अखिलेश शुक्ला

बॉलीवुड के ‘शहंशाह’ अमिताभ बच्चन का नाम सुनते ही हमारे जहन में ‘शोले’, ‘दीवार’, ‘अमर अकबर एंथनी’ और ‘जंजीर’ जैसी सुपरहिट फिल्मों की झलक आ जाती है। उनकी आवाज़, उनका अंदाज़ और उनकी मौजूदगी ने दर्शकों के दिलों पर दशकों तक राज किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महान अभिनेता की करियर की राह भी हमेशा आसान नहीं रही? उनकी लोकप्रियता के शिखर पर भी कई ऐसी फिल्में थीं जो कभी पूरी नहीं हो पाईं। ये वो प्रोजेक्ट्स थे जो शुरू तो हुए, लेकिन किसी न किसी वजह से रास्ते में ही अधूरे रह गए।
आज हम आपको एक ऐसे ही रोचक सफर पर ले चलेंगे, जहाँ हम जानेंगे अमिताभ बच्चन की उन 10 फिल्मों के बारे में, जो दर्शकों का सामना कभी नहीं कर पाईं। ये कहानियाँ न सिर्फ़ फिल्म निर्माण की चुनौतियों को दर्शाती हैं, बल्कि बॉलीवुड के इतिहास के एक दिलचस्प पहलू को भी उजागर करती हैं।
1. सरफरोश (1979)
- क्यों रुकी? : रहस्यमयी कारण
साल 1979 की बात है। अमिताभ बच्चन उस दौर के सबसे बड़े स्टार थे और उनके साथ काम करने वाले निर्देशक मनमोहन देसाई उनकी जोड़ी के लिए मशहूर थे। इसी जोड़ी ने ‘सरफरोश’ नाम की एक फिल्म पर काम शुरू किया। फिल्म में कादर खान और परवीन बाबी जैसे कलाकार भी थे। हैरानी की बात ये है कि फिल्म की शूटिंग काफी हद तक पूरी भी हो चुकी थी। लेकिन अचानक, किन्हीं अनजान वजहों से, यह प्रोजेक्ट रुक गया और फिर कभी शुरू नहीं हो पाया। आज तक यह रहस्य बना हुआ है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो एक पूरी होती हुई फिल्म अधूरी ही रह गई।
2. तालिस्मान
- क्यों रुकी? : बढ़ता बजट
इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन और निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा एक साथ आए थे, जबकि डायरेक्टर राम माधवानी थे। फिल्म की कहानी एक योद्धा के इर्द-गिर्द घूमती थी। खास बात यह थी कि इस फिल्म में भारी मात्रा में विशेष Effects (ग्राफिक्स) का इस्तेमाल होना था। उस जमाने में ग्राफिक्स बहुत महंगा हुआ करता था। इसी वजह से फिल्म का बजट आसमान छूने लगा। बजट इतना बढ़ गया कि निर्माताओं के लिए फिल्म को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया और आखिरकार ‘तालिस्मान’ का तिलिस्म टूट गया।
3. अपने-पराए (1972)
- क्यों रुकी? : वित्तीय समस्या
अमिताभ बच्चन और रेखा की जोड़ी को सबसे पहले 1976 की फिल्म ‘दो अनजाने’ में देखा गया था। लेकिन कम लोग जानते हैं कि इससे चार साल पहले, 1972 में, ही दोनों ने ‘अपने-पराए’ नाम की फिल्म साइन की थी। फिल्म की शूटिंग शुरू भी हुई और कुछ सीन्स भी फिल्माए गए। मगर, कहा जाता है कि फिल्म के निर्माताओं को पैसों की दिक्कत आ गई। फंड की कमी के चलते यह प्रोजेक्ट बीच में ही बंद हो गया और फिल्म इतिहास की एक धुंधली सी याद बनकर रह गई।
4. बंधुआ
- क्यों रुकी? : निर्देशक से मतभेद
यह कहानी है फिल्म निर्देशक जे.पी. दत्ता की। अमिताभ बच्चन ने उनकी फिल्म ‘बंधुआ’ के लिए हाँ कर दी थी। शूटिंग शुरू हुई, लेकिन सिर्फ़ एक दिन चल पाई। कहा जाता है कि पहले दिन की शूटिंग के बाद ही अमिताभ और जे.पी. दत्ता के बीच किसी बात को लेकर गहरे मतभेद हो गए। यह अनबन इतनी बढ़ी कि फिल्म तुरंत बंद कर दी गई। हालाँकि बाद में दोनों के बीच सुलह हो गई, लेकिन ‘बंधुआ’ फिल्म कभी बंध नहीं पाई।
5. देवा
- क्यों रुकी? : निर्देशक से अनबन का होना
अमिताभ बच्चन के साथ निर्देशक सुभाष घई की जोड़ी ने ‘कालिया’ और ‘खलनायक’ जैसी हिट फिल्में दी थीं। इसी कड़ी में ‘देवा’ नाम की एक और फिल्म की तैयारी हो रही थी। सब कुछ प्लान के मुताबिक चल रहा था। लेकिन यहाँ भी वही हुआ जो ‘बंधुआ’ के साथ हुआ था। अमिताभ और सुभाष घई के रिश्तों में खटास आ गई। इसकी वजह से ‘देवा’ फिल्म का पहला शॉट लेने के बाद ही प्रोजेक्ट रद्द हो गया।
6. रणवीर
- क्यों रुकी? : एबीसीएल का संकट
यह फिल्म बेहद खास थी क्योंकि इसमें अमिताभ बच्चन पहली बार अपने बेटे अभिषेक बच्चन के साथ नजर आने वाले थे। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि अमिताभ खुद ही इसे अपनी कंपनी एबीसीएल (अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के बैनर तले बना रहे थे। फिल्म का ऑफिशियल पोस्टर भी जारी कर दिया गया था और सबको उम्मीदें थीं। मगर, उसी दौरान एबीसीएल को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस वजह से ‘रणवीर’ जैसी महत्वाकांक्षी फिल्म भी कागजों तक ही सिमट कर रह गई।
7. गुनाहों का देवता
- क्यों रुकी? : प्रोजेक्ट का ठप पड़ना
धर्मवीर भारती का उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ हिंदी साहित्य की एक मशहूर कृति है। इसी क्लासिक उपन्यास पर फिल्म बनाने की योजना बनी। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें अमिताभ बच्चन के सामने उनकी पत्नी जया बच्चन होतीं। साहित्यिक कहानी और रियल-लाइफ कपल की जोड़ी ने दर्शकों की उम्मीदें बहुत बढ़ा दी थीं। शूटिंग भी शुरू हो गई, लेकिन किन्हीं कारणों से यह प्रोजेक्ट हमेशा के लिए ठप हो गया।
8. शांताराम
- क्यों रुकी? : विवादों में फंसी
यह फिल्म एक अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट थी। इसे प्रसिद्ध फिल्मकार मीरा नायर निर्देशित कर रही थीं और अमिताभ बच्चन के साथ हॉलीवुड के सुपरस्टार जॉनी डेप को भी इसमें कास्ट किया गया था। Gregory David Roberts के उपन्यास ‘Shantaram’ पर आधारित यह फिल्म बेहद महत्वाकांक्षी थी। लेकिन अफवाहों के मुताबिक, क्रिएटिव मतभेद और कुछ विवादों के चलते यह प्रोजेक्ट लंबे समय तक अटका रहा और आखिरकार रद्द ही हो गया।
9. रिश्ता
- क्यों रुकी? : अनजान वजहें
इस फिल्म की कल्पना ही करें – एक सीनियर सुपरस्टार अमिताभ बच्चन और उस जमाने के यंग सेंसेशन आमिर खान एक साथ एक फ्रेम में। ‘रिश्ता’ नाम की इस फिल्म ने दर्शकों में एक अलग ही उत्साह पैदा किया था। शूटिंग की शुरुआत भी हो चुकी थी। लेकिन अचानक, बिना किसी स्पष्ट कारण के, फिल्म बंद हो गई। आज तक यह स्पष्ट नहीं है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो यह अनोखी जोड़ी दर्शकों तक नहीं पहुँच पाई।
10. साधू-संत
- क्यों रुकी? : प्रोजेक्ट का विलय
इस फिल्म के निर्देशक प्रकाश मेहरा थे, जिन्होंने अमिताभ के साथ ‘जंजीर’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी फिल्में बनाई थीं। ‘साधू-संत’ में अमिताभ बच्चन के अलावा मिथुन चक्रवर्ती, हेमा मालिनी और मीनाक्षी शेषाद्री जैसे दिग्गज कलाकारों को शामिल किया गया था। ऐसा लग रहा था कि यह एक बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित होगी। लेकिन कहा जाता है कि यह प्रोजेक्ट किसी दूसरी फिल्म में विलय (merge) हो गया या फिर किसी और वजह से रद्द हो गया।
एक अन्य फ़िल्म :नया भारत
- क्यों रुकी? : महत्वाकांक्षा और जटिलता
देशभक्ति की फिल्मों के मास्टर माने जाने वाले मनोज कुमार एक बहुत बड़ी फिल्म बनाना चाहते थे – ‘नया भारत’। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के अलावा राजेश खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा, शशि कपूर, ऋषि कपूर, ज़ीनत अमान और हेमा मालिनी जैसे दिग्गज सितारे थे। इतने सारे बड़े सितारों को एक साथ लाना, शेड्यूलिंग और बजट की दृष्टि से एक बहुत बड़ी चुनौती थी। माना जाता है कि इसी जटिलता और बढ़ते खर्च के कारण यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट कभी अंजाम तक नहीं पहुँच पाया।
निष्कर्ष:
- क्या होता अगर ये फिल्में बन जातीं?
ये सभी फिल्में अमिताभ बच्चन के करियर के ‘वैकल्टर्नेट हिस्ट्री’ (Alternate History) यानी वैकल्पिक इतिहास का हिस्सा हैं। इनमें से किसी भी फिल्म के बन जाने से बॉलीवुड का भूगोल और इतिहास शायद कुछ और ही होता। क्या ‘रणवीर’ अभिषेक और अमिताभ की पहली सफल जोड़ी साबित होती? क्या ‘शांताराम’ अमिताभ को ग्लोबल स्टार्डम की और बुलंदियों पर पहुँचा देती?
इन सवालों के जवाब तो कभी नहीं मिलेंगे। लेकिन इतना जरूर है कि ये अधूरी फिल्में हमें यह याद दिलाती हैं कि फिल्म निर्माण एक जोखिम भरा व्यवसाय है, जहाँ सुपरस्टार्स के होते हुए भी कई बार दृश्य कैमरे तक नहीं पहुँच पाते। अमिताभ बच्चन का सफर इन असफलताओं और अधूरे सपनों के बावजूद शानदार रहा है। और शायद, इन फिल्मों का न बन पाना ही इस बात का प्रमाण है कि कोई भी सितारा, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, चुनौतियों से अछूता नहीं है।
अखिलेश शुक्ला
सेवा निवृत्त प्राचार्य, लेखक, ब्लॉगर








