संयुक्त संगठन के बैनर तले हड़ताल की तैयारी

25 अक्टूबर को फोरम सरकार को देगा हड़ताल का नोटिस
इटारसी। बिजली अधिकारी एवं कर्मचारियों के संयुक्त संगठन मध्यप्रदेश यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एंप्लॉय एंड इंजीनियर्स ने महा आंदोलन की तैयारी कर ली है। 20 अक्टूबर को संगठन की बैठक में निर्णय लिया है कि 25 अक्टूबर को फोरम द्वारा हड़ताल का नोटिस दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश विद्युत विभाग के संयुक्त संगठन के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि मध्यप्रदेश यूनाइटेड फोरम की भोपाल में हुई बैठक में पूर्व में मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के साथ हुई बैठक के पश्चात मांगों के पूर्ण होने की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री कमलनाथ से 25 जून की बैठक में विद्युत कर्मियों की विभिन्न मांगों एवं विद्युत संविदा कर्मियों के नियमितीकरण साथ ही आउट सोर्स कर्मियों के विद्युत विभाग में संविलियन करते हुए 60 वर्ष की सेवा सुरक्षित करने की मांगों के संबंध में चर्चा हुई थी,जिसके पश्चात मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया था कि शीघ्र ही विद्युत कर्मियों की विभिन्न मांगों को पूरा किया जाएगा एवं पूर्ण भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत भर्ती विद्युत संविदा कर्मियों को नियमित करने में कोई समस्या उत्पन्न न होना कहा था, साथ ही आउटसोर्स कर्मियों की मांग के संबंध में भी उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।
श्री श्रीवास्तव ने कहा कि विद्युत विभाग निरंतर अधिकारी कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। फोरम निरंतर यह मांग करता आया है कि शीघ्र ही संविदा कर्मियों को नियमित कर एवं आउटसोर्स कर्मियों को विभाग में संविलियन कर कर्मचारियों की कमी को दूर किया जाए किंतु शासन नियमित समाधान ढूंढने की बजाए अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ता हुआ प्रतीत हो रहा है। इस हेतु सरकार विद्युत विभाग को निजी कंपनियों को फ्रेंचाइजी में देने की पूरी कोशिश कर रही है। इस कारण विद्युत कर्मियों की सेवाओं के साथ-साथ आम उपभोक्ता भी प्रभावित होंगे जिसका फोरम विरोध करता है।
उनका कहना है कि मध्य प्रदेश विद्युत विभाग के विद्युत कर्मी दुर्गम परिस्थितियों में अपनी जान खतरे में डालकर भी जोखिम भरे कार्यों को कुशलता से संपादित करते हैं। ऐसे में इतने महत्वपूर्ण विभाग के विद्युत कर्मियों की मांगों की अनदेखी करना सरकार के लिए चिंता का विषय बन सकती है। फोरम द्वारा सभी संगठनों को एक साथ लाते हुए फ्रेंचाइजी के विरोध में, विद्युत कर्मियों की लंबित मांगों एवं कंपनी कैडर कि मांगों को पूरा कराने हेतु आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है। मांगें पूरा ना होते देख आक्रोशित विद्युत कर्मी शीघ्र ही आंदोलन के लिए मजबूर हैं।

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