सत्रह लाख से बनेगा अस्पताल में पोस्टमार्टम रूम

स्वास्थ्य विभाग से आयी मंजूरी, जल्द ही जगह का होगा चयन

स्वास्थ्य विभाग से आयी मंजूरी, जल्द ही जगह का होगा चयन
इटारसी। डॉ.श्यामाप्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल में सत्रह लाख रुपए की लागत से पोस्टमार्टम रूम बनने का रास्ता साफ हो गया है। स्वास्थ्य विभाग से इसके लिए 16 लाख 71 हजार की राशि की मंजूरी दे दी है। यहां शव रखने के लिए शीतकक्ष होगा जिससे शव को खराब होने से बचाया जा सकेगा। देश का मुख्य रेल जंक्शन होने के कारण यहां बड़े दिनों से एक अच्छे पोस्टमार्टम कक्ष की मांग की जा रही थी। 22 दिसंबर 15 को जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्र यहां आए थे, जब भी उन्हें एक मांग पत्र देकर इसकी मांग की गई थी। उसी के अनुरूप यह स्वी$कृति हुई है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीतासरन शर्मा ने भी अस्पताल में बढ़ाई जा रही सुविधाओं के बीच एक अच्छे और सुविधायुक्त पोस्टमार्टम रूम की जरूरत महसूस की और स्वास्थ्य विभाग से इसे मंजूर कराने पत्राचार भी किया गया था। अब राशि स्वीकृत होने के बाद जल्द ही अस्पताल परिसर में जगह देखकर इसका निर्माण कराया जाएगा।
रोकस की बैठक में उठा था मामला
शहर के अस्पताल में एक अच्छे और सुविधायुक्त पोस्टमार्टम रूम की जरूरत को महसूस करते हुए पिछले दिनों हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में भी मामला उठता रहा है। पहले जो पोस्टमार्टम रूम था, वह बहुत ही बुरी स्थिति में था. न तो उसमें ठीक से दरवाजे थे और ना ही शव की सुरक्षा के कोई इंतज़ाम. इसके बाद यहां प्रायवेट वार्ड बनाए तथा अस्पताल का एक आफिस शिफ्ट किया तो उस रूम को तोड़ दिया तथा पुराने टीबी वार्ड में इसे शिफ्ट कर दिया गया। वर्तमान में वहीं पोस्टमार्टम हो रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह जगह भी मु$फीद नहीं है. यहां भी शव को चूहों के कुतरने की घटनाएं हो चुकी हैं। लगातार विधानसभा अध्यक्ष की ओर से स्वास्थ्य विभाग को इसकी आवश्यकता बताने के बाद अंतत: अब इसके लिए 16 लाख 81 हजार रुपए की मंजूरी मिल गई है। जल्द ही अस्पताल परिसर में रोगी कल्याण समिति स्थान का चयन कर निर्माण शुरु करेगी।
जानें क्यों जरूरी है नया पीएम रूम
इटारसी में बड़ा रेल जंक्शन होने के कारण यहां ट्रेनों से दुर्घटनाग्रस्त होकर आए, या रेल यात्रा के दौरान मरने वालों की संख्या अधिक होती है। ऐसे सभी शवों के अलावा ज्यादातर लावारिश लाशों का पोस्टमार्टम भी इटारसी के सिविल अस्पताल में ही कराए जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक यहां औसतन हर दूसरे दिन एक शव को उतारा जाता है। जिनके साथ उनके रिश्तेदार होते हैं तो ठीक, यदि लावारिश लाश रही तो सबसे अधिक परेशानी होती है। जीआरपी के पास शव को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए कोई वाहन नहीं है। एक हाथ ठेले पर रखकर शव को अस्पताल तक एक प्रायवेट आदमी के माध्यम से भिजवाया जाता है। ऐसे में सार्वजनिक रास्ते से होकर शव को अस्पताल तक ले जाने वाला हाथ ठेला भी जर्जर हालत में होता है। कई बार तो शव कई घंटे गर्मी में भी जीआरपी थाने के सामने ठेले पर रखा रहता है और उससे बदबू आने लगी है। ऐसे में रेल यात्रियों को परेशानी होती है।
पांच थानों के पोस्टमार्टम होते हैं यहां
इटारसी अस्पताल में न सिर्फ इटारसी, बल्कि इटारसी पुलिस अनुविभाग के पांच थानों के पोस्टमार्टम के मामले आते हैं। इसके अलावा जीआरपी छटवा थाना होता है। सिविल अस्पताल में इटारसी थाने से जुड़े पोस्टमार्टम के मामलों के अलावा केसला ब्लाक के तवानगर, केसला, पथरोटा और रामपुर थानों के मामले आते हैं। कई बार तो डोलरिया थाने के मामले भी यहीं भेज दिए जाते हैं। इसके अलावा इटारसी जीआरपी से जुड़े मामले भी इटारसी अस्पताल में ही भेजे जाते हैं। ऐसे में यहां काफी दबाव रहता है। एक दिन में कई बार एक से अधिक पोस्टमार्टम होते हैं तो शवों को कई घंटे रखना होता है। ऐसे में गर्मी के दिनों में शव से बदबू आने लगती है। अत. इस बार जो पोस्टमार्टम रूम बनेगा उसमें एक शीतकक्ष भी होगा जिससे शव को कई घंटों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसी तरह के पोस्टमार्टम रूम की मांग वर्षों से शहर के लोग करते आ रहे हैं, जो अब पूरी हो सकेगी।
इनका कहना है…
मरचुरी भवन क्षतिग्रस्त होने और अस्पताल के बीच में होने के कारण मरीजों और नागरिकों को परेशानी हो रही थी। नए मरचुरी भवन और शीतगृह के निर्माण के लिए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के इटारसी आगमन पर उनसे मांग की थी।वह मांग पूरी होकर राशि भी स्वीकृत हो गई है, जल्द ही स्थान का चयन कर काम शुरु कराया जाएगा।
डॉ.सीतासरन शर्मा, अध्यक्ष मप्र विधानसभा

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