शीलवान की संगत से जीवन प्रगतिशील बनता : आचार्य बृज मोहन

शीलवान की संगत से जीवन प्रगतिशील बनता : आचार्य बृज मोहन

इटारसी। संसार के सभी जन अपने जीवन को प्रगतिशील बनाने का प्रत्यन करते हंै। लेकिन ये तभी संभव है, जब हमारी संगत शीलवान और चरित्रवान व्यक्तियों या संतजनों के साथ बनी हो। उक्त उद्गार आचार्य बृजमोहन ने नाला मोहल्ला इटारसी में चल रहे श्री नर्मदा महापुराण ज्ञानयज्ञ समारोह में व्यक्त किये।
रघुवर रामायण मंडल एवं गौर परिवार द्वारा आयोजित श्री नर्मदा महापुराण ज्ञान यज्ञ समारोह के चतुर्थ दिवस में उपस्थित श्रोताओं को बताया कि हम सब श्रेष्ठ जीवन जीने की इच्छा रखते हैं, और निरंतर प्रगति भी करना चाहते हैं। लेकिन यह तभी संभव होता है जब हम चरित्रवान हों और अपने व्यवहार को भी चरित्रवान बनाये रखें। उसके लिये आवश्यक है कि हम ऐसे श्रेष्ठ व्यक्तियों की संगत में रहें जो नि:स्वार्थ भाव से धर्म और अध्यात्म से जुड़ा हो। महाराजश्री ने कहा कि जो व्यक्ति अच्छे लोगों के संपर्क में रहता है, उसका जीवन भी अच्छा और प्रगतिशील बनता है। जैसे कि पतित पावनी मां नर्मदा ऐसी प्रगतिशील नदी है जिसके संपर्क में आने से अन्य नदियां भी शीलवान हो जाती हैं । जिसका उदाहरण है पुण्यदायनी महानदी एवं कपिला नदी। इस ज्ञानपूर्ण प्रसंग के साथ ही आचार्य श्री बृज मोहन एवं भक्ति मर्मज्ञय संगीतकार पुरूषोत्तम महाराज ने मां नर्मदा के मधुर भजनों की प्रस्तुति मध्ुर संगीत के साथ की। कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान रघुवार गौर, ओपी नागा, मनोज रैकवार, गोबर्धन गौर आदि ने महाराज श्री का स्वागत किया। कथा समारोह में शहर एवं गांव के श्रोता बड़ी संख्या में शामिल होकर कथा अमृत का रसपान कर रहे हैं।

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