राष्ट्रहित सर्वोपरि है, श्री कृष्ण का यही संदेश : शास्त्री

राष्ट्रहित सर्वोपरि है, श्री कृष्ण का यही संदेश : शास्त्री

इटारसी। नालंदा एजुकेशन सोयायटी और चौकसे परिवार के द्वारा श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ सप्ताह का शुभारंभ रविवार को कलचुरी भवन में हुआ। धार्मिक इतिहास में यह पहली बार हुआ, जब व्यास पीठ पर विराजित होने से पूर्व कथा वाचक का पदप्रक्षालन किया हो। सुबह 11:30 बजे श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर से कलश यात्रा प्रारंभ हुई जो गरीबी लाइन स्थित कलचुरी भवन पहुंची।
कथा स्थल पर कथावाचक पं. मधुसूदन शास्त्री का व्यास गादी पर बैठाने से पूर्व सोसायटी एवं परिवार के सदस्यों ने पद प्रक्षालन किया। यहां पांच कन्याओं का पूजन एवं संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों द्वारा स्वस्ति वाचन किया। प्रथम दिन आचार्य शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि यह महापुराण व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित के राज्य में कलि प्रवेश करना चाहता था और राजा के स्वर्ण मुकुट शीष पर धारण करने के बाद कलि ने अपना जाल फैलाना चाहा, तब राजा परीक्षित के अनुरोध पर कलि केवल पांच स्थानों तक सिमट कर रह गया। आचार्य शास्त्री ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने वासुदेव और देवकी के घर जन्म लिया। अपने मामा कंस का उद्धार किया। राज्य के राक्षसों का वध किया। इसलिए श्री कृष्ण योगेश्वर भी कहलाए। धर्म की स्थापना में भगवान श्री कृष्ण सदैव पूजे जाते रहेंगे। श्री कृष्ण भारत भूमि के उद्धार एवं धर्म की रक्षा के लिए पृथ्वी पर आए। उनके अनुसार राष्ट्रहित सर्वोपरि है।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि इस कलयुग में आम जनता की चुनी हुई केन्द्र सरकार राष्ट्रहित के लिए नागरिकता संसोधन बिल लेकर आई है। समाज को उसका स्वागत करना चाहिए। इस अवसर पर राधाबाई चौकसे, अभिनय-वैशाली चौकसे, अनुराग-दीपिका चौकसे, दिनेश-भारती चौकसे, अजय-अंचल चौकसे, मनीष-सरिता चौकसे एवं उमेश चौकसे ने सपत्नीक पूजन अर्चन किया।

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