हर्ष उल्लास के साथ क्षेत्र में मनाया गया भुजलिया पर्व

सारणी। नगरपालिका क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर भुजलिया का पर्वत बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया। पहले महिलाओं ने भुजलिया को अपने घर के सामने रखकर उसकी पूजा अर्चना की और उसके बाद महिलाओं का समूह एकजुट होकर गाजे बाजे के साथ नदी के समीप जाकर भुजलिया का विसर्जन किया है और उसके बाद भुजलिया को सिर पर रख कर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर सुख समृद्धि की कामना की है। वहीं दूसरी तरफ शोभापुर केजरी चौक से विशाल भुजलिया रेली निकालकर नदी पर पहुंचकर उसका विसर्जन किया गया इस अवसर पर नदी के दोनों तरफ दो पक्षों में जमकर एक दूसरे के साथ वाद विवाद किया बताया जाता है कि पुरानी मान्यता के अनुरूप सावन के समापन के बाद भुजलिया मनाकर सावन की विदाई दी जाती है और यह परंपरा लंबे समय से क्षेत्र वासी मनाते चले आ रहे हैं।
पाथाखेड़ा में पीका रहा भुजलिया का पर्व
कॉलोनी चलचित्र पाथाखेड़ा के विभिन्न वार्डों से पाथाखेड़ा के राजेंद्र नगर में एकत्र होकर किसी जमाने में विशाल भुजलिया जुलूस निकला करता था लेकिन अब पुराने लोगों के ना होने के कारण इस बार भुजलिया का जुलूस नहीं निकल पाया है। नगर की महिलाएं 1,2 के समूह के साथ पास की नदी और पोखरों में पहुंचकर भुजरिया का विसर्जन किया है। लेकिन पाथाखेड़ा क्षेत्र में आज से 5 वर्ष पूर्व तक जो भुजलिया का उत्सव मनाया जाता था उस तरह का उत्सव इस बार देखने को नहीं मिला है। लोगों को मानना है कि पुराने लोगों के सेवानिवृत्त तो होकर क्षेत्र से बाहर जाने के कारण भुजलिया त्यौहार पर खासा असर पड़ा है यही वजह है कि भुजलिया काफी पीका रहा।

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