हाईकोर्ट की निगरानी में बढ़े अंक, माशिमं के खिलाफ फैसला

अंकुर मिश्रा के पक्ष में हाईकोर्ट ने की याचिका स्वीकार

अंकुर मिश्रा के पक्ष में हाईकोर्ट ने की याचिका स्वीकार
इटारसी। कक्षा 12वी के छात्र अंकुर मिश्रा द्वारा हाईकोर्ट में प्रस्तुत याचिका क्रमांक 11421/16 को स्वीकार करते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल को आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को गणित में 80 के स्थान पर 87 अंक देकर चार सप्ताह के अंदर नई अंकसूची जारी की जाए। उक्ताशय की जानकारी याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ऐश्वर्य (पार्थ) साहू ने दी।
श्री साहू ने बताया कि विगत दिनों उच्च न्यायालय जबलपुर की डबल बैंच के न्यायधीश आरएस झा एवं एके जोशी द्वारा याचिकाकर्ता अंकुर मिश्रा की कक्षा 12 वी की गणित की कापी के पुनर्मूल्यांकन के आदेश इस शर्त के साथ जारी किए थे कि यदि पुनर्मूल्यांकन में अंक नहीं बढ़ेगें तो याचिकाकर्ता को 15000 रुपए की कास्ट देना पड़ेगा। हाईकोर्ट के आदेशानुसार उच्च न्यायालय के कोर्ट नंबर 3 में प्रात:10.30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से याचिकाकर्ता की मूल उत्तर पुस्तिका एवं मॉडल ऑन्सर शीट प्रस्तुत की गई जिनका पुनर्मूल्याकंन कोर्ट रूम में ही गणित के दो एक्पर्ट टीचर सतीष कुमार उपाध्याय यूबीटी गणित, पं. लज्जाशंकर झा गर्वमेंट मॉडल हाई स्कूल ऑफ ऐक्सीलेंस तथा रमेश कुमार त्रिपाठी पीजीटी गणित केन्द्रीय विद्यालय क्र. 1 जबलपुर द्वारा की गई जिसमें एक एक्सपर्ट द्वारा 08 एवं दूसरे एक्सपर्ट द्वारा 07 अंकों की वृद्धि की गई जिसे सुनवाई उपरांत 07 अंकों की वृद्धि स्वीकार की गई। अब याचिकाकर्ता को गणित में 80 के स्थान पर 87 अंक प्राप्त हो गये हैं तथा संपूर्ण अंकों का प्रतिशत 86 हो गया है।
उच्च न्यायालय ने यह भी आदेशित किया है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिवक्ता यह भी सुनिश्चित करेंगे कि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को संशोधित अंकसूची प्राप्त हो जाये। अपने आदेश में अंक बढऩे के कारण याचिकाकर्ता पर इम्पोज की गई 15000 रुपए की कास्ट के प्रश्न को भी समाप्त घोषित कर दिया और वर्णित निर्देशों के साथ याचिका का निराकरण किया है।
उल्लेखनीय है कि अंकुर मिश्रा ने माध्यमिक शिक्षा मंडल के विरूद्ध वर्ष 2016 में याचिका प्रस्तुत की थी। अंकुर मिश्रा महावीर जैन हायर सेकेण्डरी स्कूल के छात्र रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से ऐश्वर्य साहू एवं शासन की ओर से पीयूष धर्माधिकारी एडव्होकेट एवं माशि मंडल भोपाल की ओर से सुभाष कुमार चतुर्वेदी ने अपना-अपना पक्ष रखा।
इनका कहना है …!
बोर्ड की लापरवाही से अंकुर मिश्रा जैसे अनेकों छात्र-छात्रा मानसिक रूप से प्रताडि़त होते हैं, बोर्ड अपनी कार्य पद्धति सुधारे।
रमेश के साहू एडव्होकेट
अपने हक की लड़ाई में अंकुर मिश्रा ने साहस पूर्ण काम किया है, उन्हें बधाई तथा ऐश्वर्य (पार्थ) साहू ने नि:शुल्क याचिका पेश कर जो सेवा दी, उनका महावीर जैन हायर सेकेंडरी स्कूल परिवार की ओर से आभार।
पारस जैन, एडव्होकेट

मुझे बेहद खुशी है, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से मेरे पढ़ाये हुए छात्र ने अपना अधिकार पाया।
जीपी मालवीय, शिक्षक

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