए मार्कफेड की खेड़ा स्थित गोदाम से यूरिया वितरण किया जा रहा है। इन तीन स्थानों के अलावा शेष समितियों से जुड़े किसान यूरिया के लिए परेशान हैं। हालांकि उपसंचालक कृषि का दावा है कि इन समितियों को कम से कम दो बार यूरिया दिया जा चुका है, और किसानों को यूरिया मिल चुका है।

कल के बाद मिलने की उम्मीद
सहकारी समितियों के माध्यम से इस वर्ष राज्य सरकार ने किसानों को यूरिया वितरण की व्यवस्था कर खुले बाजार में बेचने पर स्पष्ट प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन, समितियों को भी पर्याप्त यूरिया नहीं दिया जा रहा है। कृषि विभाग का मानना है कि अभी यूरिया मिलने की गति धीमी है। ऐसे में यदि समितियों को हर खेप में यूरिया मिलेगा तो वहां नियंत्रण नहीं होने पर समान वितरण नहीं होगा और किसी को अधिक, किसी काम कम और किसी को मिल ही नहीं सकेगा। मंगलवार या बुधवार को इफको कंपनी की रैक और लगने की संभावना है और इसमें करीब 3200 मीट्रिक टन यूरिया मिलेगा। इसके बाद सहकारी समितियों को भी पर्याप्त मात्रा में यूरिया दिया जा सकेगा।

दूरी होने से पड़ रहा है महंगा
किसानों को इटारसी, सुखतवा और केसला में यूरिया तो मिल रहा है। लेकिन, दूरी होने से यह महंगा पड़ रहा है। दरअसल, रामपुर सर्किल की बात करें तो मरोड़ा, पाहनवर्री, रामपुर, सोनतलाई, गुर्रा सहित आसपास के गांवों के किसानों को इटारसी आने और वापस जाने के लिए यदि मोटर सायकिल से आए तो दो सौ रुपए का खर्च है और गोदाम से किसानों को 266 रुपए 50 पैसे प्रति बोरी के मान से यूरिया दी जा रही है। दो बोरी के किसान को 533 यूरिया के और दो सौ रुपए परिवहन खर्च मिलाकर 733 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा इटारसी आने-जाने का जो समय खर्च हो रहा है, वह अलग। ऐसे में किसान के पास परेशान होने के अलावा दूसरा चारा नहीं।

इनका कहना है…!
अभी समितियों को यूरिया देने पर इसलिए रोक लगायी है, क्योंकि समितियों पर हमारा नियंत्रण नहीं रहेगा। कल-परसों में इफको की एक रैक लगने वाली है, जब पर्याप्त मात्रा में यूरिया आ जाएगा तो हम समितियों को भी दे देंगे। वैसे समितियों को इससे पहले दो-तीन बार यूरिया दिया जा चुका है, ऐसी कोई कमी नहीं है यूरिया की।
जितेन्द्र सिंह, उपसंचालक कृषि

हमें अभी डीडीए की तरफ से समितियों को यूरिया नहीं देने को कहा गया है। कारण क्या है, हमें पता नहीं। केवल यह बताया है कि अभी यूरिया कम है, रैक आने के बाद समितियों को यूरिया दिया जाएगा। हम आदेश का पालन कर रहे हैं।
देवेन्द्र विश्वकर्मा, गोदाम प्रभारी मार्कफेड खेड़ा

आरओ बन गये हैं, हमें उम्मीद है कि मंगलवार तक हमें यूरिया मिल जाएगा। यूरिया मिलने के बाद हम किसानों को वितरित कर पाएंगे। किसने मना किया, हमें नहीं मालूम, कल ही पता चलेगा कि मिलेगा या नहीं। अभी तो कल की उम्मीद है।
भूपेन्द्र दुबे, प्रबंधक सेवा सहकारी समिति जमानी

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