हम हर साल एक नया छोटा राष्ट्र बनाते हैं : शास्त्री

हम हर साल एक नया छोटा राष्ट्र बनाते हैं : शास्त्री

इटारसी। कलचूरी भवन गरीबी लाईन में श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस कथा को विस्तार देते हुए आचार्य पं. मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि हमें अपने देश में बढ़ती जनसंख्या पर चिंतन करना चाहिए। प्रतिवर्ष भारत में जनसंख्या में तेजी से वृद्धि कर एक छोटा राष्ट्र पैदा कर रहे हैं।
पं. मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण अकेले हिन्दुओं की आवश्यकता नहीं है, बल्कि राष्ट्रहित में सभी धर्मों के अनुयायियों का इसका कठोरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आज जनसंख्या नियंत्रण पर विचार नहीं किया तो चीन से भी बुरे हालत हमारे देश के हो जाएंगे। आचार्य पं. मधुसूदन शास्त्री ने कि त्रेता और द्वापर में जितने भी देवी देवता हुए उन सभी ने जनसंख्या नियंत्रण करने कम संतानें पैदा की। श्रीमद् भागवत कथा हिंदुस्तान के प्रत्येक व्यक्ति को जो आस्तिक या नास्तिक हो, उन सब के लिए हमारे आराध्य देवी देवताओं का यही संदेश है कि हम जनसंख्या नियंत्रण के लिए अधिक संतानें पैदा न करें।
श्रीमद् भागवत कथा में महाभारत काल का जिक्र करते हुए आचार्य पं. मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि पांडवों की पत्नी द्रोपदी के पुत्रों का अश्वत्थामा ने वध किया तब भगवान कृष्ण के निर्देश पर अर्जुन ने अश्वत्थामा का वध कर दिया। कथा व्यास शास्त्री ने कहा कि शारारिक वध का विधान ऐसे लोगों के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि द्रोपदी के बालकों की हत्या करने के बाद अश्वत्थामा वैसे ही श्रीहीर हो चुका था। अर्जुन ने अपनी तलवार से अश्वत्थामा के सिर की मणि और उसके बालों को उतार लिया।
आचार्य पं. मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि भगवान ने गर्भ में ही परीक्षित की रक्षा की एवं पांडवों की मां कुन्ती ने हस्तनापुर की अधोगति पर भगवान की स्तुति की। उन्होंने कहा कि महाभारत के युद्ध में कौरवों की मृत्यु पर युधिष्ठिर ने शोक जताया। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को संदेश देते हुए कहा कि कब क्या होना है सब निश्चित है। जब पितामह भीष्म ने प्राण त्यागें उस समय युधिष्ठिर सहित पांडव उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि महाभारत का युद्ध समाप्त होने के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका चले गए। द्वारिका पहुंचने पर उनका स्वागत सत्कार हुआ। आचार्य पं. मधुसूदन शास्त्री ने परीक्षित के जन्म, विदुर के उपदेश के बाद धृतराष्ट्र गंधारी की वन में जाने वाली कथा का श्रवण कराया। कथा के प्रारंभ में नालंदा एजुकेशन सोसाइटी एवं चौकसे परिवार की ओर से अभिनय चौकसे, श्रीमती वैशाली चौकसे, अनुराग चौकसे एवं श्रीमती दीपिका चौकसे ने व्यासपीठ पर आचार्य मधुसूदन शास्त्री का स्वागत किया।

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