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स्वादिष्ट अचार से पूरी दुनिया में लहराया अपना परचम

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इटारसी। जिले के केसला ब्लाक के ग्राम कीरतपुर की महिलाओं की दुनिया अपने परिवार, बच्चों एवं चूल्हा चौका तक ही सिमटी थी। एक बार आपस में बैठकर तय किया कि वे भी कुछ न कुछ करके अपने परिवार की सहायता करेंगी। अधिकांश महिलाएं निरक्षर थीं ऐसे में उन्हें कोई सम्मानजनक नौकरी तो नहीं मिल पाती तो तय किया कि वे अचार का व्यवसाय करें। जब सबने तय कर लिया कि अब उन्हें अचार के उद्योग में ही हाथ आजमाना चाहिए। सामने सबसे बड़ी समस्या पैसों की थी। कोई बैंक उन्हें सहायता करन तैयार नहीं था। ऐसे में महिलाओं ने अपनी बचत से ही व्यवसाय करने का निर्णय लिया और सुरभि स्वयं सहायता समूह संघ की स्थापना की। शीघ्र ही उनकी मेहनत रंग लाई और भारतीय एग्रो इंडस्ट्री एग्रो फाइनेंस ने उन्हें तकनीकी सहयोग प्रदान करना शुरू किया।
समूह की स्थापना जैसे ही हुई इससे लगभग 88 महिलाएं जुड़ गर्इं और अचार बनाना शुरू किया। भारतीय एग्रो इंडस्ट्री एग्रो फाइनेंस ने उनके लिए मार्केट की तलाश की और इन महिलाओं का बनाया अचार खादी बोर्ड को सप्लाई करना शुरू किया। खादी बोर्ड की दुकानों से स्वादिष्ट अचार घर-घर पहुंचने लगा। सुरभि स्वसहायता समूह विंध्यवैली को अचार सप्लाई कर रही है। विंध्यवैली इन महिलाओं का बनाया आम का अचार एवं मिक्स अचार जिले से बाहर पूरे प्रदेश, देश एवं विदेश में भी पहुंचाने लगी। इन महिलाओं ने अपनी मेहनत एवं लगन के बूते स्वादिष्ट अचार बनाकर और उसे घर-घर पहुंचाकर अपना परचम पूरी दुनिया में लहरा दिया है।
समूह की अध्यक्ष उर्मिला सराठे का कहना है कि प्रारंभ में यात्रा कठिन थी किंतु महिलाओं को अपने हुनर और मेहनत पर पूरा विश्वास था। समूह में आदिवासी एवं सभी वर्ग की महिलाएं हैं, सभी अचार बनाने में पारंगत हैं। पूर्व में उन्होंने गुजरात में जाकर अचार बनाने का प्रशिक्षण लिया, फिर कीरतपुर में महिलाओं को प्रशिक्षित किया। आज इस समूह का बनाया अचार खादी बोर्ड एवं विंध्यवैली को थोक में जाता है जो वे अपने स्तर से उसे बेचते हैं। वर्तमान में समूह आम का एवं मिक्स अचार बनाता है। यह कार्य वर्ष भर चलता है।
एक किलो आम का अचार 80 रुपए में तथा 5 किलो का अचार 220 रुपए में बेचा जाता है। साल भर में लगभग 10 लाख रुपए तक का अचार बिक जाता है। हर महिला को इससे प्रति माह 4 से 5 हजार रुपए की आमदनी होती है। अचार की पैकिंग, लेबलिंग एवं लेखा संबंधी तकनीकी मदद भारतीय एग्रो इंडस्ट्री एग्रो फाइनेंस करती है। महिलाएं सड़क मार्ग में अपना बाजार लगाकर भी अचार बेचती हैं। यहां हर अचार बिक्री पर ग्राहक को पक्की रसीद दी जाती है। श्रीमती सराठे ने कहा कि उनके समूह को सरकार से काफी उम्मीदें हैं। महिलाएं चाहती हैं कि उन्हें सरकार से बड़ा मार्केट मिले ताकि वे अपने उद्योग का विस्तार कर सकें।

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