होशंगाबाद। नगर के युवा अरुण बंसल का बचपन अभावो में बीता वे हमेशा सोचते थे कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे उन्हें गरीबी से मुक्ति मिले और वे चार पैसे भी कमा सकें और परिवार का सहारा भी बन सकें। हालाकि अरुण बंसल का पूरा परिवार व्यवसाय में लगा हुआ था किन्तु निश्चित आय का कोई ठिकाना नहीं था। वे स्वयं 10-12 वर्ष की आयु से एक अन्य दुकानदार के यहां कार्य करते थे। गरीबी के कारण वे मात्र 10 वीं तक की ही शिक्षा ग्रहण कर पाए। लेकिन उनके मन में कुछ कर गुजरने का जबरदस्त हौसला था। एक दिन उन्हें अपने एक मित्र के माध्यम से जिला अंत्यव्यवसायी विभाग की मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के बारे में पता चला इससे उन्हें एक उम्मीद की किरण नजर आई और वे जिला अंत्यव्यवसायी विभाग में स्वरोजगार हेतु आवेदन दे आए। वह क्षण उनकी जिंदगी का अदभुत क्षण था। जब उन्हें पता चला की बैंक द्वारा उन्हें 3 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत हो गया है। इसमें 90 हजार की सब्सिडी शामिल थी। उन्होंने प्राप्त ऋण का समूचित उपयोग किया और गणेशगंज इतवारा बाजार होशंगाबाद में अनु गिफ्ट सेंटर और जनरल स्टोर नाम की खिलौनों की दुकान खोल ली। 3 वर्ष पूर्व खौले गये इस दुकान से सभी खर्च को चुकाकर अरुण बंसल को प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपए की आमदनी हो जाती है। वे हर माह 4 हजार रुपए की बैंक की किश्त नियमित रूप से चुका रहे हैं।
अरुण बंसल ने खिलौनों का थोक का व्यापार शुरू कर दिया है। वे भोपाल, इंदौर एवं दिल्ली से थोक में आर्डर बुलाते हैं। उनकी दुकान में बच्चों के सभी प्रकार के खिलौने, टेडिवियर, गुडिया, कार, मोटर सहित अन्य मनोरंजन के खिलौने हैं। अरूण बंसल बताते है कि वे रामजी बाबा मेले में भी अन्य दुकानदारों को खिलौने सेल करते हैं। उनका कहना है कि उनके इस व्यवसाय से परिवार काफी खुश है।
सफलता की कहानी: बने खिलौनों के थोक व्यापारी
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