लाठियों के सहारे वनकर्मी आए बंदर पकडऩे

लाठियों के सहारे वनकर्मी आए बंदर पकडऩे

इटारसी। वन विभाग के कर्मचारी रेलवे स्टेशन से मादा बंदर पकड़कर ले गए जंगल में छोडऩे। वे केवल लाठी के सहारे बंदर पकडऩे आए थे जबकि जाल लेकर आना था। दरअसल रेलवे स्टेशन पर वनकर्मियों ने एक दिन पूर्व ही रिटायरिंग रूम के सामने बंदर को पकडऩे के लिए पिंजरा लगाया था। रेलवे स्टेशन पर बंदर के उत्पात के बाद रेलवे प्रबंधन ने वन विभाग से यहां पिंजरा लगाने की मांग की थी। पिंजरे में एक मादा बंदर फंसा था जबकि बड़ा बंदर अब भी आज़ाद है और उसकी मादा को पकड़कर ले जाने पर उसके पहले से अधिक खूंखार होने की आशंका है। हालांकि रेंजर लखनलाल यादव इस आशंका से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह अब जगह छोड़कर चला जाएगा। यदि नहीं गया तो हम चार दिन बाद पुन: पिंजरा लगाएंगे। क्योंकि तत्काल पिंजरा लगाने से वह नहीं फंसेगा।
ऐसे चला बंदर पकड़ो आपरेशन
बीते कई दिन से रेलवे स्टेशन पर उत्पात मचा रहे बंदर को पकडऩे स्टेशन प्रबंधक ने वन विभाग को एक पत्र लिखा था। वन विभाग ने रविवार को रिटायरिंग रूम के सामने एक पिंजरा लगाया। इसके भीतर एक केला रखा गया जो बंदर को काफी पसंद होता है। केले के लालच में मादा बंदर इसमें फंस गया जो रेलकर्मियों ने सुबह देखा। सुबह करीब 8 बजे डिप्टी स्टेशन मास्टर अनिल राय ने वन विभाग को फोन लगाकर पिंजरे में बंदर फंसने की सूचना दी। मौके पर पहुंचे वनकर्मियों की हिम्मत नहीं हुई कि वह पिंजरे को वहां से हटा ले, क्योंकि मादा के फंसने से नर उस पिंजरे पर ही बैठा था और लोगों को देखकर काफी गुस्से में था। श्री राय के मुताबिक उन्होंने सुबह 8 बजे वन विभाग को सूचना दे दी थी, लेकिन विभाग के कर्मचारी सुबह 11 बजे पहुंचे वह भी केवल लाठी लेकर. यदि वन विभाग के कर्मी जाल लाते तो बड़ा बंदर भी पकड़ में जा सकता था।
जब वनकर्मियों ने हार दी हिम्मत
वन कर्मियों ने बंदर का खूंखार रूप देखकर हिम्मत हार दी। वे पिंजरे के नज़दीक जाने से डर रहे थे। केवल लाठियों के दम पर बंदर पकडऩे पहुंचे थे लेकिन वे पिंजरे तक जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे थे। इस दौरान वनकर्मियों ने रेंजर लखनलाल यादव को सूचना दी कि बंदर काफी खूंखार हो गया है और वे उस तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। रेंजर का कहना है कि हमारे कर्मचारी भी डर गए थे। वे होशंगाबाद विभागीय बैठक में गए थे। आखिर उनको वहां से लौटना पड़ा और लाठियां पीट-पीटकर सबने मिलकर नर बंदर को पिंजरे से दूर किया। बंदर पिंजरे से तो हट गया लेकिर वह प्लेटफार्म के शेड पर से गुर्रा रहा था। वनकर्मी उसे दूर भगाने के लिए लाठियां पीटते और पत्थर मारकर भगाने का प्रयास करते रहे। आखिर एक ईंट का टुकड़ा लगने के बाद बंदर भागा तो वनकर्मियों ने पिंजरा उठाया जिसमें मादा बंदर थी। उसे बागदेव के जंगल में छोड़ा गया।

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