संजय को दिव्यदृष्टि विश्वकर्मा ने ही दी थी : शास्त्री

संजय को दिव्यदृष्टि विश्वकर्मा ने ही दी थी : शास्त्री

इटारसी। श्री विश्वकर्मा लोहकार सेवा समिति द्वारा विश्वकर्मा जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित विश्वकर्मा पुराण में अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता गुजरात के जयंतीभाई शास्त्री ने कहा कि विश्वकर्मा ब्राह्मण कहलाते हैं। विश्व में जो भी निर्माण कार्य हुए वह विश्वकर्मा और विष्णु की ही देन है। विश्वकर्मा भगवान विष्णु के ही रूप हैं।
हनुमान धाम मंदिर धर्मशाला में आज विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर सुबह 7 बजे से भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति की स्थापना की गई। 9 से 11 बजे तक पूजन, हवन और आरती के बाद दोपहर 12 बजे से विश्वकर्मा पुराण के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता जयंती भाई शास्त्री ने विश्वकर्मा पुराण का वाचन किया। विश्वकर्मा जयंती के कार्यक्रम में बतौर पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व विधायक अंबिका प्रसाद शुक्ला, नपाध्यक्ष सुधा राजेन्द्र अग्रवाल, उपाध्यक्ष अरुण चौधरी, पूर्व मंडी अध्यक्ष रमेश बामने पहुंचे। समिति की ओर से अतिथियों का स्वागत हुआ तथा स्मृति चिह्न भेंट किए।
अतिथियों ने श्री शास्त्री का माल्यार्पण से स्वागत किया। शाम को 6 बजे से मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया जिसमें हजारों ने प्रसाद ग्रहण किया। रात में यहां देर रात तक कीर्तन चले। इस अवसर पर समाज के सुरेश विश्वकर्मा, संतोष विश्वकर्मा, शंकरलाल विश्वकर्मा, भैयालाल विश्वकर्मा, मदन विश्वकर्मा, बबलू विश्वकर्मा, पवन विश्वकर्मा, नंदकिशोर विश्वकर्मा, कमल किशोर विश्वकर्मा, कुंदन विश्वकर्मा सहित समाज के अनेक लोगों ने योगदान दिया। पुराण वाचन में श्री शास्त्री ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा 64 कलाओं के देवता हैं। संजय को दिव्यदृष्टि उन्होंने ही दी थी। देवताओं के शस्त्र आदि भी उन्होंने ही निर्माण किए हैं। ब्रह्मांड में केवल शिव और विश्वकर्मा ही हैं जिनके तीन नेत्र हैं। 18 सितंबर को सुबह 7 बजे मूर्ति विसर्जन किया जाएगा।

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