साधना और कर्म की समाप्ति कभी नहीं होती- पाण्डेय

साधना और कर्म की समाप्ति कभी नहीं होती- पाण्डेय

श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन
इटारसी। मानव जीवन में साधना और सत्कर्म की कभी समाप्ति नहीं होती यह दोनों क्रियायें जीवन के अंतिम क्षणों तक चलते रहती हैं। उक्त ज्ञान पूर्ण उद्गार नर्मदांचल के भागवत कथाकार पं. जगदीश पाण्डेय ने ग्राम भट्टी में व्यक्त किये।
सत्संग के समापन दिवस में उपस्थित हजारों श्रोताओं के समक्ष श्री सुदामा प्रसंग का सांसारिक वर्णन करते हुए श्री पाण्डेय ने कहा कि श्री सुदामा जी एक बड़े विद्वान कर्मकाण्डी ब्राह्मण थे लेकिन उन्होंने गुरूकुल में शिक्षा ग्रहण के दौरान अपने मित्र श्री कृष्ण से एक मुट्ठी चने लिए असत्य बोला उनके यही एक असत्य ने उन्हें पूरा जीवन दरिद्रता के साथ व्यतीत करने पर मजबूर कर दिया। परन्तु परमात्मा की साधना और आराधना व करते रहे, इसलिए जीवन के अंतिम क्षणों में उन पर परमात्मा श्री कृष्ण की कृपा हुई तो वह सुख समृद्धिवान बने।
ग्राम भट्टी में आयोजित इस विशाल भागवत सत्संग ज्ञान यह समारोह के अंतिम दिवस में हजारों श्रोताओं के समक्ष प्रवचनकर्ता श्री पाण्डेय का नागरिक अभिनन्दन डीजल शेड के मुख्यो अधिकारी आरके जैन, जिला पंचायत सदस्य बाबू चौधरी, मुख्यत यजमान रमेश, अमित एवं मनजीत चौधरी ने किया। स्वागत कार्यक्रम का संचालन गणेश वर्मा ने किया। तत्पश्चात महाआरती हुई और प्रारंभ हुआ विशाल भंडारा जिसमें सभी उपस्थित श्रोताओं एवं ग्राम वासियों ने श्रीमद् भागवत जी का भोजन रूपी महाप्रसाद ग्रहण किया।

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