इटारसी। ग्राम बिछुआ में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महापुराण समारोह बुधवार को महाआरती और भंडारे के साथ संपन्न हो गया। इस अवसर पर कथा वाचक पंडित सौरभ दुबे ने कहा कि परम ज्ञानी सुदामा जी ने गुरुमाता के दिए गए चने का अकेले ही भोग कर अपने मित्र श्रीकृष्ण को एक बड़े पाप की भागीदारी से बचाया था।
हम जब भी मंदिर में या अपने घर में भगवान को भोग लगाते हैं तो अपने द्वारा क्रय की गयी सामग्री का ही लगाते हैं। किसी से दान में या भिक्षा में मिली सामग्री प्रभु को अपैण नहीं करते और ना ही परमात्मा भिक्षा में मिली सामग्री को स्वीकार करता है। यह दिव्य ज्ञान परम विद्वान सुदामा जी में था। इसलिए वन में लकड़ी बीनते समय गुरुमाता के दिए चने को उन्होंने अकेले ही खा लिया। क्योंकि वे जानते थे कि उनके साथ लकड़ी बीनने आए श्री कृष्ण उनके मित्र ही नहीं जग के पालनहार भी थे। गुरुमाता के दिए चने भिक्षा में मिली सामग्री है, अत: इसे ब्राह्मण तो स्वीकार कर सकता है, लेकिन ठाकुर श्री हरि नहीं। इसलिए यह चने श्रीकृष्ण को अर्पण करुंगा तो मैं पाप का भागीदारी बनूंगा ही ठाकुर श्री कृष्ण को भी पाप लगेगा। यह बात पंडित सौरभ दुबे ने अपने गृहग्राम बिछुआ में व्यक्त करते हुए कहा कि सुदामा जी को कपटी कहना अनुचित है।
समापन दिवस पर शाहपुर से आयी दो बाल प्रतिभाओं ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। श्रीमद भागवत कथा समारोह के समापन अवसर पर समस्त ग्रामीणों की ओर से ग्राम पंचायत बिछुआ ने अपने गांव के युवा आचार्य सौरभ दुबे का सम्मान किया। इस अवसर पर जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष प्रदीप दुबे, किसान संघ अध्यक्ष श्रीराम दुबे, वरिष्ठ किसान नेता गिरीश द्विवेदी विकास उपाध्याय एवं मुख्य यजमान विनोद दुबे ने भी महाराजश्री का स्वागत किया। संचालन उपसरपंच शशांक दुबे ने किया।
श्रीमद् भागवत कथा का समापन, भंडारा हुआ
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