लक्ष्मण का परम सौभाग्य था, श्री राम का वनगमन

लक्ष्मण का परम सौभाग्य था, श्री राम का वनगमन

श्री द्वारिकाधीश मंदिर में श्रीराम कथा का आयोजन
इटारसी। श्री द्वारिकाधीश मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा समारोह के छठवे दिन रामकथा को विस्तार देते हुए आचार्य प्रवर महेन्द्र मिश्र ने कहा कि श्री राम की वन यात्रा सनातन संस्कृति का संदेश देते हुये लक्ष्मण के सौभाग्य का प्रतीक है। श्री मिश्र ने कहा कि जिस समय श्री राम वन गमन करते हैं लक्ष्मण भी भगवान के साथ वन जाने के लिये आतुर होते हैं, तो श्री लक्ष्मण का समर्पण देखकर प्रभु श्री राम ने उन्हें माता सुमित्रा से आदेश लेने को भेजते हैं।
महाराज श्री ने कहा कि अयोध्या की राजमाता सुमित्रा उपासना का स्वरूप है। कौशल्या ज्ञान और कैकई कर्म की प्रतीक है। ज्ञान और कर्म से श्रेष्ठ उपासना है क्योंकि उपासना से ही भक्ति की प्राप्ति संभव है जो कि मां सुमित्रा ने वैराग्य रूपी लक्ष्मण को जन्म देकर प्राप्त की थी। जिस समय श्री लक्ष्मण मा से मिलने जाते है तब मां सुमित्रा ने लक्ष्मण को जो शिक्षा ज्ञान दिया, वह हर मां के बस की बात नहीं है। मां सुमित्रा ने कहा सब प्रकार से स्नेह करने वाले भगवान राम जगत के माता पिता हैं और राम का वन जाना तुम्हारा सबसे बड़ा सौभाग्य है क्योंकि जब श्री राम वन को जायेंगे तभी पृथ्वी पर धर्म स्थापित होगा। कथा के शुभारंभ में समिति के अध्यक्ष सतीश सावरिया, संरक्षक प्रमोद पगारे, संदीप मालवीय, संजय खंडेलवाल, विनायक दुबे जोगिंदर सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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