इटारसी। संत भक्त पं. भगवती प्रसाद तिवारी ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता कभी स्थायी नहीं रहती, लेकिन सत्य हमेशा स्थायी रहता है। उन्होंने कहा कि ज्ञानी को कभी नुकसान नहीं होता, लेकिन अज्ञानी हमेशा नुकसान में रहता है। समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह ठाकुर बबली, वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत अग्रवाल, भाजपा जिला उपाध्यक्ष संदेश पुरोहित, पत्रकार मुकेश गांधी, संजय अग्रवाल शिल्पी सहित भागवत कथा में सहयोग करने वाले राहुल गौर, सुमित दुबे, राहुल चौहान ने पं. तिवारी का पुष्पहारों से स्वागत किया।
पंचम दिवस अन्नकूट महोत्सव मनाया गया। गिरिराज पर्वत को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा एक उंगली पर उठाने वाले चित्र को कथा स्थल पर बनाया गया। गिरिराज की पूजन की गई एवं छप्पन प्रकार का भोग उन्हें लगाया गया। श्री तिवारी ने कहा कि जीवन का महल समय की घंटे-मिनटों की ईटों से चुना गया है। यदि हमें जीवन से प्रेम है तो यही उचित है कि समय को व्यर्थ नष्ट ना करें। जिस प्रकार धन के बदले में विशेष वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं, उसी प्रकार समय के बदले में भी विद्या, वुद्धि, लक्ष्मी कीर्ति आरोग्य, सुख-शांति, मुक्ति आदि जो भी वस्तु रूचिकर हो प्राप्त की जा सकती है। ईश्वर ने समय रूपी प्रचुर धन देकर मनुष्य को पृथ्वी पर भेजा है और निर्देश दिया है कि इसके बदले में संसार की जो वस्तु अच्छी लगें, खरीद लें। समय सम्पत्ति से भी बढ़कर है, जीवन भर की कमाई देकर भी 1 मिनट का समय भी नही खरीद सकते।
श्री तिवारी ने कहा कि यदि गाय के महत्व को जानकर, गो पालन नहीं कर रहे तो दोष अवश्य लगेगा, सार्मथवान होकर गाय के लिए जो कर सकते है, अगर नहीं करा तो दोष लगेगा, इसलिए अपने सामर्थता के अनुसार गायें पालन अवश्य करें व जितना सहयोग गौ शालाओं में कर सकते है, जरूर करें, गाय सारे सुखों को प्रदान करने वाली है, गौमाता की सेवा व रक्षा करने से, वही गाय हमारी उन्नति में सहायक बनती है। गाय की सेवा नहीं हुई तो वह अन्य रूप भी दिखा सकती है। उन्होंने कहा कि गाय की रक्षा में, भारतीय संस्कृति की रक्षा में, नारी के सम्मान में, समाज की शिक्षा में, समाज की जागरूकता में, समाज के संगठन में और समाज की उन्नति में ही हमारी भलाई है। यदि समझ में आ जाए तो एक पल का सत्संग भी काम का है, हम ऐसा आचरण करना चाहिए। एक अच्छा शब्द सुना भी काम का है एक अच्छी बात पढऩा भी अच्छा है और यदि समझ में ना आए, आलस्य में समझना ना चाहे, तो कितनी भी अच्छी बातें सुनले, पढ लें उसका कुछ भी फायदा नहीं होगा। आत्मसात करना, सुनकर उसके अनुसार आचरण कर हम मानव जीवन को सफल बना सकते है। खातेगांव से आए पं. ललित तिवारी ने भागवत का पूजन कराया। संचालन गाडरवारा से आए पं. ब्रजेन्द्र तिवारी ने किया।
सत्ता स्थायी नहीं होती, सत्य सदैव स्थायी रहता है
For Feedback - info[@]narmadanchal.com








