सागर मांझी हत्याकांड : महज हाथ टकराना बना कारण 

सागर मांझी हत्याकांड : महज हाथ टकराना बना कारण 

इटारसी। सोमवार को तालाब के पास हुई सागर मांझी की हत्या के दोनों आरोपी अवैध वेंडर हैं और पीपल मोहल्ला में रहते हैं। इन दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों की गिरफ्तारी में भोपाल पुलिस की सक्रिय भूमिका रही है। पहला आरोपी भोपाल पुलिस ने पकड़ा और उसकी निशानदेही पर दूसरे आरोपी को इटारसी पुलिस ने पकड़ा। आज शाम एसपी अरविंद सक्सेना ने इस हत्याकांड का खुलासा किया। ट्रेन में अवैध वेंडरिंग करने वाले मुकेश पिता श्रीराम राजपूत 26 वर्ष और रोशन पिता राजेन्द्र केवट 20 वर्ष पीपल मोहल्ला क्षेत्र के रहने वाले हैं। रोशन पर पहले से ही मारपीट के चार और मुकेश पर भी मारपीट के छह प्रकरण विभिन्न थानों में पंजीबद्ध हैं।
उल्लेखनीय है कि सोमवार शाम गुरुनानक काम्पलेक्स के पास पुरानी इटारसी निवासी सागर मांझी की चाकू से गोद कर हत्या कर दी गई थी और यह वारदात पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि सीसीटीवी कैमरे में हत्या की वारदात कैद होने के बावजूद आरोपियों के चेहरे स्पष्ट नहीं होने से पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच पा रही थी। हालांकि सीसीटीवी कैमरों से उनके हुलिए के आधार पर काफी मदद मिली है। वारदात के बाद एसपी ने मौके का मुआयना करके सीसीटीवी फुटेज देखे और फिर आरोपियों का पता बताने वाले को दस हज़ार का इनाम घोषित किया था।

इस तरह चला तलाशी अभियान
आरोपी रोशन केवट को निशातपुरा पुलिस के प्रधान आरक्षक सत्येन्द्र चौबे ने सबसे पहले निशातपुरा यार्ड में घूमते देखा था। श्री चौबे ने होशंगाबाद पुलिस से संपर्क करके बताया कि इटारसी में हुई हत्या के आरोपी के हुलिए जैसे युवक को यहां देखा है। यहां से उच्च अधिकारियों के निर्देश पर उसे वहां पकड़कर पूछताछ की तो उसने अपराध कबूल कर लिया और दूसरे आरोपी मुकेश राजपूत की पहचान बताकर उसे पीपल मोहल्ला में होना बताया। इटारसी पुलिस ने भी तत्परता से घेराबंदी करके मुकेश को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।

महज हाथ टकराने से हुई वारदात
महज हाथ टकराने से हुआ विवाद हत्या जैसी बड़ी वारदात का कारण बन गया। आरोपियों के हाथ से सागर पिता दिलीप मांझी और चिराग पिता देवेन्द्र केवट की स्कूटी टकरा गई थी। घटना पर दोनों आरोपियों ने सागर और चिराग को कुछ कहा तो इन लोगों ने भी कुछ कह दिया। यहीं से विवाद बढ़ा और फिर आरोपियों ने कुछ आगे आकर दोनों से मारपीट शुरु कर दी। इस बीच मुकेश ने जेब से चाकू निकालकर सागर पर वार कर दिए। उसने ताबड़तोड़ चाकू चलाए जो सागर के सीने में गहरे लगा जिससे उसकी मौत हो गई, चिराग के हाथ में चाकू लगा।
घटना के बाद पुलिस ने कल्पना ड्रेसेस में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज तलाशे। ये फुटेज ट्रेनों में लोगों को दिखाए, रेलवे स्टेशन पर दिखाए और आसपास के सभी थानों में भी इनको भेजा गया। बावजूद इसके कुछ स्पष्ट नाम सामने नहीं आ रहे थे। स्थानीय स्तर पर पुलिस को मदद नहीं मिली थी। एक टीम स्टेशन पर भी लगी थी। लेकिन भोपाल के निशातपुरा पुलिस के प्रधान आरक्षक ने फुटेज देखने के बाद उसी हुलिए के संदिग्ध को यार्ड में घूमते देखा और फिर अपने उच्च अधिकारियों को खबर की। वहां से यहां खबर आयी और मामला खुल गया।
एसपी ने मामले के खुलासे के लिए पुलिस पार्टियां बनायीं थीं। सागर के परिजनों से मिले, चिराग से बातचीत की। पुलिस पार्टियों को इटारसी, बैतूल, भोपाल और नागपुर तक ट्रेनों में भेजा और यात्रियों को फुटेज दिखाकर पतारसी की। स्थानीय पार्टी ने घटना स्थल के आसपास की दुकानों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले थे। पुलिस को इनके रेलवे वेंडर होने का संदेह था। सोशल मीडिया पर फुटेज भेजे गए, भोपाल रेंज स्तर के सभी थानों में सीसीटीवी फुटेज भेजे गए थे। घटना का प्रचार-प्रसार करके सूचना देने की अपील की गई थी।
एसपी ने मामले के खुलासे के लिए पांच पुलिस टीम का गठन किया था। पहली टीम को सभी जगह के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज कलेक्शन के लिए लगाया। टीम नंबर दो को अज्ञात आरोपियों के फोटो के साथ तलाश के लिए जिम्मेदारी दी तो टीम नंबर तीन को मूविंग पार्टी के रूप में ट्रेन में फोटो दिखाकर आरोपियों की तलाश का काम सौंपा गया था। टीम नंबर चार को मोबाइल की जानकारी लेने के लिए लगाया तो टीम नंबर पांच को आरोपियों की तलाश एवं फरियादी के परिवार वालों से रंजिश रखने वालों की तलाश में लगाया गया था।

एसपी ने की ईनाम की घोषणा
शहर के इस बहुचर्चित और चुनौतीपूर्ण हत्याकांड के खुलासे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली भोपाल के निशातपुरा की पुलिस टीम को एसपी अरविंद सक्सेना ने ईनाम मिले, इसकी अनुशंसा करने की घोषणा की है। एसपी श्री सक्सेना ने प्रेसवार्ता में कहा कि पुलिस टीम ने कम समय में अत्यंत सक्रियता से इस चुनौतीपूर्ण और जघन्य हत्याकांड का खुलासा करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। निशातपुरा के प्र.आर. सत्येन्द्र चौबे, थाना प्रभारी एसएन मुकाती, एएसआई नरेन्द्र सिंह, प्रआ हरिनारायण, संतोष सिंह और दारासिंह ने अहम रोल निभाया है।

पांच टीम में ये थे शामिल
एसपी अरविंद सक्सेना और एएसपी शशांक गर्ग, एसडीओपी अनिल शर्मा के मार्गदर्शन और टीआई रामस्नेही चौहान के नेतृत्व में एसआई लवकुश शर्मा, एएसआई संजय रघुवंशी, आरक्षक हेमंत तिवारी, भूपेश मिश्रा, भागवेन्द्र, अविनाशी, केशव, राजेश पवार, अरविंद चौबे ने प्रकरण के खुलासे में भूमिका निभाई। इसमें निशातपुरा पुलिस का सबसे बड़ा योगदान रहा है।

VRIDANVAN GARDEN, ITARSI

इटारसी का सर्वसुविधायुक्त मैरिज गार्डन

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